'अखिलेश से ख़ुश नहीं, फिर भी वोट देंगे'

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उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन के बाद दोनों ही पार्टियों का कहना है कि वो 'सांप्रदायिक पार्टियों' को सत्ता में आने से रोकने के लिए साथ आई हैं.
मगर विश्लेषकों का आकलन है कि दोनों पार्टियों ने ये गठबंधन अपने 'मुस्लिम वोट बैंक' को खिसकने से रोकने के लिए किया है.

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तो क्या अखिलेश यादव के कार्यकाल से मुसलमान ख़ुश हैं? बीबीसी हिंदी ने यही सवाल अपने फ़ेसबुक पन्ने पर पूछा था जिसके जवाब में 500 से अधिक प्रतिक्रियाएं आईं.
हम यहां चुनिंदा मुस्लिम युवाओं की राय प्रकाशित कर रहे हैं.
इलाहाबाद से मोहम्मद ज़ाहिद ने लिखा, "अखिलेश सरकार से कोई मुसलमान ख़ुश नहीं है. उन्होंने 18% आरक्षण तो छोड़िए कोई एक काम भी नहीं किया बल्कि बदले में मुज़फ्फरनगर, बिजनौर और दादरी दिया. इस चुनाव में मुसलमानों के पास बसपा और सपा गठबंधन ही है जिनमें मुसलमान एक को वोट देगा. अपने तमाम कातिलों मे से एक कम दर्द देने वाला कातिल ही चुनेगा और संभवतः दिल पर पत्थर रखकर सपा गठबंधन ही उसका आखिरी विकल्प होगा."

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लखनऊ के आरिफ़ ख़ान ने लिखा, "नहीं , यूपी का मुसलमान खासकर युवा अखिलेश से काफ़ी नाराज़ है, वजह है आरक्षण के वादे का पूरा ना करना, मुज़फ्फरनगर दंगों के वक़्त अनदेखी और सैफ़ई में मनाया गया जश्न, राज्य भर में दंगे और दंगाइयों पर लगाम ना लगाना, राजा भैया से यारी मगर मुख़्तार अंसारी और अतीक़ से किनारा करना."
जावेद अहमद ने लिखा, "अखिलेश और कांग्रेस दोनों पार्टियाँ मुस्लिमो को वोटबैंक की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं. कांग्रेस ने मुस्लिमों की बदतरीन हालात पर महज रिपोर्ट बनवाईं और ठंडे बस्ते में रख दिया. मुस्लिम आरक्षण का लॉलीपॉप दिया अखिलेश आए और एक भी रिपोर्ट जैसे सच्चर रिपोर्ट रंगनाथमिश्र आयोग की रिपोर्ट, कुंडू आयोग की रिपोर्ट को लागू करने का वादा पूरा नहीं किया. पहले लैपटॉप का लॉलीपॉप देकर वोट लिया इस बार स्मार्टफोन की टॉफियां खिला रहे हैं. मुस्लिम वोटबैंक को ही एकजुट करने के लिए सपा और कांग्रेस ने गठबंधन किया है."

अलीगढ़ यूनिवर्सिटी के छात्र शुएब पाशा का मानना है, "ख़ुश तो बिलकुल नही हैं लेकिन मौजूदा हालात में बीजेपी से लड़ने के लिए गठबंधन से बेहतर विकल्प है नहीं. मायावती के उम्मीदवार ना ही इतने मज़बूत हैं और ना वो मुस्लिम हितों की ज्यादा हितैषी हैं."
वहीं मोहम्मद ताज ने लिखा,"आप सिर्फ़ मुसलमानों की बात क्यों कर रहे हैं, हमारा पूरा यूपी अखिलेश के काम से ख़ुश है."
तौहीद अहमद ख़ान ने टिप्पणी की, "हम सिर्फ़ भाजपा को हराने के लिए अखिलेश के साथ हैं."












