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सरबजीत कौर के कथित भारतीय पति की याचिका पर लाहौर हाई कोर्ट में हुई सुनवाई
- Author, शुमाइला ख़ान, एहतेशाम शामी
- पदनाम, बीबीसी उर्दू
- पढ़ने का समय: 10 मिनट
पाकिस्तान के लाहौर हाई कोर्ट में बुधवार को भारत से पाकिस्तान जाकर शादी करने वाली महिला सरबजीत कौर (नूर फ़ातिमा) के निकाह को रद्द करने वाली याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई.
इस याचिका को एक भारतीय शख़्स ने दायर किया है और उनका दावा है कि सरबजीत कौर आज भी उनकी पत्नी हैं, इसलिए उनका पाकिस्तानी नागरिक से हुआ निकाह रद्द किया जाए.
सरबजीत कौर (नूर फ़ातिमा) की मुलाक़ात साल 2016 में टिकटॉक पर पाकिस्तानी नागरिक नासिर से हुई थी. नवंबर 2025 में वो पाकिस्तान आ गई थीं, जहाँ उन्होंने नासिर से शादी कर ली थी.
इस महीने लंबे क़ानूनी मामलों का सामना करने के बाद उन्हें लाहौर में स्थित एक शेल्टर होम से अपने पाकिस्तानी पति के घर जाने की अनुमति मिल गई थी.
लेकिन अब भारतीय नागरिक करनैल सिंह ने अपने वकील अली चंगेज़ी संधू के ज़रिए लाहौर हाई कोर्ट में एक याचिका दाख़िल की है, जिसमें अनुरोध किया गया है कि सरबजीत कौर (नूर फ़ातिमा) और नासिर के निकाह को रद्द किया जाए.
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याचिकाकर्ता के वकील का कहना है कि पाकिस्तान की संवैधानिक और शरीयत अदालतों के तय किए गए नियमों के मुताबिक़, किसी महिला को दूसरी शादी करने से पहले अपने देश के क़ानूनों के मुताबिक़ अपने पहले पति से तलाक़ लेना ज़रूरी होता है.
वकील के अनुसार, पहले निकाह का पूरा तौर पर ख़त्म होना ज़रूरी है, तभी कोई महिला दूसरी शादी कर सकती है.
याचिकाकर्ता करनैल सिंह का कहना है कि सरबजीत कौर (नूर फ़ातिमा) की उनसे शादी अब भी कायम है, और उन्होंने अपनी याचिका में यह भी मांग की है कि पाकिस्तान के फ़ॉरेनर्स एक्ट 1946 और वीज़ा नियमों का उल्लंघन करने पर उनकी पत्नी को देश से बाहर निकाला जाए.
'मुंह में दांत न रहते , तब भी पाकिस्तान आती'
इससे पहले, नासिर के घर जाने की अनुमति मिलने पर सरबजीत कौर (नूर फ़ातिमा) ने कहा था कि वह अपनी बाकी की ज़िंदगी खुशियों के साथ पाकिस्तान में ही बिताना चाहती हैं और पाकिस्तान आने के अपने फैसले से संतुष्ट हैं.
मध्य पंजाब (पाकिस्तान) के ज़िले शेखूपुरा में अपने वकील अहमद हसन पाशा के चेंबर में मीडिया से बात करते हुए सरबजीत कौर (नूर फ़ातिमा) ने कहा, "मैं और नासिर सच्चा प्यार करते हैं. अगर आप सच्चा प्यार करते हैं, तो आपको यकीन होता है कि आप ज़रूर मिलेंगे."
उन्होंने कहा, "हम दोनों को प्यार करते हुए आठ साल हो गए थे और हमें भरोसा था कि हम एक दिन ज़रूर मिलेंगे. अगर मेरे मुंह में दाँत भी न रहते, तब भी मैं यहाँ (पाकिस्तान) ज़रूर आती."
कुछ समय पहले पाकिस्तानी सरकार सरबजीत कौर (नूर फ़ातिमा) को देश से बाहर भेजने पर विचार कर रही थी, लेकिन मुतरुका वक़्फ़ इमारत विभाग (भारत में शत्रु संपत्ति) के नोटिफ़िकेशन के मुताबिक़ विदेश मंत्रालय ने कहा, "सिर्फ़ राजनीतिक आधार पर सरबजीत कौर को डिपोर्ट नहीं किया जा सकता."
इस दौरान जब उनके भविष्य के बारे में पूछा गया, तो सरबजीत कौर (नूर फ़ातिमा) ने कहा, "मैं अपनी बाकी की ज़िंदगी ख़ुशी से बिताना चाहती हूँ, और जो कलमे मुझे नहीं आते, वह मैं सीख लूंगी."
बता दें कि सरबजीत कौर 4 नवंबर 2025 को सिख यात्रियों के साथ पाकिस्तान आई थीं और उनके वीज़ा की अवधि 13 नवंबर 2025 तक थी. लेकिन वह भारत वापस नहीं गईं और इस्लाम कुबूल करने के बाद मध्य पंजाब के शहर शेखूपुरा के रहने वाले नासिर हुसैन से शादी कर ली.
इसके बाद से सरबजीत कौर पाकिस्तान में ही रह रही थीं और धर्म परिवर्तन के बाद उन्होंने अपना नाम बदलकर नूर फ़ातिमा रख लिया था.
इस साल की शुरुआत में (4 जनवरी) उन्हें ज़िला ननकाना साहिब के एक इलाके से हिरासत में लेकर लाहौर के महिला शेल्टर होम भेज दिया गया, और उन्हें वाघा बॉर्डर के ज़रिए भारत भेजने की तैयारियां भी चल रही थीं. लेकिन आखिरी वक्त में उन्होंने भारत वापस जाने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया को फ़िलहाल रोक दिया गया.
उन्होंने पाकिस्तान सरकार को यह अनुरोध भी भेजा था कि उन्हें भारत न भेजा जाए. इसी पर पाकिस्तान के राज्यमंत्री तलाल चौधरी ने कहा था कि सरकार उनकी अर्ज़ी पर मानवीय आधार पर विचार कर रही है और "कोशिश की जा रही है कि उन्हें वापस न भेजा जाए."
जब उनसे पूछा गया कि क्या सरबजीत कौर के भारत की जासूस होने के आरोपों की भी जांच हो रही है, तो तलाल चौधरी ने कहा, "इस तरह की जांचें हमारे संस्थान करते रहते हैं. फ़िलहाल तो उनकी वही अर्ज़ी विचाराधीन है, जिसमें उन्होंने मानवीय आधार और भारत में अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले व्यवहार का हवाला दिया है."
'अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन होगा'
दूसरी तरफ़, पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व प्रमुख और पूर्व संसदीय सचिव सरदार महिंदरपाल सिंह ने एक याचिका दाख़िल की थी, जिसमें उन्होंने इस भारतीय महिला को डिपोर्ट करने की मांग की.
बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा, "अगर सरकार सरबजीत कौर के वीज़ा की अवधि बढ़ाती है तो यह अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन होगा. अगर वह विज़िट वीज़ा पर आई होतीं तो मुझे कोई आपत्ति न होती, लेकिन वह धार्मिक यात्रा वीज़ा पर आई हैं."
उन्होंने कहा, "अगर कोई हिंदू यहां से सऊदी अरब जाकर इस्लाम स्वीकार कर ले, तो क्या सऊदी अरब उसे वहीं रहने देगा?"
सरदार महिंदरपाल सिंह ने कहा, "सरबजीत कौर भारत से सिखों के पहले गुरु, बाबा गुरु नानक देव जी का जन्मदिन मनाने पाकिस्तान आई थीं, लेकिन अब इस घटना ने धार्मिक समारोह को विवादित बना दिया."
उन्होंने कहा, "हमें उनके इस्लाम स्वीकार करने पर आपत्ति नहीं है. दुनिया भर में लोग इस्लाम स्वीकार करते हैं. मेरा ऐतराज़ सिर्फ़ इस बात पर है कि धार्मिक यात्रा वीज़ा को विवादित बना दिया गया और एक पवित्र दिन को विवाद में बदल दिया गया."
उन्होंने आगे कहा, "अगर कोई व्यक्ति वीज़ा समाप्त होने के बाद भी रुकता है, तो यह ग़ैरकानूनी है और उसे कानून के मुताबिक़ परिणाम भुगतने पड़ते हैं."
सरदार महिंदरपाल सिंह ने यह भी कहा, "दुनिया में सिखों के पास सिर्फ़ एक ही देश है जहां वे धार्मिक श्रद्धा के साथ आते हैं- वह पाकिस्तान है. क्या यह मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं कि आप एक ऐसे व्यक्ति का साथ दे रहे हैं जिसने वीज़ा का दुरुपयोग किया है?"
ध्यान देने योग्य बात यह है कि इससे पहले सरबजीत कौर के वकील अहमद हसन पाशा ने बीबीसी उर्दू से बातचीत में दावा किया था कि सरबजीत कौर को उनकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ भारत वापस भेजा जा रहा है.
उन्होंने कहा था कि फ़ॉरेनर्स एक्ट 1946 के तहत सरबजीत कौर इस समय पाकिस्तान में रहने की अधिकृत (कानूनी) हक़दार नहीं थीं, और इसी वजह से उन्हें भारत भेजा जा रहा है.
अहमद हसन पाशा ने कहा था कि सरबजीत कौर अब भारत से 'स्पाउज़ वीज़ा' लेंगी, जिसके बाद वे दोबारा पाकिस्तान आ सकेंगी और यहां आकर स्थायी निवास (परमानेंट रेज़िडेंसी) के लिए आवेदन दे सकेंगी.
उन्होंने बताया, "सरबजीत कौर के पास धार्मिक यात्रा वीज़ा था, जिसकी अवधि सिर्फ़ दस दिन थी. यह वीज़ा कुछ चुनिंदा शहरों तक सीमित होता है और इसकी अवधि बढ़ाई नहीं जा सकती."
हाई कोर्ट में सरबजीत कौर के ख़िलाफ़ केस लड़ रहे वकील अली चंगेज़ी संधू एडवोकेट का कहना था कि केस पर अभी सुनवाई हो रही है.
अदालत में बहस
बुधवार को लाहौर हाई कोर्ट में जस्टिस फ़ारूक़ हैदर ने सरबजीत कौर के भारतीय पति करनैल सिंह द्वारा दायर याचिका पर, प्रारंभिक आपत्तियों के चरण में सुनवाई की.
वकील अली चंगेज़ी संधू और वकील मोहम्मद नवाज़ शेख़ ने रजिस्ट्रार ऑफिस की ओर से उठाई गई आपत्तियों पर अपने तर्क पेश किए.
स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी से जुड़ी आपत्ति पर अदालत ने निर्देश दिया कि संबंधित अंतरराष्ट्रीय कानूनों और पिछले न्यायिक फैसलों की प्रतियां पेश की जाएं. इसके बाद अदालत ने सुनवाई 2 मार्च 2026 तक के लिए स्थगित कर दी.
अदालत ने पूछा कि भारतीय नागरिक द्वारा जमा की गई पावर ऑफ अटॉर्नी की पाकिस्तान के गृह मंत्रालय से प्रमाणीकरण क्यों नहीं कराया गया.
इस पर वकील अली चंगेज़ी संधू ने बताया कि स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी एक्ट केवल पाकिस्तानी नागरिकों और विदेश में रहने वाले पाकिस्तानियों पर लागू होता है.
क्योंकि करनैल सिंह भारतीय नागरिक हैं और उनके पास पाकिस्तानी पहचान पत्र नहीं है, इसलिए लंदन स्थित पाकिस्तानी हाई कमीशन ऐसी पावर ऑफ अटॉर्नी को रजिस्टर नहीं करता.
इसी वजह से दस्तावेज़ की पुष्टि एक सॉलिसिटर से कराई गई.
अदालत ने यह भी पूछा कि पाकिस्तान का कानून किसी विदेशी नागरिक द्वारा पाकिस्तान में मौजूद किसी व्यक्ति को पावर ऑफ अटॉर्नी देने के बारे में क्या कहता है.
वकील संधू ने बताया कि विदेशी नागरिक द्वारा दी गई ऐसी पावर ऑफ अटॉर्नी पर पाकिस्तानी कानून मौन है, इसलिए यह मामला अपनी प्रकृति में बेहद विशिष्ट है.
उन्होंने कहा कि संभव है कि इस मामले को उन अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचों की रोशनी में देखा जाए, जिनका हिस्सा पाकिस्तान और भारत दोनों हैं.
अदालत ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संबंधित मिसालों को रिकार्ड पर लाया जाए.
ननकाना साहिब नहीं गईं
सरबजीत के वकील का कहना है कि उन्होंने 15 नवंबर को दोनों को अपने चेंबर में बुलाया था ताकि वे सरकारी अधिकारियों के सामने अपने बयान दर्ज करा सकें, लेकिन वादा करने के बावजूद दोनों पति–पत्नी नहीं आए और नासिर हुसैन का मोबाइल फोन भी बंद हो गया.
सरबजीत कौर 4 नवंबर को सिख यात्रियों के साथ पाकिस्तान आई थीं और उन्हें अगले दिन बाबा गुरु नानक के जन्मदिन के मौके पर ननकाना साहिब जाना था.
लेकिन 7 नवंबर को उन्होंने शेखूपुरा के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट को दिए गए बयान में कहा कि पाकिस्तान आने के बाद उन्होंने अपनी मर्ज़ी से इस्लाम कबूल किया और नासिर हुसैन नाम के पाकिस्तानी नागरिक से शादी की.
उनके वकील अहमद हसन पाशा के अनुसार, इस शादी का रजिस्ट्रेशन शेखूपुरा की संबंधित यूनियन काउंसिल में कराया गया.
शेखूपुरा के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट मोहम्मद खालिद महमूद वड़ाइच की अदालत में जमा दस्तावेजों के मुताबिक, सरबजीत कौर ने क़ारी हाफ़िज़ रिज़वान भट्टी के हाथों इस्लाम ग्रहण किया, जिसके बाद उनका इस्लामी नाम 'नूर' रखा गया.
उन्हें 5 नवंबर को इस्लाम स्वीकारने का प्रमाणपत्र जारी किया गया.
अदालत में जमा किए गए निकाहनामे के अनुसार, नासिर हुसैन की उम्र 43 साल और दुल्हन की उम्र 48 वर्ष 6 महीने है. निकाहनामे में 10,000 रुपये मेहर तय की गई.
इसमें यह भी दर्ज है कि नासिर हुसैन पहले से शादीशुदा हैं और उन्हें दूसरी शादी की अनुमति की ज़रूरत नहीं थी.
भारतीय महिला की ओर से पुलिस के ख़िलाफ़ अदालत में एक शिकायत भी दायर की गई, जिसमें पुलिस पर धमकी देने और झूठा मुकदमा दर्ज करने के आरोप लगाए गए हैं.
पुलिस पर परेशान करने का आरोप
ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट मोहम्मद खालिद महमूद वड़ाइच की अदालत में दायर (दफ़ा 200 के तहत) इस याचिका में उन्होंने कहा कि उन्होंने नासिर हुसैन से अपनी खुशी से निकाह किया है.
उन्होंने कहा, "मुझे किसी ने अगवा नहीं किया. मैंने अपनी मर्ज़ी से शादी की है. मैं अपने माता-पिता के घर से सिर्फ़ तीन कपड़ों में आई हूँ और अपने साथ कोई सामान नहीं लाई."
इस बयान में उन्होंने दावा किया कि "पुलिस मेरे निकाह की वजह से बहुत नाराज़ है, और 5 नवंबर की रात 9 बजे पुलिसकर्मी जबरन हमारे घर में घुस आए. उन्होंने मुझे कहा कि हमारे साथ चलो, लेकिन मेरे मना करने पर वे गुस्सा हो गए."
उन्होंने बताया, "मेरे शोर मचाने पर मोहल्ले वाले भी आ गए, जिन्होंने विनती करके हमें बचाया."
उन्होंने अदालत से गुज़ारिश की थी कि उन्हें और उनके पति को पुलिस से सुरक्षा दी जाए.
सरबजीत के वकील अहमद हसन पाशा के मुताबिक, 8 नवंबर को पंजाब पुलिस ने सरबजीत और नासिर को ढूंढने के लिए उनके घर पर छापा मारा था और उन पर शादी ख़त्म करने का दबाव डाला जा रहा था.
इसलिए अदालत से गुज़ारिश की गई थी कि पुलिस सरबजीत कौर और नासिर हुसैन की शादीशुदा ज़िंदगी में दख़ल न दे.
सुनवाई के बाद लाहौर हाई कोर्ट के जज जस्टिस फ़ारूक़ हैदर ने पंजाब पुलिस को सरबजीत को परेशान करने से रोक दिया था और इस संबंध में आईजी पंजाब को आदेश जारी किए थे.
हालांकि, शेखूपुरा पुलिस के प्रवक्ता राना यूनुस ने बीबीसी उर्दू को बताया था कि पुलिस ने किसी भारतीय महिला या उसके पाकिस्तानी पति को परेशान नहीं किया.
उन्होंने कहा, "जो आरोप लगाए गए हैं, वे हक़ीक़त के बिल्कुल उलट हैं. पुलिस का उनसे कोई लेना-देना नहीं है."
उन्होंने यह भी कहा, "क्योंकि मामला संवेदनशील है, इसलिए अलग-अलग संस्थाएं इसे देख रही हैं, और जो भी फैसला होगा, वह पाकिस्तान के कानून के तहत होगा."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.