निराधार है परमाणु असुरक्षा की बात: पाकिस्तान

पाकिस्तान ने अमरीका की एक पत्रिका में छपे लेख को ख़ारिज किया है जिसमें उसे अमरीका का 'अलाई फ्रॉम हैल' कहा गया है और जिसमें उसके परमाणु भंडार की सुरक्षा और आतंकवाद से लड़ने की वचनबद्धता पर सवाल उठाए गए हैं.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के एक बयान में 'द अटलांटिक' के दिसंबर अंक की कवर स्टोरी को 'शुद्ध कल्पना, निराधार और प्रेरित' कहा गया है.
बयान में कहा गया है, ''इस तरह के मुहिम में कुछ नया नहीं है. इसे पाकिस्तान के विरोधियों की ओर से कराया जाता है."
क्या है लेख में
लेख में कहा गया है कि कमज़ोर सरकार और सुरक्षा बलों में जिहादियों के प्रति सहानुभूति रखने वालों के घुसपैठ के कारण पाकिस्तान चरमपंथियों के परमाणु हथियारों को हासिल करने का एक 'स्वाभाविक स्थान' है.
लेकिन पाकिस्तान को ज़्यादा चिंता अपने परमाणु हथियारों के ज़खीरे के प्रति अमरीका के इरादों की है और वह अपने हथियारों को छिपाने की पूरी कोशिश करता है.
लेख ने कहा गया है कि अमरीका ने पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को सुरक्षित करने के लिए 100 करोड़ डॉलर ख़र्च किए हैं और 11 सितंबर 2001 से लेकर अब तक उसे लगभग 20 अरब डॉलर की नागरिक और सैन्य सहायता दी है.
ऐसा उसने अमरीका के नेतृत्व में अफ़ग़ानिस्तान में जारी युद्ध में पाकिस्तान की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए किया है.
पाकिस्तान का भय
इस लेख में यह भी लिखा गया है कि ओसामा बिन लादेन से सहानुभूति रखने वालों को ख़त्म करने के पाकिस्तान के प्रयासों को लेकर अमरीकी अधिकारियों का मोहभंग हुआ है.
ऐसा खासतौर पर दो मई के बाद हुआ है, जिसमे अमरीका की विशेष सैनिक कार्रवाई में ऐबटाबाद में देश के प्रमुख सैन्य अकादमी के निकट अल कायदा नेता ओसामा बिन लादेन मारे गए थे.
तब से पाकिस्तान को अंदेशा है कि पेंटागन उसके परमाणु ज़खीरे को ख़त्म करने के लिए ऐसे ही और हमले की योजना बना रहा है.
अनाम सूत्रों का हवाला देते हुए लेखकों ने कहा कि उनका भय सही है.
लेख में अमरीका के सैकड़ों कमांडो की योजना का विवरण भी दिया गया है, जिन्हें सामूहिक विनाश करने वाले हथियारों को हासिल करने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
जिहादी तख़्तापलट या देश के पतन की सूरत में ये कमांडो पाकिस्तान के परमाणु शस्त्रागार पर नियंत्रण या उसे अक्षम कर सकते हैं.
































