अटलांटिस यान आख़िरी सफ़र पर

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अमरीकी यान अटलांटिस अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र से अपने को अलग कर धरती की ओर आख़िरी यात्रा पर निकल रहा है.
गुरुवार सुबह ये फ़्लोरिडा में उतरेगा और इसके साथ ही नासा का तीस साल पुराना अंतरिक्ष कार्यक्रम समाप्त हो जाएगा.
अटलांटिस तक़रीबन 200 मीटर की दूरी तय करने के बाद अतंरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का एक चक्कर लगा कर उस 400 टन बड़े ढांचे की तस्वीर लेकर उसकी स्थिति का जायज़ा लेगा.
हालांकि ये काम ऐसे यानों ने हमेशा ही किया है लेकिन इस बार तरीका थोड़ा अलग होगा.

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यान पर लगे रूसी कंप्यूटर अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन को 90 डिग्री पर घूमने का आदेश देंगे. इसका मतलब ये कि अटलांटिस यान को इस स्पेस स्टेशन का दूसरा रूप भी दिखाई देगा.
इन तस्वीरों से ज़मीन पर काम कर रहे इंजीनियरों को ये समझने में आसानी होगी कि अंतरिक्ष की कठिन परिस्थितयों का उन चीज़ों पर कैसा प्रभाव पड़ रहा है जिससे ये स्पेस स्टेशन तैयार किया गया है.
तोहफ़ा
अटलांटिस की चार लोगों की टीम ने स्पेस स्टेशन की छह लोगों की टीम को दो तोहफ़े दिए हैं.
एक तो इस यान का प्रतिरूप- इस बात को याद रखने के लिए कि इस स्पेस स्टेशन को बनाने में अंटलांटिस यान की कितनी बड़ी भूमिका थी और दूसरा तोहफ़ा था एक अमरीकी झंडा जो कि 1981 के सबसे पहले अंतरिक्ष यान मिशन पर फहराया गया था.
अटलांटिस के कमांडर क्रिस फ़रग्युसन का कहना था, "ये झंडा केवल राष्ट्रीय गर्व का चिन्ह नहीं है बल्कि इस मामले में ये एक लक्ष्य को दर्शाता है."
पहली निजी कंपनी जो कि स्टेशन से लोगों को लाने ले जाने का काम करेगी, वो तीन साल से पहले काम करना शुरू नहीं करेगी.































