भारत कितना रोशन?

    नरेंद्र मोदी सरकार ने शनिवार को एलान किया कि भारत के बसावट
    वाले सभी गांवों का विद्युतीकरण हो गया है. लेकिन क्या ये सच है?

    क्या ये पूरा ताजमहल है?

    सरकार जिस तरह विद्युतीकरण का आकलन करती है, उसके हिसाब से ये संभव है.
    सरकार के मुताबिक, अगर किसी गांव के 10 फ़ीसदी घर और सभी सार्वजनिक इमारतें ग्रिड से जुड़ी हों तो उस गांव को विद्युतीकृत माना जाएगा.

    अगर यहां एक घर भारत के एक करोड़ घरों का प्रतिनिधित्व करता है तो

    सरकार के आकलन के मुताबिक 82 फ़ीसदी घरों का विद्युतीकरण हो चुका है.
    ...लेकिन तीन करोड़ एक लाख घरों को अब भी बिजली की ज़रूरत है

    प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना के मुताबिक 14,84,11,158 घर तक बिजली पहुंच गई है.

    अगर एक बल्ब भारत के एक राज्य का प्रतिनिधित्व करता है तो...

    ...29 में से केवल छह राज्यों में 24 घंटे बिजली की आपूर्ति है.

    डीडीयूजीजेवाई के मुताबिक दिसंबर 2017 तक केवल गुजरात, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में 24 घंटे बिजली की आपूर्ति है.

    भारत सरकार के मुताबिक एक गांव के अगर 10 फ़ीसदी घर और सभी सार्वजनिक इमारतें ग्रिड से जुड़ी हों तो गांव को विद्युतीकृत माना जाता है. अगस्त 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने 2018 तक सभी भारतीय घरों को विद्युतीकृत करने की करीब160 अरब रुपए की योजना शुरू की थी.

    इस योजना के तहत भारत के आबादी वाले सभी 597,464 गांव और पांच करोड़ से ज़्यादा घर ग्रिड से जुड़ चुके हैं.

    भारत ने 1947 में मिली आज़ादी के बाद से बहुत कुछ हासिल किया है.

    1947 में...

    ...भारत के केवल 1500 गांव विद्युतीकृत थे.

    2005-2014 के बीच...

    ...1,082,280 और गांव ग्रिड से जुड़े.

    मई 2018 तक...

    18,452 और गांवों तक बिजली पहुंची और इस तरह भारत के सभी गांव विद्युतीकृत हो गए.

    हालांकि आज ज़्यादातर भारतीय गांवों तक कुछ बिजली पहुंची है, लेकिन दूरदराज़ के घरों तक बिजली पहुंचाना खर्चीला हो सकता है.

    कुछ लोग हर महीने आने वाले बिजली के बिल की वजह से भी कनेक्शन नहीं चाहेंगे. ख़ासतौर से तब जब बिजली आपूर्ति सही न हो और अक्सर बिजली गुल हो जाती हो.

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