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जी7 ने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को सुरक्षित करने का संकल्प लिया: फ़्रांस के विदेश मंत्री

ज्यां नोएल बारो ने बताया कि मार्को रुबियो ने यूरोपियन यूनियन काउंसिल ऑफ़ फॉरेन अफ़ेयर्स को हालात की जानकारी देने और इस गतिरोध को हल करने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई है.

सारांश

लाइव कवरेज

अरशद मिसाल, चंदन कुमार जजवाड़े

  1. अब इस लाइव पेज को विराम देने का वक़्त आ गया है. बीबीसी संवाददाता अरशद मिसाल को दीजिए इजाज़त.

    कल सुबह एक नए लाइव पेज के साथ हम फिर हाज़िर होंगे.

    बीबीसी न्यूज़ हिन्दी की वेबसाइट पर लगी कुछ अहम ख़बरों को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें.

  2. जी7 ने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को सुरक्षित करने का संकल्प लिया: फ़्रांस के विदेश मंत्री

    फ़्रांस के विदेश मंत्री ज्यां नोएल बारो ने कहा कि जी7, ईरान में जारी जंग के प्रभाव को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है.

    उन्होंने आगे कहा कि, “जी7 नागरिक बुनियादी ढांचे और आम लोगों पर हो रहे हमलों को फ़ौरन रोकने की मांग करता है."

    उत्तरी फ़्रांस के वो-दे-सेर्नी में अपने समकक्षों के साथ बैठक के बाद उन्होंने कहा कि, “इन हमलों को कुछ भी सही नहीं ठहराता और नागरिकों की पूरी तरह सुरक्षा की जानी चाहिए."

    अपने बयान में उन्होंने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में जहाज़ों की “स्वतंत्र और सुरक्षित आवाजाही” सुनिश्चित करने के लिए जी7 के प्रयासों को भी दोहराया.

    ज्यां नोएल बारोने बताया कि मार्को रुबियो ने यूरोपियन यूनियन काउंसिल ऑफ़ फॉरेन अफ़ेयर्स को हालात की जानकारी देने और इस गतिरोध को हल करने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई है.

    जी-7 क्या है?

    जी-7 यानी 'ग्रुप ऑफ़ सेवन' दुनिया की सात 'अत्याधुनिक' अर्थव्यवस्थाओं का एक गठजोड़ है, जिसका ग्लोबल ट्रेड और अंतरराष्ट्रीय फ़ाइनेंशियल सिस्टम पर दबदबा है. इसके सदस्य देश कनाडा, फ़्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका हैं.

  3. ईरान के क़ोम शहर पर हुए हमले में 18 लोग मारे गए, बीबीसी पर्शियन सर्विस

    ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक़, देश के क़ोम शहर पर हुए हमले में कम से कम 18 लोग मारे गए हैं और 10 लोग घायल हुए हैं.

    कोम के गवर्नर मोर्तज़ा हैदरी के मुताबिक़ ये हमला कल रात शहर के परदीसन इलाक़े में हुआ.

    ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने घोषणा की है कि बचावकर्मी घटना स्थल से मलबा हटा रहे हैं और राहत कार्य कर रहे हैं.

    रेड क्रिसेंट के प्रवक्ता ने भी बताया कि ये हमला कल रात शहर के परदीसन इलाक़े में हुआ.

  4. वैश्विक बाज़ार में आसमान छू रही तेल की कीमतों को कौन नियंत्रित करता है?, मिचेल लैबियाक, बीबीसी संवाददाता

    ईरान के साथ अमेरिका और इसराइल की जंग के बाद से वैश्विक बाज़ार में तेल की क़ीमतें बढ़ी हैं.

    ईरान ने जंग शुरू होने के बाद से स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को बंद कर दिया है. दरअसल, दुनिया का क़रीब 20 फ़ीसदी तेल इसी रास्ते से होकर गुज़रता है और इसी वजह से वैश्विक बाज़ार में तेल की क़ीमतें आसमान छू रही हैं.

    अब सवाल है कि आख़िर तेल के क़ीमतों को नियंत्रित करता कौन है?

    इसका जवाब है- बाज़ार. "बाज़ार" से हमारा मतलब उन देशों और कंपनियों से है जो तेल का उत्पादन करते हैं, साथ ही तेल के व्यापारी भी शामिल हैं.

    पहला ग्रुप ओपेक+ से काफ़ी प्रभावित है. यह 23 तेल उत्पादक देशों का एक समूह है, जो मिलकर यह तय करने की कोशिश करते हैं कि वो कितना तेल उत्पादन करेंगे, ताकि क़ीमतों को प्रभावित किया जा सके.

    अगर वो चाहते हैं कि क़ीमतें बढ़ें, तो वो कच्चे तेल का उत्पादन कम करने पर सहमत होते हैं. अगर वो चाहते हैं कि क़ीमतें घटें, तो वो अधिक उत्पादन करने पर सहमत होते हैं.

    अमेरिकी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2022 में ओपेक+ ने दुनिया के क़रीब 59 फ़ीसदी तेल का उत्पादन किया. इसलिए इसका असर काफ़ी होता है, लेकिन यह क़ीमतों को पूरी तरह नियंत्रित नहीं करता.

    शेल और बीपी जैसी बड़ी तेल कंपनियां अपने फ़ैसले खुद लेती हैं. इसी तरह ओपेक+ के बाहर के तेल उत्पादक देश भी स्वतंत्र रूप से निर्णय लेते हैं. इनमें अमेरिका जैसे देश शामिल हैं.

    दूसरा समूह तेल के व्यापारी (ऑयल ट्रेडर्स) होते हैं, जिनमें व्यक्तिगत लोग, निवेश कंपनियां और फंड शामिल होते हैं.

    ये लोग बाज़ार में तेल की ख़रीद-फ़रोख्त करते हैं. ये आम तौर पर "फ्यूचर्स" ख़रीदते हैं, यानी ऐसे अनुबंध जिनमें भविष्य की किसी तय तारीख़ पर, तय क़ीमत पर एक निश्चित मात्रा में तेल ख़रीदने का समझौता होता है. दूसरे शब्दों में, यह तेल की क़ीमतों के भविष्य पर एक तरह का दांव होता है.

    गैस की क़ीमतों के मामले में भी स्थिति लगभग यही होती है. गैस उत्पादन करने वाले देश और कंपनियां उत्पादन को नियंत्रित करते हैं, जबकि गैस फ्यूचर्स के व्यापारी अनुबंधों की ख़रीद-फ़रोख्त करते हैं.

    बीबीसी समेत कई अन्य मीडिया संस्थान और अर्थशास्त्री आम तौर पर एक महीने के फ्यूचर्स को तेल और गैस की क़ीमतों का मानक (बेंचमार्क) मानते हैं, क्योंकि इन्हें अन्य मापदंडों की तुलना में कम उतार-चढ़ाव वाला माना जाता है.

  5. यूएई में मिसाइल हमले में भारतीय नागरिक की मौत पर बोले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता

    संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई के अबू धाबी में मलबा गिरने से एक भारतीय नागरिक की मौत पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रतिक्रिया दी है.

    उन्होंने कहा कि, "हमारा मिशन पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत वापस भेजने के लिए काम कर रहा है, उम्मीद है कि यह जल्द ही हो जाएगा."

    उन्होंने यह भी कहा, "वहां से लोगों को निकालने की कोई वजह नहीं दिख रही है, क्योंकि हर दिन सैकड़ों उड़ानें खाड़ी से भारत आ रही हैं और भारत से खाड़ी जा रही हैं."

    गुरुवार को अबू धाबी पर हुए बैलिस्टिक मिसाइल हमले में जान गंवाने वाले दो लोगों में एक भारतीय नागरिक भी शामिल था.

  6. प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल के पीएम बनने पर बालेन शाह को दी बधाई

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेने पर बालेन शाह को बधाई दी है.

    उन्होंने एक्स पर लिखा, “नेपाल के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेने पर बालेन शाह को हार्दिक बधाई.”

    उन्होंने आगे लिखा, “आपकी नियुक्ति नेपाल के लोगों द्वारा आपके नेतृत्व पर जताए गए विश्वास को दर्शाती है. मैं भारत और नेपाल के बीच दोस्ती और सहयोग को हमारे दोनों देशों के लोगों के पारस्परिक हित में और नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने की आशा करता हूं.”

    नेपाल की राजधानी काठमांडू के मेयर के तौर पर सिर्फ़ तीन साल काम करने के बाद, शाह ने 'राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी' के साथ हाथ मिलाया और प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर इस महीने हुए आम चुनावों में निर्णायक जीत हासिल की.

  7. कार्टून : ध्यान देने की समस्या

  8. स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से गुज़रने की कोशिश कर रहे तीन जहाज़ों को ईरान ने वापस लौटाया, घोंचेह हबीबीज़ाद, बीबीसी संवाददाता

    ईरान ने कहा है कि उसने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से गुज़रने की कोशिश कर रहे तीन जहाज़ों को वापस लौटा दिया है.

    ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि आज सुबह तीन जहाज़ उस रास्ते से गुज़रने की कोशिश कर रहे थे, जिसे सिर्फ़ इजाज़त दिए गए जहाज़ों के लिए तय किया गया है.

    आईआरजीसी ने अपने बयान में कहा, “अलग-अलग देशों के तीन कंटेनर जहाज़ उस निर्धारित रास्ते की ओर बढ़ रहे थे. आईआरजीसी नेवी की चेतावनी के बाद उन्हें वापस भेज दिया गया.”

    बयान में यह भी कहा गया है कि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ बंद है और इससे कोई भी जहाज़ गुजरेगा तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

    आईआरजीसी ने कहा, “अमेरिका और इसराइल के सहयोगी देशों के बंदरगाहों से आने-जाने वाले किसी भी जहाज़ को, किसी भी रास्ते से गुज़रने की अनुमति नहीं है.”

    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने दो दिन पहले सरकारी टीवी पर कहा था कि ईरान ने अब तक चीन, रूस, पाकिस्तान, इराक और भारत जैसे देशों के जहाज़ों को गुज़रने की इजाज़त दी है.

    उन्होंने कहा कि ईरान के नज़रिए से यह स्ट्रेटपूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन ये सिर्फ़ “दुश्मनों के लिए बंद” है.

  9. अमेरिका और ईरान के बीच जल्द हो सकती है सीधी बातचीत : जर्मनी के विदेश मंत्री

    पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच जल्द ही सीधी बातचीत हो सकती है.

    रॉयटर्स के मुताबिक, जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने कहा है कि दोनों देशों के प्रतिनिधि सीधे बातचीत के लिए पाकिस्तान में मिलने की तैयारी कर रहे हैं.

    जर्मनी के एक रेडियो स्टेशन से बातचीत में वेडफुल ने कहा कि दोनों देशों के बीच “अप्रत्यक्ष संपर्क” रहे हैं और “सीधी मुलाकात की तैयारियां कर ली गई हैं.”

    उनके मुताबिक ये बातचीत बहुत जल्द पाकिस्तान में हो सकती है.

  10. ईरान के लिए अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि रहे रॉबर्ट मैली ने कहा 'हमलों पर विराम' का मतलब बातचीत नहीं

    अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन प्रशासन के दौरान ईरान में अमेरिका के विशेष दूत रहे रॉबर्ट मैली ने बीबीसी से बात की है.

    मैली का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप का ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर हमले को 10 दिनों के लिए टालने का मतलब यह नहीं है कि वह इससे पहले "ज़मीनी हमले का आदेश नहीं देंगे."

    उन्होंने आगे कहा, “ ट्रंप का यह कहना कि ‘बातचीत में हुई प्रगति के कारण यह विराम उचित है’, इसका मतलब यह नहीं है कि असल में कोई बातचीत चल भी रही है."

    पेंटागन ने इस हफ़्ते इस क्षेत्र में और अधिक ज़मीनी सैनिक तैनात किए हैं. ठीक उसी समय अमेरिका ने कहा कि उसने ईरान को 15-सूत्रीय शांति योजना सौंपी है.

    मैली का कहना है कि इस संघर्ष का सबसे संभावित परिणाम अमेरिका और ईरान के बीच कोई "बड़ा समझौता" नहीं होगा.

    उनका कहना है कि यह तब होगा जब ट्रंप यह तय कर लेंगे कि अब बहुत हो चुका और इससे उन्हें राजनीतिक और आर्थिक, दोनों ही मोर्चों पर नुक़सान उठाना पड़ रहा है.

  11. कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, 'मोदी का मास्टरस्ट्रोक: कच्चा तेल सस्ता, पर ईंधन महंगा'

    केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल पर सेंट्रल एक्साइज़ ड्यूटी में कटौती की है. केंद्रीय मंत्री और अन्य बीजेपी नेता इस फ़ैसले को सरकार की तरफ से एक बड़ा कदम बता रहे हैं.

    इस मुद्दे पर कांग्रेस नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है.

    कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "मई 2014 में कच्चे तेल की क़ीमत 106.94 डॉलर प्रति बैरल थी लेकिन पेट्रोल की कीमत ₹71.71 प्रति लीटर और डीज़ल की ₹56.71 थी."

    "जबकि पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने से ठीक पहले कच्चे तेल की क़ीमत गिरकर 70 डॉलर प्रति बैरल थी, लेकिन दिल्ली में पेट्रोल ₹94.72 प्रति लीटर और डीज़ल ₹87.62 में बिक रहा था."

    पवन खेड़ा ने लिखा, "भारत ने रूस से भी रियायती दर पर कच्चा तेल ख़रीदा. लेकिन इस फ़ायदे का लाभ उपभोक्ताओं को राहत के रूप में नहीं मिला. तो एक तरफ तेल की वैश्विक क़ीमतें गिरीं और वहीं भारतीय उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ गया."

    पवन खेड़ा का कहना है कि साल 2014 और 2026 के बीच, सरकार ने एक्साइज़ ड्यूटी में कुल 21 बार बदलाव किए जिसमें 12 बार इसे बढ़ाया गया.

    इससे पहले केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है.

    पेट्रोल पर एक्साइज़ ड्यूटी 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर की गई है, जबकि डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी 10 रुपये से घटाकर शून्य कर दी गई है.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ यह कदम एचपीसीएल, बीपीसीएल और आईओसी जैसी तेल कंपनियों की मदद के लिए उठाया गया है.

    इसका मक़सद तेल कंपनियों को मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध के बीच कच्चे तेल की बढ़ती वैश्विक कीमतों से मुक़ाबले के लिए सपोर्ट करना है.

    वित्त मंत्रालय ने 26 मार्च को जारी एक अधिसूचना में, पेट्रोल पर एक्साइज़ ड्यूटी को पहले के 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, जबकि डीज़ल पर लगने वाले शुल्क 10 रुपये प्रति लीटर को पूरी तरह ख़त्म कर दिया गया है.

    मंत्रालय ने बताया कि ये शुल्क कटौती तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है.

    साल 2014 में मई महीने में पहली बार नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनी थी.

    कांग्रेस पार्टी लगातार आरोप लगाती रही है केंद्र सरकार ने डीज़ल और पेट्रोल की क़ीमतों को बढ़ाकर बड़ी कमाई की और लोगों को इसका लाभ नहीं मिला.

  12. नमस्कार!

    अब तक बीबीसी संवाददाता चंदन कुमार जजवाड़े आप तक ख़बरें पहुंचा रहे थे. अब से रात 10 बजे तक बीबीसी संवाददाता अरशद मिसाल आप तक अहम ख़बरें पहुंचाएंगे.

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  13. नेपाल में बालेन शाह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, केली एनजी और कोह ईव

    रैपर से राजनेता बने बालेन शाह ने नेपाल के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली है.

    पिछले साल युवाओं के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद देश में हुए पहले चुनाव में उन्हें ज़बरदस्त जीत मिली थी.

    35 साल के शाह का राजनीति में उभरना नेपाली राजनीति में एक अहम बदलाव का संकेत है.

    चुनाव प्रचार में बदलाव का उनका वादा उन मतदाताओं को पसंद आया जो भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और रसूखदारों के शासन से नाराज़ थे.

    शुक्रवार को पद संभालने से पहले शाह, जिन्हें लोग 'बालेन' के नाम से जानते हैं, उन्होंने नेपाल के भविष्य को लेकर उम्मीदों से भरा एक गाना रिलीज़ किया.

    इस गाने को रिलीज़ होने के कुछ ही घंटों के भीतर बीस लाख से ज़्यादा बार देखा गया.

    यह गाना उनके पुराने दिनों की याद दिलाता है, जब वे 'अंडरग्राउंड रैप' की दुनिया में सक्रिय थे और संगीत के ज़रिए नेपाल में भ्रष्टाचार और दूसरी सामाजिक समस्याओं पर आवाज़ उठाते थे.

    राजधानी काठमांडू के मेयर के तौर पर सिर्फ़ तीन साल काम करने के बाद, शाह ने 'राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी' के साथ हाथ मिलाया और प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर इस महीने हुए आम चुनावों में निर्णायक जीत हासिल की.

  14. 'ट्रंप मध्य-पूर्व में 10 हज़ार अतिरिक्त सैनिक भेजने पर विचार कर रहे हैं': रिपोर्ट

    अंग्रेज़ी अख़बार वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मध्य पूर्व में 10 हज़ार अतिरिक्त सैनिक भेजने पर विचार कर रहे हैं.

    रिपोर्ट में आगे कहा गया है, "संभावित तैनाती का मक़सद और ज़्यादा सैन्य विकल्प तैयार करना है.यह ठीक उसी समय हो रहा है जब ट्रंप ईरान के साथ शांति वार्ता पर विचार कर रहे हैं."

    रिपोर्ट के मुताबिक़, इस सैन्य टुकड़ी में संभवतः पैदल सेना और बख्तरबंद वाहन शामिल होंगे, और यह उन पाँच हज़ार अमेरिकी मरीन सैनिकों के अतिरिक्त होगी जिन्हें पहले ही इस क्षेत्र में तैनात किया जा चुका है.

    अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन सैनिकों को स्थानीय तौर पर कहां तैनात किया जाएगा.

    बीबीसी ने इस मामले पर टिप्पणी के लिए व्हाइट हाउस और पेंटागन से संपर्क किया है.

  15. कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा, 'सरकार अपनी जेब से पैसे नहीं दे रही'

    पेट्रोल और डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी कम करने के सवाल पर कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने प्रतिक्रिया दी है.

    मनीष तिवारी ने कहा है, "मैंने हरदीप सिंह पुरी जी का बयान देखा. सरकार के पास जो राजस्व आता है वो लोगों की जेब से ही तो आता है."

    "लोग जो टैक्स देते हैं उसी से तो सरकार का राजस्व आता है. अगर सरकार ने एक्साइज़ ड्यूटी कम की है तो सरकार कोई अपनी जेब से पैसा थोड़े ही दे रही है."

    मनीष तिवारी का कहना है, "हरदीप सिंह पुरी जी का बयान तो ऐसा है जैसे कि वो अपनी जेब से निकाल के पैसे दे रहे हों. एक बहुत ही असामान्य परिस्थिति दुनिया में बनी हुई है और सरकार ने एक्साइज़ ड्यूटी कम कर दी है तो उसे इतना जताने की क्या ज़रूरत है."

    वहीं कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने सरकार के इस फ़ैसले को 'चोरी का पकड़ा' जाना कहा है.

    प्रमोद तिवारी ने कहा,''साल 2014 में जब कांग्रेस की सरकार थी तो उस समय पेट्रोल पर एक्साइज़ ड्यूटी 9.48 रुपए प्रति लीटर थी. यह आज क़रीब 33 रुपए प्रति लीटर हो गई.''

    ''डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी उस समय के 3.56 रुपए प्रति लीटर से बढ़ाकर 31.8 कर दी गई. जनता से लूटे गए क़रीब 28 लाख करोड़ रुपए में आज वे कम कर रहे हैं, यानी लूट करके थोड़ी सी रियायत देना.''

    सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है.

    पेट्रोल पर एक्साइज़ ड्यूटी 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर की गई है, जबकि डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी 10 रुपये से घटाकर शून्य कर दी गई है.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ यह कदम एचपीसीएल, बीपीसीएल और आईओसी जैसी तेल कंपनियों की मदद के लिए उठाया गया है.

    इसका मक़सद तेल कंपनियों को मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध के बीच कच्चे तेल की बढ़ती वैश्विक कीमतों से मुक़ाबले के लिए सपोर्ट करना है.

    वित्त मंत्रालय ने 26 मार्च को जारी एक अधिसूचना में, पेट्रोल पर एक्साइज़ ड्यूटी को पहले के 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, जबकि डीज़ल पर लगने वाले शुल्क 10 रुपये प्रति लीटर को पूरी तरह ख़त्म कर दिया गया है.

    मंत्रालय ने बताया कि ये शुल्क कटौती तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है.

  16. 'मरियम के साथ रानी जैसा व्यवहार क्यों?' इस पोस्ट पर नसीम शाह ने ये कहा

    पाकिस्तान क्रिकेट टीम के तेज़ गेंदबाज़ नसीम शाह ने कहा है कि गुरुवार को उनका एक्स अकाउंट हैक हो गया था, जिसे बाद में सफलतापूर्वक बहाल कर दिया गया.

    इससे पहले गुरुवार को पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज़ पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) के उद्घाटन के लिए गद्दाफी स्टेडियम पहुंची थीं.

    इस मौक़े पर नसीम शाह के एक्स अकाउंट से एक पोस्ट किया गया था, जिसमें लिखा था, "उनके साथ रानी जैसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है?"

    पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने एक तस्वीर के ज़रिए बताया था कि मरियम नवाज़ पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी के साथ खिलाड़ियों से मिल रही हैं और इसी पर नसीम शाह के एक्स अकाउंट से एक पोस्ट की गई थी.

    यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और नसीम शाह के प्रशंसकों और क्रिकेट कमेंटेटरों ने चिंता व्यक्त की कि इससे भविष्य में नसीम शाह के लिए समस्याएं खड़ी हो सकती हैं.

    दूसरी ओर, कुछ यूजर्स ने संदेह जताया था कि नसीम का अकाउंट हैक हो गया होगा.

    नसीम शाह पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) फ्रेंचाइजी 'रावलपिंडी' का हिस्सा हैं.

  17. 'भारत में लॉकडाउन' की अफ़वाहों पर केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने ये कहा

    केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने ईरान युद्ध की वजह से मौजूदा संकट पर टिप्पणी की है.

    उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ''वैश्विक स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है. हम ऊर्जा, सप्लाई चेन और ज़रूरी वस्तुओं से जुड़े हालात पर लगातार नज़र बनाए हुए हैं.''

    हरदीप पुरी ने लिखा है कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि देश में ईंधन, ऊर्जा और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बिना किसी रुकावट के जारी रहे.

    उन्होंने लिखा, ''हर संभावित चुनौती से निपटने के लिए हम पूरी तरह तैयार हैं. भारत ने पहले भी वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अपनी मज़बूती दिखाई है, और आगे भी हम समय पर, सक्रिय और समन्वित तरीके से कदम उठाते रहेंगे.''

    उन्होंने लॉकडाउन को लेकर फैल रही अफ़वाहों को पूरी तरह ग़लत बताया है.

    हरदीप पुरी ने कहा, ''मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि सरकार के स्तर पर ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है. ऐसे समय में ज़रूरी है कि हम सभी शांत, ज़िम्मेदार और एकजुट रहें. इस तरह की स्थिति में अफ़वाह फैलाना और बेवजह डर का माहौल बनाना ग़ैर ज़िम्मेदाराना और नुक़सान पहुंचाने वाला है.''

  18. सरकार ने पेट्रोल, डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी घटाई, जानिए किसे होगा फ़ायदा

    सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है.

    पेट्रोल पर एक्साइज़ ड्यूटी 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर की गई है, जबकि डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी 10 रुपये से घटाकर शून्य कर दी गई है.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ यह कदम एचपीसीएल, बीपीसीएल और आईओसी जैसी तेल कंपनियों की मदद के लिए उठाया गया है.

    इसका मक़सद तेल कंपनियों को मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध के बीच कच्चे तेल की बढ़ती वैश्विक कीमतों से मुक़ाबले के लिए सपोर्ट करना है.

    वित्त मंत्रालय ने 26 मार्च को जारी एक अधिसूचना में, पेट्रोल पर एक्साइज़ ड्यूटी को पहले के 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, जबकि डीज़ल पर लगने वाले शुल्क 10 रुपये प्रति लीटर को पूरी तरह ख़त्म कर दिया गया है.

    मंत्रालय ने बताया कि ये शुल्क कटौती तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है.

    पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करने के बाद अब बड़ा सवाल है कि क्या दोनों की कीमतें भी कम होगी?

    आम उपभोक्ताओं के लिए शायद यह ख़बर उतनी राहत भरी नहीं है. सूत्रों के मुताबिक पंप पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी आने की संभावना कम है. लेकिन इसका सीधा फ़ायदा ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को मिलेगा.

    ठीक एक महीने पहले इसराइल-अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद दुनिया भर में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है.

    इस दौरान ईरान समेत खाड़ी देशों में ऊर्जा ठिकानों पर हमले भी हुए हैं.

    दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई के अहम मार्ग होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर ईरानी नाकेबंदी ने इस संकट को ज़्यादा बढ़ा दिया है. इस समुद्री मार्ग से दुनिया की तेल सप्लाई का क़रीब 20% गुज़रता है.

  19. अमेरिका ने कहा, ईरानी टीम का स्वागत है, एंथनी जर्चर, उत्तर अमेरिका संवाददाता

    अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय के वर्ल्ड कप टास्क फ़ोर्स के प्रमुख एंड्रयू गिउलियानी ने बीबीसी न्यूज़ से बातचीत की है.

    उन्होंने कहा है कि अगर ईरान की राष्ट्रीय फ़ुटबॉल टीम वर्ल्ड कप मुक़ाबले के लिए अमेरिका आती है, तो उसका स्वागत किया जाएगा और वह सुरक्षित भी रहेगी.

    उन्होंने टेक्सस में कंज़र्वेटिव पॉलिटिकल एक्शन कॉन्फ्रेंस के सालाना कार्यक्रम के दौरान बीबीसी से बातचीत में यह बयान दिया है.

    गिउलियानी ने कहा, "फ़िलहाल हम उम्मीद कर रहे हैं कि ईरानी टीम आएगी. मुझे लगता है कि यह अमेरिका में रहने वाले ईरानी समुदाय के लिए अपने देश का जश्न मनाने का एक शानदार मौक़ा है."

    ईरान के वर्ल्ड कप फ़ुटबॉल के ग्रुप स्टेज के मैच लॉस एंजेलिस और सिएटल में होने हैं.

    हालांकि ईरान के खेल मंत्रालय ने अपनी राष्ट्रीय टीमों और खिलाड़ियों पर "दुश्मन देशों" में होने वाले कार्यक्रमों में हिस्सा लेने पर रोक लगा दी है.

    दो हफ़्ते पहले डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया था कि उन्हें नहीं लगता कि ईरानी टीम का अमेरिका आना सही है. ट्रंप ने कहा था कि ईरानी टीम की "जान और सुरक्षा" की चिंता है.

    उनके इस बयान ने काफ़ी हंगामा खड़ा कर दिया था.

    ट्रंप के बयान के एक हफ़्ते बाद ईरानी अधिकारियों ने अपने मैच मेक्सिको में करवाने का अनुरोध किया था, लेकिन इसे फ़ुटबॉल की गवर्निंग बॉडी फीफा ने ठुकरा दिया.

    गिउलियानी ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी पोस्ट तब लिखी थी जब ईरानी महिला राष्ट्रीय फ़ुटबॉल टीम की सदस्य ऑस्ट्रेलिया में शरण लेने पर विचार कर रहीं थीं.

    गिउलियानी के मुताबिक़ ये खिलाड़ी आरोप लगा रही थीं कि ईरान में उनके परिवारों को सरकार धमका रही है, लेकिन अब ट्रंप ईरानी टीम का स्वागत करते हैं.

    हालाँकि, वह चेतावनी देते हैं कि अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ़ होमलैंड सिक्योरिटी के चल रहे शटडाउन से इस वर्ल्ड कप की योजना में रुकावट आने का ख़तरा है, जो क़रीब 75 दिनों में शुरू होने वाला है.

    उन्होंने कहा, "हम हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं कि यह सुरक्षित और महफ़ूज़ हो, लेकिन हमें डिपार्टमेंट ऑफ़ होमलैंड सिक्योरिटी को खोलना होगा ताकि हम इस बात की संभावना को ज़्यादा से ज़्यादा बढ़ा सकें कि यह न सिर्फ़ एक सुरक्षित और महफ़ूज़ वर्ल्ड कप हो, बल्कि सचमुच एक ज़बरदस्त कामयाबी हो."

  20. इसराइली विपक्षी नेता की चेतावनी, 'आईडीएफ़ पर क्षमता से ज़्यादा दबाव'

    इसराइल के विपक्षी नेता यायर लैपिड ने सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने सेना को बिना किसी रणनीति के युद्ध में भेज दिया है.

    उनका कहना है कि सेना को कम सैनिकों के साथ युद्ध के मैदान में उतारा गया है.

    हिब्रू भाषा में दिए गए एक वीडियो बयान में लैपिड ने कहा, "आईडीएफ़ अपनी क्षमता की सीमा तक पहुँच चुकी है और उससे भी आगे निकल गई है. सरकार सेना को घायल हालत में ही युद्ध के मैदान में छोड़ रही है."

    लैपिड का कहना है कि सरकार सेना को "बिना किसी रणनीति, बिना ज़रूरी संसाधनों और बहुत ही कम सैनिकों के साथ कई मोर्चों वाले युद्ध" में भेज रही है.

    उन्होंने आगे कहा, "रिज़र्व सैनिक पूरी तरह से थक चुके हैं और अब हमारी सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में सक्षम नहीं हैं."

    उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि वह अति रूढ़िवादी हरेदी समुदाय के पुरुषों को सेना में भर्ती करे - ये वे लोग हैं जो अपना पूरा समय पवित्र यहूदी ग्रंथों के अध्ययन में समर्पित करते हैं, और जिन्हें 1948 में इसराइल के गठन के बाद से आम तौर पर अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट मिलती रही है.

    इसराइली मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उनका यह बयान सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एयाल ज़मीर की उस चेतावनी के बाद आया है, जो उन्होंने कल सुरक्षा कैबिनेट को दी थी.

    एयाल ज़मीर ने कहा था कि "आईडीएफ़ पतन के कगार पर है."

    ठीक एक महीने पहले 28 फ़रवरी को इसराइल और अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले किए थे. उसके बाद से ही इसराइल लगातार मध्य पूर्व में जंग लड़ रहा है.

    इस दौरान इसराइली सेना लगातार ईरान और लेबनान में हमले कर रही है. इसके साथ ही उसने सीरिया में भी अपने दुश्मन के ठिकानों पर हमले किए हैं.

    इसके साथ ही इसराइली सेना को हिज़्बुल्लाह और ईरान की ओर से हो रहे हमलों से भी निपटना पड़ रहा है, जिससे सेना कई मोर्चों पर एक साथ उलझी हुई है.

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