सीरियल किलर का दिमाग़...

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अमरीका में ब्रायन डुगन को बलात्कार के आठ और हत्या के तीन मामलों में दोषी पाया गया, उसने दो बार सात साल की लड़कियों को अपना निशाना बनाया.
अमरीका में इलिनॉय की अदालत ने उसे मौत की सज़ा सुनाई मगर बाद में इस सज़ा पर अमल रोक दिया गया.
डुगन ने हत्याओं और बलात्कार के बारे में कभी किसी तरह का अफ़सोस या दुख ज़ाहिर नहीं किया, बल्कि उसे इस बात पर हैरत होती थी कि लोग इन मामलों को इतनी अहमियत क्यों दे रहे हैं.
यही वजह थी कि दुनिया के नामी-गिरामी न्यूरोसाइंटिस्ट डॉक्टर केंट कील का ध्यान डुगन की ओर गया और उन्होंने इस ख़तरनाक दिमाग़ का अध्ययन करना शुरू किया.
वैज्ञानिकों का कहना है कि किसी तरह के दुख या पछतावे का न होना यही दिखाता है उसके दिमाग़ में यह बात ही नहीं है कि वह कुछ ग़लत कर रहा है, यही कारण है कि वह ऐसे काम करने में ज़रा भी नहीं हिचकता.
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सिर्फ़ भावना के स्तर पर नहीं है बल्कि समाज विरोधी या मानवीय सिद्धांतों के विपरीत जाकर काम करने वाले लोगों के दिमाग़ की संरचना आम लोगों से अलग होती है.
डॉक्टर कील ने डुगन के साथ काफ़ी समय बिताया है, उसके दिमाग़ की कई तरह से स्कैनिंग, मैपिंग और रीडिंग की गई है, डॉक्टरों ने उससे बहुत विस्तार से बातें की हैं.
डॉक्टर कील की महारत दिमाग़ की संरचना और व्यक्ति के व्यवहार के आपसी संबंधों को समझने में है, वे हिंसक मनोरोग से पीड़ित लोगों के लिए उपचार के तरीक़े ढूँढने में लगे हैं.
डॉक्टर कील का कहना है कि डुगन जैसे लोगों को हज़ारों वर्षों से ख़ूँखार अपराधी और शैतान की तरह देखा जाता है, न कि एक रोगी की तरह, इस मामले में डर और घृणा का भाव इतना प्रबल होता है कि समस्याग्रस्त व्यक्ति से किसी को सहानुभूति नहीं होती.
आदतन हत्यारे
जिन लोगों को साइकोपैथ या आदतन अपराधी कहा जाता है, उनके बारे डॉक्टर कील का कहना है कि "वे ऐसे लोग हैं जिनके दिमाग़ में भावनाओं को संचालित करने वाला हिस्सा अविकसित है लेकिन उन्हें शैतान या दरिंदा कहना ठीक नहीं होगा."

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हत्या और बलात्कार जैसे आपराधिक और क्रूर कृत्य करने वाले दिमाग़ को समझने के लिए डॉक्टर कील की लेबोरेट्री ने एक मोबाइल ब्रेन स्कैनर बनाया है जिसे एक ट्रक पर रखकर उस जेल में ले जाया गया जहाँ डुगन बंद है.
डॉक्टर कील ने डुगन के दिमाग़ के घनत्व और उसके काम करने के तरीक़े का गहन किया, वे कहते हैं, "डुगन के दिमाग़ के उस हिस्से का घनत्व काफ़ी कम है जिसे पैरालिंबिक सिस्टम कहा जाता है, यही पैरालिंबिक सिस्टम व्यक्ति के व्यवहार को नियंत्रित करता है, सही ग़लत में अंतर करता है."
दिमाग़ के इन हिस्सों को वैज्ञानिक भाषा में एमीग्लाडा और प्री-फ्रंटल कोरटेक्स कहते हैं, यही हिस्सा मानवीय भावनाओं को भी संचालन करता है.
जिन लोगों के दिमाग़ के इस हिस्से को दुर्घटना की वजह से क्षति पहुँचती है उनका व्यवहार अचानक बदल जाता है, कई बार वे हिंसक या समाज विरोधी हो जाते हैं.
नैतिकता और विज्ञान की बहस
डॉक्टर कील का कहना है कि "डुगन के दिमाग़ के ये हिस्से ठीक से विकसित ही नहीं हुए हैं, ऐसा शायद किसी जेनेटिक गड़बड़ी की वजह से हुआ है."

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जेल में डुगन को स्कैनर लगाकर कई विचलित करने वाले दृश्य दिखाए गए और उसके दिमाग़ में होने वाली गतिविधियों को रिकॉर्ड किया गया, डॉक्टर कील ने पाया कि घायल लोगों, रोते हुए बच्चों, जलते हुए घरों को देखकर डुगन के दिमाग़ में बहुत कम हरकत हुई.
डॉक्टर कील का कहना है कि "जेल में बंद बहुत सारे अपराधियों में यह बात आम थी, इन सब लोगों के दिमाग़ में भावनाओं को संचालित करने वाला हिस्सा अविकसित है, ठीक उसी तरह जिस तरह कुछ लोगों के दिमाग़ में गणित या तार्किक चीज़ों की समझने की क्षमता कम होती है".
डॉक्टर कील जैसे डॉक्टरों के रिसर्च की वजह से न्याय व्यवस्था पर पुनर्विचार के लिए दबाव बढ़ रहा है, वैज्ञानिक अब ये साबित करने में सक्षम हैं कि किसी व्यक्ति के दिमाग़ की सरंचना उसकी हरकतों के लिए ज़िम्मेदार है, उसने सोच-समझकर ऐसा नहीं किया है.
यह अपने आप में एक बहुत दिलचस्प और जटिल बहस है, जहाँ अपराध के मामले में नैतिकता के आधार पर नहीं बल्कि व्यक्ति के दिमाग़ की संरचना के आधार पर न्याय करने की बात शुरू हो गई है.












