'ईरानी सेना आ रही थी': अमेरिकी एयरमैन को बचाने में सीआईए ने निभाया अहम रोल

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- Author, गेब्रिएला पोमेरॉय
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अमेरिकी सेना ने ईरान में अपने एक लड़ाकू विमान के लापता क्रू सदस्य को एक नाटकीय मिशन में बचा लिया है.
इस फ़ाइटर जेट को वहाँ के एक दूरदराज़ इलाक़े में ईरान ने मार गिराया था.
ये सब कैसे हुआ ये अब भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन दुश्मन इलाक़े में फँसे एयरमैन को निकालने का ऑपरेशन बेहद जटिल था.
अमेरिकी मीडिया के मुताबिक़ इस मिशन में स्पेशल फ़ोर्सेज़ के कई जवानों के साथ अमेरिकी लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर भी शामिल थे.
अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई.
रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा, "हमने ईरान के पहाड़ों के काफ़ी अंदर से गंभीर रूप से घायल और बेहद बहादुर एफ़-15 क्रू सदस्य को बचा लिया है."
लेकिन इस एयरमैन की मुश्किलें शुक्रवार से शुरू हुईं, जब ख़बर आई कि दक्षिणी ईरान के ऊपर उड़ रहे एक एफ़-15 लड़ाकू विमान को मार गिराया गया.
इस विमान में एक वेपन्स सिस्टम्स ऑफ़िसर और एक पायलट सवार थे.
यह 20 साल से ज़्यादा समय में पहली घटना थी, जब दुश्मन की गोलीबारी में किसी अमेरिकी लड़ाकू विमान को मार गिराया गया.
इस एफ़-15ई स्ट्राइक ईगल में सवार अमेरिकी सेना के ये दोनों अधिकारी विमान से इजेक्ट करने में कामयाब रहे.
पायलट को उसी दिन बचा लिया गया था, लेकिन दूसरा क्रू सदस्य लापता था.
ईरान ने ज़िंदा पकड़ने पर घोषित किया था इनाम

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इसके बाद अमेरिका ने उसे खोजने का अभियान शुरू कर दिया.
वहीं ईरान ने इस अमेरिकी क्रू मेंबर को ज़िंदा पकड़ने के लिए 66 हज़ार डॉलर (क़रीब 62 लाख रुपए) का इनाम भी घोषित कर दिया.
सोशल मीडिया पर साझा किए गए कुछ वीडियो में कई हथियारबंद नागरिक उन्हें खोजते हुए दिखाई दे रहे थे. हालाँकि बीबीसी इन वीडियोज़ की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका है.
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक़ ज़मीन पर उतरने के बाद उस अधिकारी के पास अपनी हिफ़ाज़त के लिए सिर्फ़ एक हैंडगन थी.
ऐसी स्थिति के लिए एयरमैन को पहले से ट्रेनिंग दी जाती है. इसमें अपना बीकन सिग्नल ऑन करना, किसी ऊँची जगह तक पहुँचना, ख़ुद को छिपाना और संचार स्थापित करना शामिल होता है.
अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार एयरमैन ने पहाड़ की एक दरार में ख़ुद को छिपा लिया था और बीकन का इस्तेमाल बहुत सीमित रखा, क्योंकि उसे डर था कि इसका सिग्नल ईरान के हाथ लग सकता है.
इसके बाद वह कथित तौर पर अपने बचाव दल के पहुँचने का इंतज़ार करता रहा.
सीआईए का रोल

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अमेरिकी मीडिया से बात करने वाले ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक़, रेस्क्यू ऑपरेशन में सीआईए ने बेहद अहम भूमिका निभाई.
अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी ने ही एयरमैन की सटीक लोकेशन पहाड़ की एक दरार तक ट्रैक की और यह जानकारी पेंटागन को दी.
ट्रंप ने कहा कि रेस्क्यू ऑपरेशन की योजना बना रहे अमेरिकी अधिकारी उसकी लोकेशन पर "24 घंटे नज़र" रखे हुए थे.
राष्ट्रपति ने कहा, "हमारे दुश्मन भी हमारे अफ़सर की तलाश में जुटे थे और हर घंटे उसके और क़रीब पहुंचते जा रहे थे."
रिपोर्टों के मुताबिक़ सीआईए ने एक भ्रामक अभियान भी चलाया और ईरान के भीतर यह ख़बर फैलाई कि अमेरिकी बल दूसरे एयरमैन को पहले ही खोज चुके हैं.
'अमेरिका ने भेजे कई विमान'
ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में कहा कि अमेरिकी सेना ने "उसे वापस लाने के लिए दुनिया के सबसे घातक हथियारों से लैस दर्जनों विमान भेजे."
रिपोर्टों के अनुसार, जैसे ही अमेरिकी स्पेशल फ़ोर्सेज़ फँसे हुए अधिकारी की ओर बढ़ीं, ईरानी सैनिकों को उनकी लोकेशन से दूर रखने के लिए बमबारी और हथियारों से फ़ायरिंग की गई.
अमेरिकी मीडिया ने यह भी बताया कि बचाव दल को निकालने के लिए भेजे गए दो ट्रांसपोर्ट विमान ईरान के भीतर एक दूरदराज़ बेस से उड़ान नहीं भर सके.
बाद में उन्हें दुश्मन के हाथ लगने से रोकने के लिए नष्ट कर दिया गया. इसके बाद स्पेशल फ़ोर्सेज़ तीन अतिरिक्त विमानों से वहाँ पहुँचीं और क्रू को बाहर निकाला.
बीबीसी वेरिफ़ाई से पुष्टि किए गए वीडियो और तस्वीरों में मध्य ईरान के पहाड़ी इलाक़े में धुआँ छोड़ते विमान का मलबा दिखाई दिया.
यह जगह इस्फ़हान शहर से क़रीब 50 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में बताई गई.
ईरान की सेना का कहना है कि इस ऑपरेशन के दौरान अमेरिका के दो सी-130 सैन्य ट्रांसपोर्ट विमान और दो ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर नष्ट कर दिए गए.
सेना ने दावा किया कि "दक्षिणी इस्फ़हान के एक एयरपोर्ट पर चलाया गया अमेरिका का भ्रामक और फ़रार होने का मिशन पूरी तरह विफल कर दिया गया."
ईरानी सरकारी मीडिया ने रविवार को कहा कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के जवानों ने इस्फ़हान के ऊपर एक अमेरिकी ड्रोन को मार गिराया, जो लापता एयरमैन की तलाश कर रहा था.
हालाँकि, इस्फ़हान के पास हुई घटनाओं के इन दोनों दावों की बीबीसी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका है.
रात में पूरा किया गया रेस्क्यू मिशन
अधिकारियों के मुताबिक़ अमेरिकी समयानुसार आधी रात से पहले रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा हो गया था और एयरमैन को इलाज के लिए कुवैत ले जाया गया.
ट्रंप ने कहा कि, "अधिकारी गंभीर रूप से घायल हैं, लेकिन वह पूरी तरह ठीक हो जाएँगे."
अमेरिकी अधिकारियों ने यह नहीं बताया है कि बचाए जाने के समय एयरमैन की सटीक लोकेशन क्या थी या उसकी पहचान क्या है.
अमेरिकी सेना के पूर्व अधिकारी और रिटायर्ड नेवी एडमिरल विलियम फ़ैलन ने बीबीसी से कहा कि रेस्क्यू मिशन का वक़्त शायद अमेरिका के पक्ष में गया.
उन्होंने कहा, "अंधेरा हमारे लोगों के लिए बेहतर होता है, क्योंकि वे रात में ऑपरेशन करने के आदी होते हैं."
फ़ैलन ने कहा कि दुश्मन के इलाक़े के ऊपर उड़ान भरते समय "आपको हमेशा इस बात के लिए तैयार रहना पड़ता है कि अगला निशाना आप भी हो सकते हैं."
रविवार को ईस्टर्न डेलाइट टाइम यानी ईडीटी (अमेरिकी समयानुसार) के मुताबिक़ रात 12 बजे से ठीक पहले अमेरिकी मीडिया ने ख़बर दी कि दूसरा पायलट मिल गया है.
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका "कभी भी किसी अमेरिकी योद्धा को पीछे नहीं छोड़ेगा."
'मिशन फ़ेल हो गया': ईरान

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वहीं, ईरान ने ज़ोर देकर कहा कि यह ऑपरेशन विफल रहा.
ईरान की मुख्य सैन्य कमान के प्रवक्ता इब्राहिम ज़ोलफ़ाग़री ने वीडियो संदेश में कहा कि अमेरिका के कई सैन्य विमानों को इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी.
उन्होंने कहा, "युद्ध और आक्रामकता के दलदल में फँसे अज्ञानी अमेरिकी राष्ट्रपति को आख़िरकार समझ आ गया कि किसी भी ज़मीनी कार्रवाई, घुसपैठ या ऑपरेशन को निर्णायक और अपमानजनक हार का सामना करना पड़ेगा,"
डोनाल्ड ट्रंप के पायलट को बचाए जाने की घोषणा के बाद से ईरानी अधिकारियों और सरकारी टीवी ने "मिशन फ़ेल" वाली यही बात बार-बार दोहराई है.
कुछ अमेरिकी विश्लेषकों का कहना है कि ईरान के भीतर गहराई तक एक एफ़-15ई का गिरना और उसके बाद कई रेस्क्यू विमानों का नष्ट होना अमेरिकी एयर पावर की लिमिटेशन (सीमाओं) को दिखाता है.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के पूर्व कमांडर जनरल फ़्रैंक मैकेंज़ी ने बीबीसी के अमेरिकी सहयोगी सीबीएस से कहा, "इस मिशन में हमने वास्तव में कुछ विमान खोए, लेकिन ऐसी स्थिति में आपको यह नुक़सान हर दिन झेलने के लिए तैयार रहना होगा."
उन्होंने सीबीएस के फ़ेस द नेशन कार्यक्रम में कहा, "एक विमान बनाने में एक साल लगता है, लेकिन ऐसी सैन्य परंपरा बनाने में 200 साल लगते हैं जिसमें आप अपने किसी योद्धा को पीछे नहीं छोड़ते."
बीबीसी फारसी सेवा की ग़ोंचेह हबीबीआज़ाद की अतिरिक्त रिपोर्टिंग
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.





































