चावल खाने से डाइबिटीज का खतरा

ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में छपी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सफेद चावल खाने की वजह से डाइबिटीज हो सकती है.
ये रिपोर्ट हॉवर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने तैयार की है. इसमें कहा गया है कि एशियाई आबादी पर तो ये बात लागू होती ही है, दुनिया के अन्य हिस्सों में रहने वाले लोग भी इससे अछूते नहीं है.
लेकिन कई वैज्ञानिकों का कहना है कि इस रिपोर्ट में जो बातें कही गई है, वो गुमराह करने वाली भी हो सकती हैं.
इस बारे में शोध कर रहे शोधकर्ताओं का तर्क है कि डाइबिटीज एक बेहद जटिल बीमारी है और इस बात का कोई आसान जवाब नहीं है कि ये किस वजह से होती है.
आखिर कौन सा चावल खाएं
ये अध्ययन एशियाई लोगों से खासतौर पर जुड़ा हुआ है जहां सफेद चावल आमतौर पर रोज ही खाए जाते हैं.
लेकिन शोध में कहीं ये नहीं कहा गया कि जिस चावल के खाने से डाइबिटीज होने की बात कही जा रही है, वो छोटे आकार वाला चावल है या बासमती चावल.

ये भी नहीं बताया गया कि यहां उबले हुए चावल की बात की जा रही है या फ्राइड राइस की.
दरअसल चावल के पकाने की विधि से ही उसके खाने से होने वाला नफा-नुकसान जुड़ा हुआ है.
शोधकर्ताओं का कहना है कि चावल को मांस या सोयाबीन के साथ खाने से रक्त में शर्करा की मात्रा पर असर पड़ सकता है.
चावल खाने और उससे डाइबिटीज का जो संबंध शोधकर्ता बता रहे हैं, उसका आधार वो शोध है जो साढे तीन लाख लोगों पर किया गया.
शोध के मायने
आप कहेंगे कि जब इतने लोगों का अध्ययन करके ये नतीजा निकाला गया है तो इसके कुछ मायने तो जरूर होंगे.

लेकिन आपको बता दें कि शोधकर्ताओं ने इससे जुड़े 20 शोधों का अध्ययन किया तो पाया कि इनमें से केवल चार में चावल का संबंध डाइबिटीज से पाया गया.
ताजा रिपोर्ट तैयार करने वालों का कहना है पश्चिमी देशों में रहने वाले लोग भी चावल खाने की वजह से डाइबिटीज की जद में आ सकते हैं.
लेकिन आलोचक कहते हैं कि ये शोध पूर्व के लोगों पर किया गया है और पश्चिम के लोगों को भी इसकी कसौटी पर कसा जा रहा है.
कुल मिलाकर नतीजा ये निकला है कि चावल खाने और डाइबिटीज होने में कुछ संबंध तो है लेकिन ये हमेशा हो, ऐसा जरूरी नहीं.
































