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लतीफ़ों पर सरकारों की नज़र क्यों टेढ़ी हो रही है?
स्वस्थ समाज की एक निशानी ये है कि वो अपने ऊपर कितना हंस सकता है. जबकि तानाशाही से जूझ रहे समाज में हंसी मज़ाक और व्यंग्य पर सावधानी बरतनी पड़ती है.
लतीफ़े वालों पर टेढ़ी नज़र को लेकर पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार वुसअतुल्लाह ख़ान की टिप्पणी.
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