अल्ज़ाइमर रोग के जीन्स की खोज

अल्ज़ाइमर स्मृति खो देने वाली एक मानसिक बीमारी है
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ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने अल्ज़ाइमर रोग से संबंधित दो प्रमुख जीन्स को खोज निकाला है.

सोलह साल में पहली बार इस रोग से संबंधित जीन के बारे में जानकारी मिली है और इस शोध ने वैज्ञानिकों को उन सिद्घांतों पर फिर से सोचने को प्रेरित किया है कि यह रोग कैसे पनपता है.

ये जीन्स सोलह हज़ार डीएनए नमूनों पर चिह्नित किए गए थे और ये कोलेस्टेरॉल के विघटन के लिए जाने जाते हैं.

उम्मीद की जा रही है कि इस रोग के आनुवांशिक अध्ययन के ज़रिए इसके इलाज के नए रास्ते खुलेंगे.

अल्ज़ाइमर रोग से संबंधित आख़िरी और एकमात्र जीन एपीओई4 जीन है जिस पर शोधकर्ताओं का प्रमुख ध्यान रहा है.

ब्रिटेन के कई विश्वविद्यालयों के सामूहिक प्रयास से जुटाए गए ये आंकड़े फ़्रांसीसी शोधकर्ताओं को भी मुहैया कराए गए जिन्होंने सीआर1 नामक एक तीसरे जीन की पहचान की है. शोधपत्र में इस जीन का भी उल्लेख किया गया ह.

ब्रिटिश शोधकर्ताओं द्वारा खोजे गए दोनों जीन्स— सीएलयू और पीआईसीएएलएम मस्तिष्क में अपनी रक्षात्मक भूमिका के लिए जाने जाते हैं.

शोधकर्ताओं का कहना है कि इन जीन्स में कोई भी बदलाव या तो इनकी रक्षात्मक भूमिका को ख़त्म कर सकता है या फिर इन्हें रक्षात्मक से आक्रामक बना सकता है.

शोधकर्ताओं में से एक नॉटिंघम विश्वविद्यालय के प्रो. केविन मॉर्गन ने बताया, "इससे परंपरागत दवाओं के माध्यम से इस रोग के इलाज के नए रास्ते खुलेंगे. अब सवाल ये उठता है कि यदि हम कोलेस्टेरॉल और प्रदाह को नियंत्रित कर लें तो क्या लोगों में अल्ज़ाइमर रोग के ख़तरे को कम किया जा सकता है."

अकेले ब्रिटेन में समृति लोप के सात लाख रोगी हैं और अनुमान है कि साल 2050 तक ये संख्या सत्रह लाख तक पहुंच जाएगी.

इस अध्ययन के प्रमुख जूली विलियम्स, जो कि अल्ज़ाइमर शोध ट्रस्ट के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार भी हैं, का कहना है कि ये शोध आगे चलकर काफी महत्वपूर्ण हो सकता है.

"हम अल्ज़ाइमर रोग से संबंधित एक विशिष्ट सिद्धांत के बारे में जानने की कोशिश कर रहे थे लेकिन आंकड़े बताते हैं कि इसमें कई पेंच हैं."

"वास्तव में ये बताना बेहद मुश्किल है कि सामान्य अल्ज़ाइमर रोग कैसे होता है. लेकिन आने वाले दिनों इस बारे में स्थिति काफी कुछ साफ हो सकती है."

इस अध्ययन दल में कार्डिफ़, लंदन, कैंब्रिज, नॉटिंघम, साउथहैम्पटन, मैनचेस्टर, ऑक्सफोर्ड, ब्रिस्टल और बेलफ़ास्ट के वैज्ञानिक शामिल थे और अगले एक साल में इससे साठ हज़ार लोगों को और जोड़ने की योजना है.

अल्ज़ाइमर सोसायटी के डॉ. सूसेन सोरेंसन ने इस शोध को बेहद उत्साहजनक बताया है.