मेढक गायब, सांप गुम

मेढ़कों की कई प्रजातियां विलुप्त हो गईं हैं और कई उसकी कगार पर हैं.
इमेज कैप्शन, मेढ़कों की कई प्रजातियां विलुप्त हो गईं हैं और कई उसकी कगार पर हैं.

वैज्ञानिकों ने एक ताज़ा शोध में पाया है कि दुनिया में पाए जानेवाले जीवों में से एक तिहाई लुप्त होने की कगार पर है और ये ख़तरा हर दिन बढ़ता जा रहा है.

पशु पक्षियों के संरक्षण पर काम करनेवाली संस्था आईयूसीएन ने 47,677 जीवों की एक रेड लिस्ट जारी की है जिसमें 17,291 जीवों की प्रजातियां गंभीर ख़तरे में हैं.

इनमें से 21 प्रतिशत स्तनधारी जीव हैं, 30 प्रतिशत मेढकों की प्रजातियां हैं, 70 प्रतिशत पौधे हैं और 35 प्रतिशत बिना रीढ़ की हड्डी वाले यानि सांप जैसे जीव हैं.

वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके लिए ज़िम्मेदार ख़तरों को, ख़ासकर वो जगह जहां इस तरह के जीव रहते हैं, पनपते हैं, कम करने के लिए उचित कदम नहीं उठाए जा रहे.

आईयूसीएन की निदेशक जेन स्मार्ट का कहना है कि इस बात के वैज्ञानिक सबूत मिल रहे हैं कि इस तरह के जीवों पर ख़तरा बढ़ता जा रहा है.

उनका कहना है,`` हाल के विश्लेषणों से स्पष्ट है कि 2010 का जो लक्ष्य था इन ख़तरों को कम करने का वो पूरा नहीं हो पाएगा.’’

उनका कहना है कि सरकारों को फ़ौरन गंभीर कदम उठाने होंगे क्योंकि समय बेहद तेज़ी से ख़त्म हो रहा है.

इस संस्था की तरफ़ से जारी रेड लिस्ट दुनिया भर में फैले हज़ारों वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के आधार पर बनती है और इसे जैव विविधता पर सबसे विश्वसनीय रिपोर्ट माना जाता है.

इस रिपोर्ट में मेढकों की प्रजातियों का ख़ास तौर पर ज़िक्र है और इसमें कहा गया है इसकी 6,285 प्रजातियों में से 1,895 विलुप्त होने की कगार पर हैं.

सांप भी ख़तरे में हैं.
इमेज कैप्शन, सांप भी ख़तरे में हैं.

उदाहरण के तौर पर किहांसी स्प्रे टोड एक ऐसा मेढक है जो पहले ख़तरे में था और अब विलुप्त हो चुकी प्रजातियों की श्रेणी में आ गया है.

तनज़ानिया में पाया जानेवाला ये मेढक इसलिए लुप्त हुआ क्योंकि जहां इसका बसेरा होता था वहां नदी के ऊपरी हिस्से पर बांध बना दिया गया और पानी के बहाव में 90 प्रतिशत की कमी आ गई.