तापमान बढ़ रहा है तबाही की ओर

जलवायु परिवर्तन के एक अध्ययन में कहा गया है कि हम में से बहुत से लोगों की ज़िंदगी में ही विश्व के तापमान में तबाह करने वाली बढ़ोतरी होने वाली है.
तापमान आज के मुक़ाबले चार डिग्री बढ़ जाएगा. ये अध्यन जलवायु पर नज़र रखने वाले एक ब्रितानी संस्थान हैडली सेंटर के ज़रिए किया गया है.
ब्रितानी शोध संस्थान ने सुपर कंप्यूटर के ज़रिए विश्व स्तर पर तापमान में आने वाली बढ़ोतरी की जो गंभीर तस्वीर पेश की है उससे ऐसा लगता है विनाशकारी बदलाव काफ़ी नज़दीक है.
ये अध्यन उस अनुमान को ग़लत साबित करता है जिसमें कहा गया था कि ग्लोबल तापमान का ख़तरा आने वाली नस्ल को होगा.
सामान्य तापमान में 2050 के दशक तक चार डिग्री की बढ़ोतरी का मतलब है आर्कटिक और अफ़्रीका जैसे कुछ क्षेत्रों में तापमान 10 डिग्री तक बढ़ जाएगा.
'भारी विनाश'
इसके कारण कुछ क्षेत्रों में होने वाली बारिश में भारी कमी आ जाएगी तो कुछ इलाक़ों में बाढ़ का प्रकोप बढ़ जाएगा और दुनिया के आधे से ज़्यादा जीव-जंतुओं का विनाश हो जाएगा.
इस तेज़ी से बढ़ने वाले तापमान के पीछे है फ़ीडबैक साइकल का प्रभाव जिसके तहत बढ़े हुए तापमान के नतीजे में धरती और समुद्ग से अधिक कार्बन निकलते हैं इसलिए ग्रीन हाउस प्रभाव में तेज़ी आ जाती है.
इस शोध में काम करने वाले वैज्ञानिकों का मानना है कि हमारा अंत क़रीब ही है अगर मनुष्य द्वारा होने वाले ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन में जल्दी से जल्दी कमी नहीं की गई.
इसी दौरान दिसंबर में संयुक्त राष्ट्र संघ के जलवायु परिवर्तन सम्मेलन से पहले 190 देशों के प्रतिनिधि बेंकॉक में इकठ्ठा हुए हैं और संयुक्त राष्ट्र संघ ने उनपर ज़ोर दिया है कि वे कोपेनहेगन में होने वाले सम्मेलन के सिलसिले में वास्तविक प्रगति दिखाएं.
विकासशील देशों की मुख्य मांग ये रही है कि अमीर देश उन्हें आर्थिक सहयोग दें ताकि उन्हें अपने कार्बन उत्सर्जन को रोकने में मदद मिले.












