फ़ेसबुक विवाद में करोड़ों डॉलर दाँव पर

सोशल नेटवर्किंग साइट फ़ेसबुक की लोकप्रियता किसी से छिपी नहीं है और न ही मार्क ज़करबर्ग की जो इसके संस्थापक माने जाते हैं.

लेकिन ये साइट खोलने का विचार किसका था, इसे लेकर अब भी विवाद चल रहा है. हार्वड के तीन छात्रों का दावा है कि फ़ेसबुक का असल आइडिया उनका था.

इस विवाद के निपटारे के लिए 2008 में हार्वड के तीन छात्रों को फ़ेसबुक ने छह करोड़ पचास लाख डॉलर रुपए दिए थे लेकिन अब इन तीनों ने फिर से अदालत का रुख़ किया है.

उनका कहना है कि जब ये निपटारा हुआ था तो फ़ेसबुक ने अपना स्टॉक प्राइस ग़लत बताया जिस कारण समझौते के तहत उन्हें कम पैसे मिले.

टाइलर, कैमरून और दिव्या नरेंद्र आरोप लगाते रहे हैं कि ज़करबर्ग ने उनका आइडिया चुराकर साइट शुरु की. हार्वड से ही पढ़ने वाले मार्क ज़करबर्ग इन दावों को ग़लत बताते हैं.

टाइलर और कैमरून विंकलवॉस और उनके साथी दिव्या नरेंद्र अब चाहते हैं कि मामले की सुनवाई दोबारा हो.

वे अपील करने वाले हैं कि कोर्ट फ़ेसबुक के साथ हुए पुराने समझौते को रद्द कर दे ताकि वे क़ानूनी तौर पर फ़ेसबुक से और पैसा माँगने का मुकदमा दायर कर सकें और मार्क ज़करबर्ग से ये मनवा सकें कि उन्होंने आइडिया चुराया.

मिलेगा और पैसा?

इन लोगों के वकील जीरो फ़ाक ने बताया, पहले जो समझौता हुआ था उसमें दो करोड़ डॉलर कैश और चार करोड़ 50 लाख डॉलर के शेयर शामिल थे. ये इस आधार पर तय हुआ था कि हर शेयर की क़ीमत 36 डॉलर है. लेकिन फ़ेसबुक ने शेयरों की क़ीमत को लेकर उस समय कुछ अहम जानकारियाँ छिपाई थीं जो क़ानून का उल्लंघन है. इस वजह से हमें शेयर चार गुना कम संख्या में मिले.

पूर्व में दी गई इंटरव्यू में जुड़वा भाई टाइलर और कैमरून विंकलवॉस कह चुके हैं कि फ़ेसबुक ने मुकदमे में ग़लत तरीका अपनाया गया और मार्क ने उनका आइडिया चुराया था.

अगर हावर्ड के तीनों पूर्व छात्र अपना मुकदमा जीत जाते हैं तो उन्हें मुआवज़े के तौर पर पहले के मुकाबले कहीं ज़्यादा पैसा मिलेगा. लेकिन अगर वे हार जाते हैं कि पहले से मिली छह करोड़ 50 लाख डॉलर की राशि से वे हाथ धो बैठेगें.

अगर अदालत पिछले समझौता को अमान्य कर देती है तो फ़ेसबुक को ये तय करना होगा कि क्या वो मामला अदालत में आगे लड़ना चाहता है या फिर और पैसा देकर मामला निपटाना चाहता है.

कुछ दिन पहले ही फ़ेसबुक को एक निजी कंपनी की ओर से 50 करोड़ डॉलर का निवेश मिला है. इसके बाद फ़ेसबुक अब 50 अरब डॉलर की कंपनी हो गई है.

ये निवेश रुस की एक प्रौद्योगिकी कंपनी और निवेश बैंक गोल्डमैन सैशज़ ने किया है. उम्मीद की जा रही है कि फ़ेसबुक अब शेयर बाज़ार में भी कदम रखेगा.