बसपा विधायक की दबाव में गिरफ़्तारी

- Author, रामदत्त त्रिपाठी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लखनऊ
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में एक नाबालिग युवती के साथ कथित बलात्कार के आरोपी सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी के विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी ने बृहस्पतिवार को अंततः अपने आपको पुलिस के हवाले कर दिया.
पीड़ित युवती शीलू निषाद विधायक के घर से चोरी के एक मुक़दमे में एक महीने से जेल में है. विपक्ष, विधायक की गिरफ्तारी से संतुष्ट नही है और वह पीड़ित युवती की रिहाई तथा मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहा है.
आरोपी विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी के परिवार के लोगों के अनुसार वह गुरुवार शाम लखनऊ से वापस बांदा पहुंचे और अपने आपको पुलिस अधीक्षक अनिल दास के हवाले कर दिया.
जानकार लोगों के अनुसार बुधवार को लखनऊ में वह सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों में मिले थे और अपने को बेगुनाह बताया था.
विधायक का कहना है कि वह लंबे अरसे से मधुमेह से पीड़ित हैं और शारीरिक रूप से सेक्स के लिए अक्षम हैं, इसलिए मामले की सही जांच के लिए उनका डीएनए टेस्ट और युवती के कपड़ों का फोरेंसिक परिक्षण कराया जाए.
राजनीतिक दबाव
लेकिन सरकार ने सीआईडी रिपोर्ट में 12 दिसंबर की रात विधायक के घर में बलात्कार की पुष्टि का हवाला देते हुए बुधवार को पुलिस को विधायक और उनके तीन सहयोगियों के ख़िलाफ बलात्कार का केस दर्ज करने के निर्देश दिए.
रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है कि पीड़ित युवती ने दस जनवरी को अदालत में लिखित प्रार्थना पत्र देकर विधायक और उनके सहयोगियों पर बलात्कार का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है और कानूनन उसकी अनदेखी नही की जा सकती.
पिछले चौबीस घंटों में टीवी न्यज़ चैनल बराबर यह कह रहे थे कि पुलिस जान बूझकर विधायक को गिरफ़्तार नही कर रही है.
कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह की प्रेस कांफ्रेंस में उनसे जब यही सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा "बस कुछ और समय दीजिए.''
इसके थोड़ी देर बाद बांदा से खबर आयी कि विधायक ने अपने को पुलिस के हवाले कर दिया है.
कड़ी आलोचना
विपक्षी कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष रीता जोशी ने एक बयान में कहा है कि सरकार ने विपक्ष और मीडिया के भारी दबाव पर विधायक को तो गिरफ़्तार किया है लेकिन पीड़ित युवती पर चोरी का झूठा मुकदमा खत्म नही किया.
इस बीच मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की नेता वृंदा करात में कहा है कि एक नाबालिग और बलात्कार की शिकार युवती को जेल में बंद करना न्याय का मखौल है.
इस मामले में विपक्ष बंद के पुलिस अधीक्षक पर भी कार्यवाही मांग कर रहा है. पुलिस अधीक्षक अनिल दास पीड़ित युवती से मिलने जेल गए थे और आरोप है कि उन्होंने युवती पर बलात्कार का मामला दर्ज न कराने का दबाव डाला.
नियमानुसार पुलिस अधिकारी अदालत की अनुमति के बिना जेल में बंद अभियुक्त से नही मिल सकता.
पुलिस अधीक्षक पर यह भी आरोप है कि वह विधायक की मदद कर रहे थे इसीलिए युवती के परिवार की ओर से बलात्कार का मुकदमा दर्ज नहीं किया गया.
भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने एक बयान में कहा है कि विधायक का आत्मसमर्पण नाकाफी है.
पाठक का कहना है कि चूँकि इस मामले में पुलिस अधीक्षक की भूमिका संदिग्ध है इसलिए उनके ख़िलाफ भी कार्यवाही होनी चाहिए.
































