ओलंपिक: डाओ ने किया खंडन

लंदन ओलंपिक

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इमेज कैप्शन, डाओ का कहना है कि ऐसा कोई समझौता हुई ही नहीं था

डाओ केमिकल्स ने उन खबरों का खंडन किया है कि वह वर्ष 2012 में होने वाले लंदन ओलंपिक में स्टेडियमों से अपने विज्ञापन हटाने के लिए तैयार हो गया है.

कंपनी के प्रवक्ता स्कॉट व्हीलर ने एक बयान में कहा है कि कंपनी की 'लोगो ब्रांडिंग' को कभी इजाज़त थी ही नहीं इसलिए उनको हटाने के लिए राज़ी होने ना होने का सवाल ही नहीं है.

उन्होंने कहा, ''डाओ या किसी और ब्रांड को खेलों के दौरान स्टेडियम में इजाज़त देने पर कभी कोई समझौता नहीं हुआ था.''

उन्होंने कहा कि ओलंपिंक के दिशा-निर्देशों के अनुसार स्टेडियम में किसी प्रायोजक का विज्ञापन नहीं लगाया जाएगा.

ख़बर

इससे पहले लंदन से प्रकाशित संडे एक्सप्रेस ने यह खबर की थी कि डाओ केमिकल्स में लंदन ओलंपिक स्टेडियमों से अपने विज्ञापन हटाने के लिए तैयार हो गया है.

समाचार ऐजेंसी पीटीआई ने संडे टाइम्स का हवाला देते हुए कहा था कि डाओ ने कहा कि वो प्रायोजक के तौर पर स्टेडियम के चारों ओर लगने वाले पर्दानुमा स्टाइल से ढकने वाली पट्टी में अपने ब्रांड का नाम लगाने के अधिकार को ख़त्म करने पर सहमत हो गया है.

दुनिया भर में बहुत से लोग नहीं चाहते कि ये अमरीकी कंपनी डाओ ओलंपिक खेलों को प्रायोजित करे.

उनका कहना है कि जो कंपनी भोपाल गैस त्रासदी से जुड़ी हुई हो उसे ओलंपिक जैसे आयोजन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए.

इस अमरीकी कंपनी डाओ को आयोजन समिति के चेयरमैन सेबेस्टियन की आयोजन समिति ने अगस्त में लंदन 2012 खेलों का प्रायोजक बनाया था.

इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारतीय ओलंपिक संघ का कहना था कि वो डाओ के इस कदम से संतुष्ट नही है और चाहता है कि डाओ लंदन ओलंपिक खेलों के प्रायोजकों से हट जाए.