भारत में हो सकता है भुखमरी का संकट

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एक नई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले दिनों में भारत, ब्राज़ील, पश्चिमी अफ़्रीका और मैक्सिको में लोगों के सामने भुखमरी का ख़तरा हो सकता है.
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इन देशों को आने वाले दिनों में कृषि के एकदम नए तरीक़े अपनाने की ज़रुरत हो सकती है.
ये रिपोर्ट जलवायु परिवर्तन की वजह से पैदा होने वाले खाद्यान्न संकट पर तैयार की गई है.
वैश्विक कृषि अनुसंधान संस्थान (सीजीआईएआर) के वैज्ञानिकों को कहा गया था कि वे ऐसे इलाक़ों की पहचान करें जहाँ जलवायु परिवर्तन का खाद्यान्न उत्पादन पर सबसे अधिक असर पड़ने की आशंका है.
संकट का दायरा
इसके लिए मौजूदा खाद्यान्न उत्पादन और समस्या से निपटने की क्षमता का अध्ययन किया गया और ये आकलन किया गया कि जलवायु परिवर्तन की स्थिति में इसमें कैसा असर पड़ सकता है.
वैज्ञानिकों ने आने वाले दिनों में संभावित खाद्यान्न संकट के लिए जिन स्थानों की पहचान की है, उससे बहुत से लोगों को ज़्यादा आश्चर्य नहीं हुआ है.
उदाहरण के तौर पर इसमें पश्चिमी अफ़्रीका और भारत है जहाँ किसान पहले से ही संघर्ष कर रहे हैं.

इस शोध में ये भी कहा गया है कि जिन स्थानों पर खाद्यान्न उत्पादन स्थिर बना हुआ है वे आने वाले दिनों में संकट के दायरे में आ सकते हैं.
वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे देशों के दायरे में लातिनी अमरीकी देश आते हैं जो अपने मूल खाद्यान्न के रूप में बीन्स पैदा करते हैं लेकिन जब जलवायु परिवर्तन की वजह से तापमान बढ़ेगा तो बीन्स की पैदावार को ख़तरा पैदा हो जाएगा.
अपने अध्ययन में वैज्ञानिकों ने ये भी कहा है कि कुछ इलाक़े जलवायु परिवर्तन के प्रति ज़्यादा संवेदनशील नहीं हैं क्योंकि वे कृषि और पशुपालन के लिए ज़्यादा ज़मीन का उपयोग नहीं करते.
लेकिन अगर वे भविष्य में इस ओर जाने का फ़ैसला करते हैं तो उनके लिए भी संकट बढ़ सकता है.
उनका कहना है कि ये उप-सहारीय अफ़्रीका में के लिए परेशानी का सबब हो सकता है जहाँ तेज़ी से कृषि उत्पादन को बढ़ाने के प्रयास किए गए हैं.
इस शोध से जुड़े वैज्ञानिकों ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि इन समस्याओं से निपटने के उपाय तलाश करने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को तेज़ किया जाना चाहिए.
इसी हफ़्ते के शुरु में सहायता एजेंसी ऑक्सफ़ैम ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि यदि पर्याप्त उपाय नहीं किए गए तो खाद्यान्न की क़ीमतें अगले बीस वर्षों में दो गुनी हो जाएँगीं और इसकी आधी वजह जलवायु परिवर्तन होगी.












