उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही भर्ती की परीक्षा में पेपर लीक के दावों और आरोपों के बाद यूपी पुलिस के भर्ती बोर्ड ने आंतरिक समिति गठित की है.
भर्ती बोर्ड की अध्यक्ष रेणुका मिश्रा ने बीबीसी से कहा है जो दावे सोशल मीडिया पर किए जा रहे हैं उन्हें देखने के लिए एक आंतरिक समिति गठित की गई है.
ध्यान देने वाली बात यह है कि अभी तक पेपरलीक के सिर्फ दावे किए जा रहे हैं, असल में क्या पेपरलीक हुआ था, इसे लेकर कहीं भी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. यह समिति सिर्फ सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों की पड़ताल करेगी.
रेणुका ने कहा है कि, ‘सोशल मीडिया पर जो असत्यापित दावे किए जा रहे हैं, हम उन्हें भी देख रहे हैं.’
रेणुका मिश्रा ने कहा है, “भविष्य में भर्ती प्रक्रिया में क्या सुधार किए जा सकते हैं इसकी समीक्षा के लिए हमने बोर्ड के भीतर एक समिति गठित की है.”
उन्होंने कहा, “परीक्षा पूर्ण होने के बाद सोशल मीडिया पर जो पुष्ट और अपुष्ट दावे किए जा रहे हैं उनकी समीक्षा भी ये समिति जांच करेगी.”
रेणुका मिश्रा ने दावा किया, “परीक्षा पूर्ण होने से पहले सोशल मीडिया पर कोई पेपर अपलोड नहीं हुआ है. जो कुछ भी आया है वो परीक्षा के बाद ही आया है. अभ्यर्थियों को पेपर घर ले जाने के लिए भी दिया गया था. इसलिए हमें इन दावों के आधार को भी परिभाषित करने की ज़रूरत है."
उन्होंने कहा, “हम ये देखेंगे कि ये दावे गढ़े गए हैं या इनमें कुछ आरोप हैं. इसके लिए ही हमने एक आंतरिक समिति का गठन किया है.”
बोर्ड अध्यक्ष का कहना है कि सोशल मीडिया पर की जा रही पोस्टों का अध्ययन किया जाएगा.
उत्तर प्रदेश में शनिवार और रविवार को चार पारियों में यूपी पुलिस में 60 हज़ार से अधिक सिपाही पदों के लिए भर्ती परीक्षा हुई थी जिसमें 48 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने पेपर दिया है.
रेणुका मिश्रा कहती हैं, “बोर्ड ने परीक्षा के लिए खास तैयारियां की थीं. कुछ कमियां रह गई हैं, आगे ऐसा ना हो इसकी भी समीक्षा की जा रही है. ये भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थियों का विश्वास ही है कि यूपी के बाहर से छह लाख से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा देने आए.”
उन्होंने कहा, “लेह को छोड़कर देश के हर हिस्से से अभ्यर्थियों ने ये परीक्षा दी है.”
यूपी पुलिस ने नकल और परीक्षा में धांधली के आरोपों में प्रदेश के अलग-अलग ज़िलों से 250 से अधिक लोगों को गिरफ़्तार भी किया है.
दावे करने वाले क्या कह रहे हैं?
सोशल मीडिया पर शनिवार में पहली पाली के पेपर के बाद से ही पर्चा लीक होने के दावे किए जाने लगे थे.
ऐसा ही दावा करने वाले एक शिक्षक विवेक कुमार ने बीबीसी से कहा, “हम ये मानते हैं कि 17 और 18 फ़रवरी को दूसरी पाली में पेपर लीक हुए हैं. 17 फ़रवरी के हमारे दावे को बोर्ड ने खारिज किया है. लेकिन हम ये मानते हैं कि 18 फ़रवरी की दूसरी पाली का पर्चा लीक हुआ है. रविवार दोपहर से ही अभ्यर्थी टेलीग्राम के ज़रिए पेपर लीक होने का दावा कर रहे हैं.”
विवेक ने कहा, “बोर्ड का कहना है कि हम किसी स्वार्थ में ये आरोप लगा रहे हैं. अगर हम ऐसा स्वार्थ में कर रहे हैं तो हमारी जांच होनी चाहिए और अगर हम ग़लत हैं तो हमें गिरफ़्तार किया जाना चाहिए.”
विवेक दावा करते हैं, “रविवार सुबह 9 बजे ही टेलीग्राम चैनल पर पेपर डाल दिया गया था. कुछ सवालों को छोड़कर सभी सवाल उस पेपर में से थे. हम ये मानते हैं कि ये पेपर लीक हुआ है और इसकी जांच होनी चाहिए.”
बुलंदशहर से बीजेपी विधायक चंद्रपाल सिंह ने सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर पेपर लीक की जांच करने और पर्चा रद्द करने की मांग की है.
बीबीसी से बातचीत में चंद्रपाल सिंह ने कहा, “पांच से अधिक अभ्यर्थी मेरे पास आए थे. उन्होंने पर्चा लीक करने का दावा किया है. जो सबूत उन्होंने दिखाए उनसे लगता है कि हो सकता है पर्चा लीक हुआ है. इसलिए ही मैंने जांच की मांग की है. हम जन प्रतिनिधि हैं. हमें जनता के सवालों का जवाब देना ही होता है.”
ट्विटर पर रविवार से ही यूपी पुलिस पर्चा लीक ट्रेंड कर रहा है. इस ट्रेंड में सोमवार शाम तक कई लाख ट्वीट किए जा चुके हैं.