उत्तराखंड के चमोली ज़िले में ग्लेशियर टूटने के बाद आई आपदा के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया है कि इस घटना में तक़रीबन 125 लोग लापता हैंऔर सात शव बरामद किए गए हैं.
उन्होंने इस दुर्घटना में मरने वाले लोगों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये मुआवज़े की घोषणा की है.
इसके साथ ही मुख्यमंत्री रावत ने बताया कि इस घटना में 180 भेड़-बकरियां भी बह गई हैं और जिस जगह यह ग्लेशियर टूटा वहां के रैणी गांव में अभी तक पांच लोगों की मौत की अपुष्ट जानकारी है.
उन्होंने बताया कि इस दुर्घटना में स्थानीय लोगों के कम हताहत होने की संभावना है क्योंकि बांध पर काम करने वाले स्थानीय लोग रविवार को छुट्टी पर रहते हैं.
मुख्यमंत्री रावत ने कहा, “अभी तक की ज़रूरत के हिसाब से हमारे पास संसाधन उपलब्ध है. हेलीकॉप्टर पर्याप्त मात्रा में हैं. जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किए जाएंगे. बचाव दल भी हमारे पास उपलब्ध हैं.”
“एनडीआरएफ़ की टीम दिल्ली से यहां पहुंची है. वह जौली ग्रांट से बसों के ज़रिए आगे के लिए रवाना हुई है. कल कुछ लोग और एनडीआरएफ़ की तरफ़ से आएंगे.”
“ज़िलाधिकारी, एसपीऔर ज़िला चिकित्साधिकारी वहां कैंप किए हुए हैं. हमने वहां का पहले एरियल सर्वे किया और फिर सड़क से रैणी गांव में जहां तक जाया जा सकता है, हम वहां पहुंचे और जायज़ा लिया.एनडीआरएफ़ की 60 लोगों की टीम वहां पहुंच गई हैं.”
“एक बड़ा सड़क पुल और चार अन्य झूला पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं. धौलीगंगा के उस इलाक़े का सड़क मार्ग से संपर्क टूट गया है. वहां 17 गांव हैं जिनमें से 7 गांवों के लोग सर्दी की वजह से प्रवास कर गए हैं. 11 गांवों में लोग हैं. वहां सेना के हेलीकॉप्टर पहुंच चुके हैं.”
मुख्यमंत्री ने क्या-क्या कहा, पढ़ें उनके शब्दों में
सुबह 11 बजकर बीस मिनट पर मुझे इसकी जानकारी मिली. तत्काल ज़िला प्रशासन से संपर्क करके पुष्टि करने के लिए कहा गया.
हमें पता चला कि वहां एक ग्लेशियर टूटने से भारी नुकसान की संभावना है.
ऋषिगंगा रेणी गांव के दो हिस्से हैं. एक सड़क पर है, एक सड़क से ऊपर है. वहीं 13 मेगावाट से कुछ अधिक क्षमता का पावर प्रॉजेक्ट है. इसमें 35 लोग काम करते थे. वहां पुलिस के चार जवान भी सुरक्षा में तैनात थे. दो छुट्टी पर थे. दो वहां मौजूद थे. वो दोनों लापता हैं. 29-30 के क़रीब ऋषिगंगा प्रॉजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी लापता हैं.
उसी से पांच किलोमीटर नीचे एनटीपीसी का निर्माणाधीन प्रोजेक्ट है. मोटी-मोटी जानकारी के मुताबिक 176 मज़दूर ड्यूटी के लिए निकले थे. वहां पर दो सुरंगे हैं. एक सुरंग में पंद्रह लोग थे, वो मोबाइल से संपर्क में आ गए थे. दूसरी सुरंग में अनुमान के मुताबिक 30-35 लोग संभावित हैं.
जब हिमस्खलन हुआ, तो 35-40 लोग वहां वापस आ गए. उन्हें बचा लिया गया. उनमें से एक मामूली तौर पर घायल है. कोई ख़तरे वाली बात नहीं है. अभी तक सात शव बरामद हुए हैं.
जो दूसरी सुरंग हैं जिसमें 35-40 लोगों के होने की संभावना है उसमें मलबा अंदर तक प्रवेश कर गया है जिसकी वजह से सुरंग में प्रवेश करना बहुत मुश्किल था. हमारे आईटीबीपी के जवान वहां रस्सियों के सहारे पहुंचे हैं. वहां तक मशीनें पहुंचाना संभव नहीं है. 35.-40 फिट तक उसमें गाद भरा हुआ है.
आईटीबीपी के जवान रस्सी से वहां पहुंचे हैं और सुरंग में दाख़िल हुए हैं. अंदर मज़दूरों से संपर्क नहीं हो पाया है.