अंधी मछलियों के जीवन की लय

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सोमालिया में गुफ़ा में रहनेवाली अंधी मछलियाँ यह तो जानती हैं कि समय क्या हुआ है लेकिन उनके दिन हम लोगों के दिनों से करीब दो गुना लंबे होते हैं.
करीब सभी जीवों में एक आंतरिक जैविक घड़ी या जैविक लय होती है जो करीब 24 घंटे की होती है. इसमें प्रकाश और अंधेरे के क्रम से अंतर आता रहता है.
प्लॉस बायोलाजी में प्रकाशित एक अंतरराष्ट्रीय शोध के मुताबिक गुफाओं में पाई जाने वाली कुछ अंधी मछलियों में जो जैविक लय पाया जाता है, वह करीब दो दिन का होता है.
गुफाओं में रहने वाली 'फ़्रीएटिक्थिस एंड्रूजी' प्रजाति की इस मछली ने सोमालियाई रेगिस्तान के नीचे स्थित गुफाओं में करीब 20 साल रहने के बाद इस गुण को विकसित किया है.
जर्मनी के कार्लजूए प्रौद्योगिकी संस्थान के प्रोफेसर निक फ़ोक्स कहते हैं, 'इस विशेष प्रजाति का चयन इसलिए किया गया क्योंकि यह काफी लंबे समय से दिन-रात से खुद को अलग कर लेने का एक अनोखा उदाहरण है.'
विकास के इस क्रम में इस मछली ने अपनी आँखें, रंग, शल्कों को खो दिया है, क्योंकि भूमिगत अंधेरे गुफाओं में उसे इनकी कोई जरूरत नहीं थी.
लेकिन यह लगता है कि रात-दिन के अभाव ने इस मछली के जीवन चक्र को बहुत हद तक प्रभावित किया है.
जैविक घड़ी
हरेक स्तनधारी जीव की आंतरिक जैविक घड़ी 24 घंटे से थोड़ी अधिक होती है और यह सबके लिए अलग-अलग होती है. यह प्रकाश के द्वारा संशोधित होती है.
यह साफ़-साफ़ तब नज़र आता है जब हम किसी दूसरे टाइम ज़ोन में यात्रा करने से जो थकान पैदा होती है वह जैविक लय के दिन के प्रकाश के साथ सामंजस्य न बैठा पाने के कारण होती है.
छोटे स्तर पर इसे दिन के अलग-अलग समय पर किसी ख़ास 'क्लॉक जीन' को ऑन-आफ करके मापा जा सकता है.
यह क्रिया प्रतिदिन स्वत: रूप से होती है लेकिन ये प्रकाश के आधार पर दिन-रात के चक्र के साथ सामंजस्य बिठा लेती है.
इसका मतलब यह हुआ कि गुफा मछली ने विकास के क्रम में अपनी आँखों को खो दिया. लेकिन उनका शरीर प्रकाश में प्रतिक्रिया करने के लिए अभी भी सक्षम होना चाहिए.
अंधेर में बीस लाख तक रहने के बाद गुफाओं में पाई जाने वाली इन मछलियों को प्रकाश से प्रतिक्रिया करने की कोई जरूरत नहीं रह गई थी. इसलिए उनके जैवीय चक्र में स्थायी रूप से इसे प्रतिबिंबित करने के लिए परिवर्तन हो गया.
































