शेर के घर में सेंध

- Author, मैट वॉकर
- पदनाम, संपादक, अर्थ न्यूज़
शेर से उसका शिकार छीनना उसका शिकार बनने जैसा ही है --- खूंख़ार पंजों की एक मार और आप भगवान को प्यारे हुए.
लेकिन भूख से बेहाल कैमरून के गांवों में रहनेवाले लोग इन दिनों जंगल के राजा के घर में सेंध लगाने से भी नहीं घबरा रहे.
शेर ने शिकार मारा और उससे निकलते गर्म ख़ून पर ज़ुबान फिराना शुरू ही किया कि गांववाले पहुंचे, किसी तरकीब से उसे वहां से भगाया और मांस लेकर रफ़ूचक्कर.
अंग्रेज़ी में इसे क्लेप्टोपैरासाइटिज़्म कहते हैं, जिसमें जंगल के बड़े शिकारी यानि शेर, लकड़बग्घा, चीता एक दूसरे का मारा हुआ शिकार चुरा लेते हैं.
लेकिन अफ़्रीका के जंगलों में काम कर रहे पर्यावरणविदों का कहना है कि अब इंसान भी इस चोरी में शामिल हो गए हैं और ये धड़ल्ले से हो रहा है.
चिंता की बात ये है कि धीरे धीरे ये आदत फैलती जा रही है और कैमरून में घटते हुए शेरों की संख्या के लिए ये ख़तरे की बात है.
शेर से उसका शिकार चुराते हुए स्थानीय गांववालों की रिपोर्ट अफ़्रीकन जरनल ऑफ़ इकोलॉजी में प्रकाशित हुई है.
इसमें एक शेर और शेरनी पर कुछ समय से नज़र रख रहे वैज्ञानिकों ने पाया कि उन्होंने कुछ ही देर पहले एक बड़े से हिरण का शिकार किया था और उसे खा रहे थे जब उन्हें वैज्ञानिकों के वहां होने का एहसास हुआ.
शेर और शेरनी दोनों ही पलक झपकते ही झाड़ियों में छिप गए.
वैज्ञानिक वहां से हट गए लेकिन कुछ घंटों बाद जब लौटे तो देखा कि वहां कुछ स्थानीय गांववाले जुटे हुए थे और बाहरवालों को देखकर वो भी छिप गए.
कुछ नहीं छोड़ा
वैज्ञानिकों ने पास जाकर देखा तो पता चला कि गांववालों ने चाकू से सारा मांस निकाल लिया था, वहीं से पत्ते लेकर उसे पैक भी कर लिया था और बिचारे जंगल के राजा और रानी के लिए छोड़ा था बस सर, खुर और बची खुची अंतड़ियां.
उन्हें दूसरा ऐसा ही नज़ारा दिखा कैमरून के वाज़ा राष्ट्रीय पार्क के अंदर जहां शेर को भगाकर उसके मारे हुए हिरण पर क़ब्ज़ा कर लिया गया.
वैज्ञानिकों का कहना है कि बोरोरो जनजाति के लोग अक्सर ये करते हैं और आमतौर पर शेरों को भगाने के लिए लाठियों और आग का सहारा लिया जाता है.
शोधकर्ताओं का कहना है कि इसका शेरों की संख्या पर गंभीर असर हो सकता है क्योंकि एक शिकार को मारने में शेरों को ख़ासी मेहनत करनी होती है और उसके बाद भी अगर उन्हें भूखा रहना पड़े तो ज़ाहिर है उनकी ताक़त कम होगी.
पिछले कुछ सालों के सर्वेक्षणों में इन जंगलों में शेरों की संख्या घटती नज़र आ रही है और एक अनुमान है कि यहां हर साल छह शेर ग़ैरक़ानूनी तौर पर शिकार किए जाते हैं.
और अगर उनका निवाला भी उनके मुंह से छिन रहा है तो फिर भगवान ही बचाए जंगल सम्राट को.












