होगी अलज़ाइमर्स की रोकथाम

एक नए शोध से ये सामने आया है कि अच्छी मात्रा में विटामिन बी का सेवन करने से मस्तिष्क कम सिकुड़ता है.
अगर विटामिन बी लेने वाला कोई बुज़ुर्ग हो जिसमें अलज़ाइमर्स की बीमारी होने के संकेत दिख रहे हों तो उसका दिमाग़ पहले के मुक़ाबले आधा ही सिकुड़ेगा.
मस्तिष्क का सिकुड़ना एक ऐसा लक्षण है जिससे डिमेंशिया और अलज़ाइमर्स जैसी बीमारी हो सकती है.
शोधकर्ता कहते हैं कि अलज़ाइमर्स को रोकने के लिए उपाय ढूंढने की दिशा में ये पहला क़दम हो सकता है.
विशेषज्ञों ने इस शोध को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि अभी इस शोध पर और काम करने की ज़रूरत है.
ये शोध 'पब्लिक लाइब्रेरी ऑफ़ साइंस वन' पत्रिका में प्रकाशित हुआ है. इसमें 168 उम्रदराज़ लोगों पर शोध किया गया है जिनके मस्तिष्क की ताकत कम होने लगी थी.
ऐसी स्थिति में याद्दाशत कमज़ोर होने लगती है और बोलने में दिक्क़त आती है. ये लक्षण अलज़ाइमर्स और डिमेंशिया होने से पहले दिखते हैं.
जिन लोगों पर शोध किया गया उनमें से आधे लोगों को रोज़ विटामिन बी फ़ोलेट, बी-6 और बी-12 की गोलियां दी गईं. बाक़ी बचे आधे लोगों को प्लैसेबो दिया गया था.
प्लैसेबो एक झूठी गोली होती है जिसका कोई असर नहीं होता है. लेकिन इसके बारे में मरीज़ को मालूम नहीं होता. मरीज़ को लगता है कि उस दवाई से वो ठीक हो जाएगा. यह एक तरह का इलाज ही है.
सिकुड़ने की रफ़्तार
शोध का ये सिलसिला दो साल तक चला. दो साल बाद सभी के मस्तिष्क की सिकुड़न को मापा गया.
आम तौर पर 60 साल की उम्र के बाद एक सामान्य दिमाग़ 0.5 प्रतिशत की दर से सिकुड़ता है, लेकिन अलज़ाइमर्स के मरीज़ों का दिमाग़ हर साल 2.5 प्रतिशत की दर से सिकुड़ता है.
शोध में लगी टीम ने पाया कि जिन लोगों ने विटामिन की गोलियां ली थीं उनके दिमाग़ सिकुड़ने की रफ़्तार अमूमन 30 प्रतिशत धीमी हो गई थी.
कुछ के दिमाग़ की सिकुड़ने की रफ़्तार 50 प्रतिशत तक धीमी हो गई थी. ऐसी स्थिति में उनके दिमाग़ और एक सामान्य व्यक्ति के दिमाग़ में ज़्यादा फ़र्क नहीं था.

विटामिन बी- फ़ोलिक एसिड, विटामिन बी-6 और विटामिन बी-12 ख़ून में मौजूद होमोसिस्टीन के स्तर को क़ाबू में करते हैं. ख़ून में होमोसिस्टीन की बढ़ी हुई मात्रा दिमाग़ को तेज़ी से सिकोड़ती है जिससे अलज़ाइमर्स बीमारी हो सकती है.
शोधकर्ताओं का मानना है कि भारी मात्रा में दी गई विटामिन बी की गोलियों के प्रभाव से होमोसिस्टीन का स्तर बराबर हो गया. नतीजतन दिमाग़ धीमी रफ़्तार से सिकुड़ने लगा.
ज़रा बच के
शोधकर्ता प्रोफ़ेसर डेविड स्मिथ ने कहा कि इस शोध के नतीजों में उन्हें उम्मीद से बेहतर परिणाम मिले हैं.
उन्होंने कहा, "ये विटामिन दिमाग़ के अंदर कुछ तो कर रहे हैं. ये दिमाग़ की सुरक्षा कर रहे हैं और ये बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि अलज़ाइमर्स से बचाव के लिए मस्तिष्क की सुरक्षा ज़रूरी है."
लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि अब इस शोध में ये देखने की ज़रूरत है कि भारी मात्रा में विटामिन बी देने से क्या वाक़ई अलज़ाइमर्स होने से रोका जा सकता है?
वहीं मेडिकल रिसर्च काउंसिल के 'न्यूरोसाइंस एंड मेंटल हेल्थ बोर्ड' के अध्यक्ष क्रिस केन्नार्ड ने चेताया है कि विटामिन बी जैसे सप्लीमेंट की सलाह किसी को देने से पहले इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि भारी मात्रा में इन दवाईयों को लेने से स्वास्थ्य को हानि भी हो सकती है.












