2010: उलट दिए प्रकृति के नियम
- Author, पारुल अग्रवाल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
स्वास्थ्य

कृत्रिम कोशिकाओं के ज़रिए धरती पर इंसान बनाने का सपना, अंडे और मुर्गी की गुत्थी सुलझाने का दावा या फिर बूढ़े चूहों को जवान कर दिखाने का कमाल. साल 2010 में इंसान ने लगातार ईश्वर और प्रकृति से एक कदम आगे रहने की कोशिशें की. विज्ञान के लिहाज़ से अलग-अलग क्षेत्रों में कैसा रहा ये साल, आइए डालते हैं एक नज़र.
2010 की सबसे बड़ी उपलब्धि के रुप में वैज्ञानिकों ने एक <link type="page"><caption> कृत्रिम कोशिका</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2010/05/100520_artificial_life_va.shtml" platform="highweb"/></link> बना कर जीव विज्ञान के क्षेत्र में तहलका मचा दिया. इस कोशिका का डीएनए पूरी तरह कृत्रिम था.
माना जा रहा है कि अमरीकी अनुसंधानकर्ताओं की यह कामयाबी कृत्रिम जीवन बनाने की दिशा में एक पहल साबित होगी.
लंदन के वैज्ञानिकों ने भी एक कृत्रिम रक्त नली (रक्त धमनी) बनाने में सफलता हासिल की. बढ़ती उम्र के चलते, बाईपास सर्जरी के लिए जिन लोगों के शरीर से स्वस्थ रक्त नली मिलना मुश्किल है, उनके लिए ये कृत्रिम नली वरदान साबित होगी.
इस साल ऑक्सफ़र्ड विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि हर दिन संतुलित मात्रा में <link type="page"><caption> एस्प्रिन </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2010/12/101207_asprin_cancerrisk_pa.shtml" platform="highweb"/></link>का सेवन हर तरह के कैंसर से बचाव करता है. हर दिन एस्प्रिन लेने वाले मरीज़ों में कैंसर से मौत का ख़तरा 25 फीसदी तक कम हो गया.
इस बीच अमरीका के डॉक्टरों ने प्रयोगशाला से एक कदम आगे मरीज़ों के शरीर पर <link type="page"><caption> स्टेम कोशिकाओं</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2010/10/101012_stemcell_humans_pa.shtml" platform="highweb"/></link> के प्रयोग शुरु किए.
स्टेम कोशिकाओं की ख़ासियत है कि वो शरीर में मौजूद किसी भी कोशिका का रुप ले सकती हैं.
अगर ये प्रयोग सफल रहे तो कोशिकाओं के मृत होने से जुड़ी बीमारियों के इलाज और उन्हें बदलने में स्टेम कोशिकाएं चमत्कारी रुप से काम करेंगी.
कनाडा के मैक्मास्टर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने त्वचा की कोशिकाओं से रक्त बनाने का कारनामा भी कर दिखाया. त्वचा के तीन से चार सेंटिमीटर के हिस्से से एक वयस्क की ज़रूरत लायक खून बनाया जा सकता है.
ब्रह्मांड

अब तक यह माना जाता था कि धरती पर जीवन के छह प्रमुख तत्त्व हैं-कॉर्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्फ़र और फ़ॉस्फ़ोरस.
इस साल अनुसंधानकर्ताओं ने कैलिफ़ॉर्निया की झील में एक ऐसा जीवाणु पाया जिसने फ़ॉस्फ़ोरस के बदले ज़हरीले रसायन <link type="page"><caption> आर्सेनिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2010/12/101203_newlife_arsenic_ap.shtml" platform="highweb"/></link> को अपनी संरचना में शामिल कर लिया है.
इस खोज से यह धारणा पुष्ट हुई कि दूसरे ग्रहों पर अलग-अलग रसायनों से मिलकर बने जीवाणु और जीवन संरचनाएं भी मौजूद हो सकती हैं.
इस साल विश्व में पहली बार वैज्ञानिकों ने <link type="page"><caption> एंटी मैटर </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2010/11/101117_antimatter_cern_skj.shtml" platform="highweb"/></link>या प्रतिपदार्थ के अणुओं को कुछ क्षणों के लिए पकड़ने में भी सफलता पाई.
पदार्थ उसे कहते हैं जिससे कि पूरी दुनिया का निर्माण हुआ है. जब पदार्थ और प्रतिपदार्थ एक साथ जुड़ते हैं तो एक दूसरे का अस्तित्व समाप्त कर देते हैं और शेष कुछ नहीं बचता. इससे दुनिया की उत्पत्ति के बारे में काफ़ी जानकारी मिल सकती है.
उधर अमरीका में मंदी की मार का असर साल 2010 में नासा के अंतरिक्ष कार्यक्रमों पर पड़ा.
अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने वित्तीय तंगी के चलते 2020 में एक मानव दल के चांद पर जाने के कार्यक्रम को रद्द कर दिया. माना जा रहा है कि ये कार्यक्रम अब निजी हाथों में सौंपा जाएगा.
साल के दिन आखिरी भारत के लिए एक दुखद घटना लेकर आए जब श्रीहरिकोटा से <link type="page"><caption> जीएसएलवी-एफ़06 यान</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2010/12/101225_gslv_expoloded_vv.shtml" platform="highweb"/></link> के ज़रिए किया गया उपग्रह प्रक्षेपण विफल हो गया. प्रक्षेपण के कुछ ही समय बाद इसमें विस्फोट हो गया.
वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि नए संचार उपग्रह से टीवी, टेलीमेडीसन, टेलीशिक्षा और टेलीफ़ोन सेवाओं को बेहतर करने में मदद मिलेगी.
अगर ये मिशन सफल होता तो भारत अमरीका और रुस जैसे उन पाँच देशों की श्रेणी में शामिल हो जाता जिनके पास इस तरह की तकनीक है.
पर्यावरण

साल 2010 को संयुक्त राष्ट्र की ओर से <link type="page"><caption> अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता वर्ष</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2010/01/100111_biodiversity_natural_mk.shtml" platform="highweb"/></link> घोषित किया गया. ये मौका था दुनिया को आगाह करने का कि जैव विविधता को नुकसान पहुंचा कर इंसान मुफ़्त में मिल रही प्राकृतिक सुविधाओं को किस तरह खत्म करता जा रहा है.
इस साल के इतिहास में अब तक की सबसे भीषण पर्यावरण संबंधित <link type="page"><caption> दुर्घटना</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2010/04/100430_oilleak_us_as.shtml" platform="highweb"/></link> भी दर्ज हुई. 20 अप्रैल 2010 को दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी के तेल के कुएं में विस्फोट हुआ.
मैक्सिको की खाड़ी में हुई इस दुर्घटना में 11 लोगों की मौत हो गई और समुद्र में 40 लाख बैरल से भी ज़्यादा तेल का रिसाव हुआ. समुद्री जीवन को भारी नुकसान के बाद तेल का यह रिसाव जुलाई में बंद हुआ.
अप्रैल के महीने में आइसलैंड में फटे एक <link type="page"><caption> ज्वालामुखी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2010/04/100415_flight_airline_ra.shtml" platform="highweb"/></link> की राख ने यूरोप के कई देशों में हवाई सेवा को ठप कर दिया. एयर लाइंस की चिंता थी कि ज्वालामुखी की राख विमानों के इंजनों को जाम कर सकती है. छह दिनों तक हज़ारों उड़ानें बाधित रहीं और लाखों यात्री प्रभावित हुए.
25 साल की लगातार खोज के बाद मैडास्कर की एलाओट्रा झील में पाई जाने वाली चिड़िया एलाओट्रा ग्रेब को 2010 में विलुप्त घोषित कर दिया गया.
पीली चोंच वाले इस पक्षी का आकार इतना छोटा था कि यह ज़्यादा लंबी उड़ान नहीं भर सकता था. यही वजह है कि झील में मानवीय गतिविधियां बढ़ने के साथ यह पक्षी विलुप्त हो गया.
भारतीय पत्रकार पल्लव बागला को साल 2010 के लिए ‘अमेरिकन जियोफ़िसिकल यूनियन’ की ओर से विज्ञान क्षेत्र का प्रतिष्ठित ‘डेविड पर्लमेन अवार्ड’ मिला.
अपनी रिपोर्ट के ज़रिए पल्लव ने अमरीकी संस्थान आईपीसीसी द्वारा 2035 तक <link type="page"><caption> हिमालय के ग्लेशियर</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2010/01/100123_pachauri_ipcc_awa.shtml" platform="highweb"/></link> पिघलने के दावों की कलई खोली.
आईपीसीसी ने इस संबंध में अपनी गलती को स्वीकार किया और आंतरिक जांच के आदेश दिए.
कुछ हट के

बढ़ती उम्र इंसान को कभी रास नहीं आई. शायद यही वजह है कि हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के शोधकर्ताओं ने वृद्ध चूहों को जवान बनाने का प्रयोग शुरु किया.
वृद्ध चूहों के शिथिल अंगों में सुधार ने उनकी उम्र की रफ़्तार को उलट दिया गया और ये चूहे वृद्धावस्था से जवानी की ओर चल पड़े.
शोध कहता है कि ये प्रयोग इंसान पर सफल रहे तो वह दिन भी दूर नहीं जब उम्र नहीं ढलेगी और लोग सदा जवान रहेंगे.
सदियों से ये सवाल हमें उलझाता रहा है कि पहले कौन आया अंडा या मुर्गी, लेकिन इस साल ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने इस उलझन को भी सुलझा लिया.
वैज्ञानिकों ने पाया कि मुर्गी के अंडे ‘ओवोक्लेडिडिन-17’ नामक एक प्रोटीन से बनते हैं जो अंडे का खोल बनाने के लिए बेहद ज़रूरी है और मुर्गी के गर्भाशय में ही पाया जाता है.
यानी अंडा तभी बन सकता है जब मुर्गी का अस्तित्व हो!
इस साल अमरीका के वैज्ञानिकों ने दृष्टिहीनों के लिए कार बनाने का बीड़ा भी उठाया. इस गाड़ी में ऐसी तकनीक लगाई जाएगी कि दृष्टिहीन स्वतंत्र तौर पर गाड़ी चला सकेंगे.
गाड़ी में लगे सेंसर बीच रास्ते में आए मोड़ का अंदाजा लगाएंगे और ऑडियो संकेतों के ज़रिए नेत्रहीन चालक गाड़ी को नियंत्रित कर सकेंगे.
संगीत-प्रेमियों के हमजोली बन चुके<link type="page"><caption> ‘वॉकमैन’ </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2010/10/101021_walkman_demise_mg.shtml" platform="highweb"/></link>को इस साल सोनी कंपनी ने अलविदा कह दिया.
1979 में सोनी ने एक ऐसा कैसेट प्लेयर बाज़ार में उतारा जिसे लोग अपने साथ कहीं भी ले जा सकते थे. ये एक क्रांतिकारी उपकरण था और युवा पीढ़ी के बीच बहुत लोकप्रिय हुआ.
फिर तकनीक ने प्रगति की और बाज़ार में सीडी की धूम मच गई. ऐसे में कंपनी ने अब वॉकमैन को भी अलविदा कर दिया.
































