असम में फैली हिंसा ने आम लोगों के लिए जिंदगी को बद से बदतर बना दिया है.
इमेज कैप्शन, असम में फैली हिंसा में अपने भाई को गंवा चुकी हसीना बेगम अपना दुख बयां करते हुए रो पड़ीं. दंगों में अब तक 44 लोग मारे जा चुके हैं.
इमेज कैप्शन, बिजनी के राहत शिविर में जब सरकारी अधिकारी मुआयने के लिए पहुंचे तो लोगों ने नाराज़ होते हुए उन्हें खदेड़ दिया. मुख्यमंत्री तरूण गोगोई ने कहा कि असम में स्थिति सामान्य हो रही है.
इमेज कैप्शन, अपनी आंखों के सामने अपने बेटे की मौत देखने वाले दयनुल अली सुरक्षाकर्मियों को मौके को हाल सुनाते हुए बेहोश हो गए. अब तक तीन लाख लोग राहत शिविरों में शरण ले चुके हैं.
इमेज कैप्शन, हिंसा में ज़ख्मी हुए अपने पिता को सुरक्षित जगह ले जाता एक शख्स. हिंसा के डर से लोग न सिर्फ अपने घरों को छोड़ रहे हैं बल्कि बच्चों और बुज़ुर्गों की सुरक्षा को लेकर सबसे अधिक चिंतित हैं.
इमेज कैप्शन, कोकराझाड़ के मोजाती गांव में दंगे और आगजनी का शिकार हुए अपने घरों से गुज़रते बोडो आदिवासी. कोकराझाड़ हिंसा से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका है.
इमेज कैप्शन, राहत शिविरों में शरण लिए बोडो महिलाएं. दंगा प्रभावितों में सभी समुदाय के लोग शामिल हैं.
इमेज कैप्शन, बिजनी के एक राहत शिविर में मिलकर खाना बनाती महिलाएं. बिगड़ती स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सैन्य बल भेजा गया है.
इमेज कैप्शन, हर तरफ फैली हिंसा के बीच राहत शिविरों में मौजूद बच्चे पत्थरों से खेलकर अपना मन बहलाते हुए. हिंसा में कई स्कूली इमारतें भी नष्ट हो गई हैं.