दफ़्तर में बॉस से तालमेल बिठाने का नुस्खा

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हम में से बहुत से लोगों को दफ़्तर में तालमेल बिठाने में दिक़्क़त होती है. नए-नए लोगों से सामना होता है तो हर बार अपनी पसंद-नापसंद को समझाना पड़ता है.
दूसरे की पसंद-नापसंद जानने की ज़रूरत होती है. ख़ास तौर से दफ़्तर में अपने सीनियर्स की आदतों को जानना ज़रूरी होता है.
आख़िर इस चुनौती से कैसे निपटा जा सकता है? पश्चिमी देशों में आजकल इस चुनौती से निपटने के लिए यूज़र मैनुअल बनाने का चलन बढ़ रहा है.
जैसे हम कोई नया फ़ोन या सामान ख़रीदते हैं, तो उसके साथ यूज़र मैनुअल मिलती है, जिसमें उस चीज़ की ख़ूबियां बताई जाती हैं.
ये भी लिखा होता है कि आप उस फ़ोन या किसी और सामान का बेहतर इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं.

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ठीक इसी तरह, आजकल पश्चिमी देशों में बहुत से लोग अपने-अपने यूज़र मैनुअल यानी पसंद-नापसंद और आदतों की फ़ेहरिस्त बनाने लगे हैं.
जिससे उनके साथ काम करने वाले उन्हें आसानी से समझ सकें. सब लोग साथ मिलकर बेहतर ढंग से काम कर सकें.
कामकाजी लोगों के यूज़र मैनुअल का ख़याल सबसे पहले अमरीका के बोस्टन की एक कंपनी स्टाइबेल, पीबॉडी ऐंड एसोसिएट्स के संस्थापक लैरी स्टाइबेल को आया था.
बात 2003 की है. लैरी स्टाइबेल एक मीटिंग के शुरू होने का इंतज़ार कर रहे थे. ख़ाली वक़्त में वो अपने नए फ़ोन का यूज़र मैनुअल पढ़ने लगे.
वहीं से उन्हें अपनी कंपनी के कर्मचारियों का यूज़र मैनुअल तैयार करने का ख़याल आया. लैरी ने इसकी शुरुआत ख़ुद के बारे में एक सूची तैयार करने से की.

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इसमें उन्होंने अपने काम करने के तरीक़े, पसंद-नापसंद के बारे में छोटा सा ब्यौरा तैयार किया. इसके बाद लैरी ने अपनी कंपनी के सभी कर्मचारियों को ऐसा करने को कहा.
कुछ वक़्त के बाद लैरी को लगा कि उनका ये नुस्खा बेहद काम आया है.
लोगों को एक दूसरे को समझने और साथ मिलकर काम करने में इस यूज़र मैनुअल से काफ़ी सहूलियत होने लगी.
मातहतों को भी अपने सीनियर्स के साथ काम करने में आसानी हुई. कई और कंपनियों और लोगों ने भी यूज़र मैनुअल का लैरी का नुस्खा आज़माया.
नॉर्वे के रहने वाले इवार क्रोघुर्द ऐसे ही लोगों में से एक हैं.

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नॉर्वे की अनिवार्य सैन्य सेवा के दौरान इवार को कई लोगों के साथ काम करने का मौका मिला था. मगर, उन्हें तालमेल में दिक़्क़त नहीं आई.
लेकिन, जब उन्होंने साल 2000 में अपनी डेटा कंपनी क्वेस्टबैक की शुरुआत की, तो अपने साथियों के साथ काम करने में ही उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा.
दस साल में उनकी कंपनी में तीन सौ से ज़्यादा कर्मचारी हो गए थे. मगर इवार को इनमें से कई लोगों के तो नाम ही नहीं मालूम थे.
फिर इवार ने यूज़र मैनुअल मैनुअल बनाने के नुस्खे पर अमल किया. उन्होंने अपने मातहत काम करने वालों को अपनी आदतों और खामियों के बारे में बताया.
मसलन ख़ुद उन्हें नहीं पता था कि कई बार कर्मचारी उनसे तुरंत फैसले की उम्मीद करते थे और इवोर बात को टालते रहते थे.

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जब साथियों ने उनके यूज़र मैनुअल के ज़रिए इस आदत को जाना तो उन्हें टोकने लगे. इससे इवार को भी जल्दी फैसले लेने की आदत हुई.
इसी तरह एक सीईओ अक्सर मीटिंग में जंग की कहानियां सुनाने लगते थे.
कर्मचारियों को यूज़र मैनुअल के जरिए उनकी इस आदत का पता चला, तो मीटिंग में लोग उन्हें टोकने लगे और मीटिंग जल्दी ख़त्म होने लगीं.
एक प्रोफ़ेसर साहब ने अपने यूज़र मैनुअल में लिखा कि लोग उनसे अप्वाइंटमेंट लेकर मिलें. उनके टहलने के वक़्त में अचानक आकर बात न करें.
क्योंकि वो वक़्त वो सोच-विचार में लगाते हैं. इन दिनों पश्चिमी देशों की कई कंपनियों में कर्मचारियों से यूज़र मैनुअल लिखाया जाता है. कई लोग इसे अच्छी बात मानते हैं.

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वहीं कईयों को ये झूठ का पुलिंदा लगता है. इसके विरोधी कहते हैं कि लोग अक्सर अपनी बुरी आदतें छुपा ले जाते हैं.
यूज़र मैनुअल की अपनी ख़ामियां हैं. इसकी शुरुआत करने वाले लैरी सलाह देते हैं कि किसी भी कंपनी में यूज़र मैनुअल लिखना अनिवार्य नहीं किया जाना चाहिए.
साथ ही वो सलाह देते हैं कि कंपनी के अधिकारियों को इसकी शुरुआत ख़ुद का यूज़र मैनुअल बनाकर करनी चाहिए.
फिर उनके मातहतों को उनकी मिसाल मानने में आसानी होगी. जानकार कहते हैं कि दूर-दूर रहकर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए ये नुस्खा बेहद कारगर होगा.
क्योंकि वो एक-दूसरे से मिल नहीं पाते. ऐसे में उन लोगों को एक दूसरे की पसंद और आदतों की जानकारी नहीं होती.

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यूज़र मैनुअल इस काम में उनका मददगार साबित होता है. यूज़र मैनुअल के नुकसान भी हैं. मसलन आपके बॉस ये कहें कि उन्हें चुनौतियां पसंद हैं.
लेकिन जब आप उनकी बातों को चुनौती देते हैं, तो वो आपको इसके लिए सज़ा भी दे सकते हैं. ऐसे में यूज़र मैनुअल का कोई फ़ायदा नहीं होगा.
अब अगर आप अपने बारे में ज़्यादा निजी जानकारियां साझा करते हैं, तो इसके भी नुक़सान हो सकते हैं. जैसे आप ये लिखते हैं कि आपको सुबह उठना पसंद नहीं.
तो, हो सकता है कि आपके बॉस ये कहें कि आपको ये आदत बदलनी चाहिए. यानी आपका अपनी आदत उजागर करना भारी भी पड़ सकता है.
पर, सावधानी के साथ इस्तेमाल करने पर ये नुस्खा दफ़्तर में कर्मचारियों के बीच, बॉस और मातहत के बीच तालमेल बेहतर करने में काफ़ी कारगर हो सकता है.
तो, आप कब तैयार कर रहे हैं अपना यूज़र मैनुअल?
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