पाक प्रशासित कश्मीर में हुआ चुनाव

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में आज 37 विधानसभा सीटों के लिए वोट डाले गए.
कुछ जगहों पर मामूली हिंसा की ख़बरों को छोड़कर मतदान कुल मिलाकर शांतिपूर्ण रहा.
मुज़फ़्फ़राबाद के क़रीब न्याज़पुरा में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और आज़ाद पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच हुई फ़ायरिंग में एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि छह अन्य लोग ज़ख्मी हो गए.
छिटपुट हिंसा की घटनाएं बाग़, मीरपुर और झेलम वैली इलाकों में भी हुईं.
49 सदस्यों वाली विधान सभा की 37 सीटों के लिए हुए चुनाव में कुल 22 राजनीतिक दलों के 421 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं.
इनके अलावा 200 से ज़्यादा निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में अपनी क़िस्मत आज़मा रहे हैं.
रविवार के मतदान में 30 लाख से ज़्यादा मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया.
मुज़फ्फ़राबाद में बीबीसी संवाददाता ज़ुल्फ़िक़ार अली के मुताबिक़ शहरी इलाक़ों के मुक़ाबले ग्रामीण इलाकों में लोगों ने ज़्यादा तादाद में मतदान में हिस्सा लिया.
सुबह आठ बजे शुरू हुई वोटिंग शाम पांच बजे ख़त्म हो गई और उसके तुरंत बाद वोटों की गिनती शुरू हो गई. कल शाम तक चुनाव के ज़्यादातर नतीजे आ जाएंगे.
विधानसभा चुनाव में हिस्सा ले रही प्रमुख पार्टियां हैं पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी, मुस्लिम लीग (नवाज़), मुत्ताहिदा क़ौमी मुवमेंट और सत्ताधारी जम्मू-कश्मीर मुस्लिम कॉन्फ़्रेंस. मुख्य मुक़ाबला पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और पाक प्रशासित कश्मीर की सत्ताधारी पार्टी जम्मू-कश्मीर मुस्लिम कॉन्फ़्रेंस के बीच है.
पीएमएल (एन) पहली बार इन चुनावों में हिस्सा ले रही है.
सीटें

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में कुल 49 विधानसभा सीटें हैं जिनमें से 41 सीटों के लिए वयस्क मताधिकार के आधार पर चुनाव होता है,बाक़ी की आठ सीटों के लिए विधायकों का चुनाव चुने हुए मतदाता करते हैं.
रविवार के चुनाव में 41 में 29 सीटें पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की हैं जबकि 12 सीटें पाकिस्तान के विभिन्न सूबों में रह रहे उन कश्मीरी शरणार्थियों के लिए सुरक्षित हैं जो 1947 में भारत प्रशासित कश्मीर से पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर चले गए थे और वहीं बस गए थे.
शरणार्थियों के लिए सुरक्षित 12 सीटों में से तीन सीटों पर रविवार को चुनाव नहीं हो रहा है. जबकि चुनावी गड़बड़ियों की वजह से एक और सीट पर चुनाव स्थगित कर दिया गया है.
चुनाव अधिकारियों का कहना है कि कराची, बलुचिस्तान और ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह की तीन सीटों के लिए चुनाव वोटर लिस्ट में हुई गड़बड़ी के कारण फ़िलहाल नहीं करवाए जा रहे हैं.
एमक्यूएम का बहिष्कार
मुत्ताहिदा क़ौमी मुवमेंट 'एमक्यूएम' ने ऐबटाबाद में चुनाव का बहिष्कार किया है. एमक्यूएम का कहना है कि उन पर दबाव डाला जा रहा था कि इन तीन विधानसभा सीटों में से एक सीट वो छोड़ दे. ये दबाव पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की तरफ़ से था. लेकिन एमक्यूएम ने ये बात नहीं मानी.
अमानुल्ला ख़ान के नेतृत्व वाला आज़ादी समर्थक समूह जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ़्रंट इन चुनावों का बहिष्कार कर रहा है. इसी वजह से जेकेएलएफ़ को इन चुनावों में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी गई.
जो भी उम्मीदवार चुनाव में हिस्सा लेता है उसे एक हलफ़नामा देना पड़ता है कि वो पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर का पाकिस्तान में विलय किए जाने का समर्थन करता है.
आज़ादी समर्थक समूह ऐसे किसी हलफ़नामे का समर्थन नहीं करते है, इसी वजह से उन्हें चुनाव लड़ने की भी इजाज़त नहीं दी गई.
जेकेएलएफ़ कश्मीर को भारत और पाकिस्तान से अलग एक स्वतंत्र देश के रूप में देखना चाहता है.
जेकेएलएफ स्टुडेंट्स विंग के पूर्व चेयरमैन राजा ग़ुलाम मुज्तबा का कहना है कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में 'एलेक्शन नहीं सेलेक्श्न' होता है. राजा ग़ुलाम मुज्तबा का कहना है, "जो भी आज़ादी पसंद पार्टियां हैं उन्हें चुनाव लड़ने की इजाज़त नहीं है. उनसे कहा जाता है कि आप पाकिस्तान की प्रभुसत्ता को मानें. कुछ आज़ादी पसंद पार्टियों ने ये मानते हुए चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा लिया, लेकिन यहां की सरकार ने मीडिया को अपने कब्जे़ में ले लिया है जिसके कारण उन दलों की, उनकी ख़बरें ढूँढने से भी नहीं मिलती हैं. यहाँ पाकिस्तानी सरकार और खुफ़िया एजेंसियों का एकाधिकार है."
राजा मुज़्तबा का कहना है कि भारत प्रशासित कश्मीर और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में बस इतना ही फ़र्क़ है कि एक ओर लोगों ने आज़ादी के लिए बंदूक़ें उठा रखी हैं जिन्हें भारत की सेना दबाती है लेकिन यहां लोगो के दिमाग़ पर भी सरकार ने पहरा बिठा रखा है.
चुनाव को शांतिपूर्ण ढ़ंग से करवाए जाने के लिए पुलिस और अर्ध-सैनिक बलों के कुल मिलाकर सोलह हज़ार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे.
































