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यूक्रेन जिस अनुमति के लिए है परेशान, क्या वो रूस पर पड़ेगी भारी
- Author, फ्रैंक गार्डनर
- पदनाम, बीबीसी सुरक्षा संवाददाता
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
अमेरिका और ब्रिटेन जल्द ही रूस के अंदर हमले करने के लिए यूक्रेन को लंबी दूरी की मिसाइलों के इस्तेमाल की अनुमति दे सकते हैं.
अब तक इस पर प्रतिबंध लगा हुआ था. लेकिन अब इस बात के ठोस संकेत मिल रहे हैं कि यूक्रेन पर लगी ये पाबंदी हट सकती है.
यूक्रेन को लंबी दूरी की मिसाइलें दी गई हैं. लेकिन उसे अपनी ही सीमा में दुश्मनों के ठिकानों के ख़िलाफ़ इनके इस्तेमाल की अनुमति है.
यूक्रेन पिछले कई हफ़्तों से इन प्रतिबंधों को हटाने की मांग कर रहा है ताकि वो रूस के अंदर अपने लक्ष्यों पर हमले कर सके.
स्टॉर्म शैडो मिसाइलें क्या हैं?
सवाल ये है कि आख़िर पश्चिमी देश यूक्रेन को इसकी इज़ाज़त देने से क्यों हिचकिचाते रहे हैं?
यूक्रेन को अगर इन मिसाइलों के रूस के अंदर इस्तेमाल की अनुमति मिली तो ये रूस के साथ उसके युद्ध पर कितना असर डालेगी.
ब्रिटेन और फ़्रांस यूक्रेन को लंबी दूरी की स्टॉर्म शैडो मिसाइलें पहले ही दे चुके हैं.
लेकिन उन्होंने ये शर्त लगाई थी कि यूक्रेन इसका इस्तेमाल सिर्फ़ अपनी सीमा के अंदर के लक्ष्यों को भेदने में ही करेगा.
यूक्रेन को दी गई एंग्लो-फ्रेंच क्रूज मिसाइल स्टॉर्म शैडो अधिकतम 250 किलोमीटर तक मार कर सकती है. फ़्रांसीसी इस मिसाइल को स्कैल्प कहते हैं.
ये एयरक्राफ़्ट से लॉन्च की जाती है. दागी जाने के बाद ये मिसाइल ध्वनि की गति से उड़ती है और भारी विस्फोट करने वाले वॉरहेड्स के फटने के बाद धरती को छू लेती है.
स्टॉर्म शैडो मज़बूत से मज़बूत बंकरों और गोला-बारूद के स्टोर को ध्वस्त करने के लिए काफ़ी मुफ़ीद मानी जाती है.
रूस ने यूक्रेन के ख़िलाफ़ भी ऐसी ही मिसाइलों का इस्तेमाल किया था.
लेकिन ये मिसाइलें काफ़ी महंगी हैं. एक स्टॉर्म शैडो मिसाइल की क़ीमत 10 लाख डॉलर है. इसलिए इनका इस्तेमाल बेहद सोच-समझ कर किया जाता है.
अमूमन इस मिसाइल को दागने से पहले कम क़ीमत वाले ड्रोनों का एक समूह भेजा जाता है ताकि दुश्मन भ्रमित हो जाएं.
ऐसा करके दुश्मन के एयर डिफेंस को थकाया जाता है और फिर इसके बाद ये मिसाइल दागी जाती है. रूस यूक्रेन के ख़िलाफ़ यही करता है.
यूक्रेन ने रूस के ख़िलाफ़ ऐसी मिसाइलों का इस्तेमाल काफ़ी असरदार तरीक़े से किया था.
इनसे सेवास्तापोल में ब्लैक सी स्थित रूस के हेडक्वॉर्टर पर हमले किए गए थे. इन हमलों ने रूसी नौसना के लिए पूरी क्राइमिया को असुरक्षित कर दिया था.
ब्रिटिश आर्मी के पूर्व अधिकारी और सैन्य विश्लेषक जस्टिन क्रंप कहते हैं कि स्टॉर्म शैडो यूक्रेन के लिए काफ़ी असरदार हथियार रहा है.
इसने रूस के क़ब्ज़े वाले इलाक़ों में बेहतरीन सुरक्षा वाले लक्ष्यों पर काफ़ी सटीक हमले किए थे.
वो कहते हैं, ''ये कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि यूक्रेन ने रूस के अंदर इसके इस्तेमाल के लिए लॉबिंग की थी. ख़ासकर उन एयरफील्ड पर हमलों के लिए, जिनका इस्तेमाल उस पर ग्लाइड बम के हमलों के लिए किया जा रहा था. इन हमलों ने अग्रिम चौकियों पर यूक्रेन को आगे बढ़ने से रोक दिया है.''
यूक्रेन चाहता क्या है?
यूक्रेन के शहरों और अग्रिम चौकियों पर इस समय रूस हर रोज़ भारी बमबारी कर रहा है.
रूसी विमानों ने यूक्रेन के सैन्य ठिकानों, फ्लैटों के ब्लॉक्स और अस्पतालों को तबाह करने वाली कई मिसाइलें और ग्लाइड बम फेंके थे.
यूक्रेन का कहना है कि जिन ठिकानों से ये हमले किए गए थे, उन पर हमला करने की अनुमति न देना ठीक उसी तरह है, जैसे किसी को एक हाथ पीठ के पीछे बांध कर लड़ने को कहा जाए.
इस महीने मैं प्राग में ग्लोबलसेक सिक्यॉरिटी फोरम में मौजूद था. वहां भी ये कहा गया गया कि रूसी मिलिटरी एयरबेस यूक्रेनी नागरिकों की तुलना में ज़्यादा सुरक्षित हैं. प्रतिबंधों की वजह से यूक्रेनी नागरिकों को निशाना बनना पड़ रहा है.
यूक्रेन के पास मौलिक, नए प्रयोग करने वाली और लंबी दूरी वाले ड्रोन की अपनी व्यवस्था है. कई बार इन ड्रोन हमलों ने रूसी सेना को चौंकाया है और हमला करते हुए रूस के अंदर सैकड़ों किलोमीटर तक पहुंच गए हैं.
लेकिन वे सिर्फ़ एक छोटा पेलोड ले जाने में सक्षम थे और कई बार उनमें से ज्यादातर को रोक कर गिरा दिया जाता था.
यूक्रेन का कहना है कि रूसी हवाई हमलों का जवाब देने और उन्हें नाकाम करने के लिए उसे स्टॉर्म शैडो और अमेरिकी एटकॉम्स जैसे सिस्टम समेत लंबी दूरी की मिसाइलों की ज़रूरत है. एटकॉम्स सिस्टम की मिसाइलों की रेंज 300 किलोमीटर तक भी है.
पश्चिमी देशों की दुविधा
आख़िर पश्चिमी देश यूक्रेन को अपनी सीमा से बाहर रूसी ठिकानों पर मिसाइल हमलों की अनुमति क्यों नहीं देना चाहते हैं.
इसका एक ही जवाब है और वो यह कि इससे मौजूदा युद्ध और तेज़ हो जाएगा.
अमेरिका की चिंता ये है अब तक पुतिन की रेडलाइन वाली धमकियां भले ही खोखली निकली हों लेकिन यूक्रेन को पश्चिमी देशों की मिसाइलों से रूस के अंदर हमलों की अनुमति दी गई तो वो बदला लेने वाली कार्रवाइयां शुरू कर सकता है.
अमेरिका में इस बात को लेकर चिंता है कि रूसी राष्ट्रपति कार्यालय में मौजूद आक्रामक रुख़ वाले लोग इस बात पर ज़ोर दे सकते हैं कि रूस बदले की कार्रवाई के तौर पर उन ट्रांजिट पॉइंट्स पर हमले करे, जहाँ से ये मिसाइलें यूक्रेन में ले जाई जाएंगीं. जैसे पोलैंड का एयरबेस.
अगर ऐसा हुआ तो नेटो का अनुच्छेद पाँच लागू हो सकता है. इसका मतलब होगा कि रूस और नेटो देशों के बीच युद्ध शुरू हो जाएगा.
यूक्रेन पर 24 फ़रवरी 2022 के हमले के बाद से ही अमेरिका का ये लक्ष्य रहा है कि रूस से सीधे टकराव के बगैर ही यूक्रेन की जितनी मदद हो की जाए.
रूस के साथ सीधा टकराव परमाणु युद्ध का ख़तरा पैदा कर सकता है.
हालांकि यूक्रेन को क्राइमिया और 2022 में अवैध रूप से रूस में मिला लिए गए इलाक़ों पर पश्चिमी मिसाइलों से हमले की अनुमति मिल गई है.
रूस इन्हें अपना हिस्सा मानता है लेकिन अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय उसके इस दावे को नहीं मानते.
क्या स्टॉर्म शैडो मिसाइल से बदल सकती है जंग?
अगर पश्चिमी देशों ने यूक्रेन को रूस के अंदर मार करने वाली लंबी दूरी की मिसाइल के इस्तेमाल की अनुमति दे भी दी तो क्या ये काफ़ी देर से और काफ़ी कम पहलकदमी का मामला हो सकता है, क्योंकि यूक्रेन लंबे समय से इन मिसाइलों को इस्तेमाल करने की अनुमति मांग रहा है.
अब तो रूस ने भी इन हमलों की आशंका को देखते हुए काफ़ी तैयारी कर ली है.
रूस ने बम वर्षकों, मिसाइलों और उनका प्रबंधन करने वाले इन्फ्रास्ट्रक्चर को यूक्रेन की सीमा से दूर हटा लिया है. यानी उन्हें स्टॉर्म शैडो की ज़द से दूर ले जाया गया है.
फिर भी जस्टिन क्रंप का कहना है कि स्टॉर्म शैडो के ख़तरे का सामना करने के लिए रूस ने भले ही कोई नया सिस्टम बनाया हो लेकिन उसके हमले के संभावित दायरे में आने वाले इलाक़े को देखते हुए ऐसा करना कठिन होगा.
इस तरह के हमलों की वजह से रूस के लिए लॉजिस्टिक्स, कमान, एयर सपोर्ट की डिलिवरी मुश्किल हो सकती है.
भले ही रूसी विमान इन मिसाइलों के ख़तरे से बचने के लिए यूक्रेन की सीमाओं से पीछे हट जाएं, फिर भी उन्हें मोर्चे पर इन चीजों की डिलिवरी के लिए हर उड़ान पर काफ़ी ख़र्च करना होगा.
एक रूसी थिंक टैंक में मिलिटरी साइंस के डायरेक्टर मैथ्यू सेविल का मानना है कि यूक्रेन से रूस के भीतर लंबी दूरी की मिसाइल हमले पर लगे प्रतिबंध हटाने के दो फ़ायदे हो सकते हैं.
पहला ये एक और मिसाइल एटैकम्स का इस युद्ध में इस्तेमाल का रास्ता साफ़ कर सकता है.
दूसरा ये कि रूस के सामने ये दुविधा पैदा होगी कि वो अपने अहम एयर डिफेंसिंग की पोजिशनिंग कहां करे.
ये ऐसी स्थिति होगी, जिसमें यूक्रेन के ड्रोन को आगे बढ़ कर हमले का मौक़ा मिल सकता है.
हालांकि आख़िर एक सच ये भी है कि भले ही यूक्रेन को रूस के अंदर स्टॉर्म शैडो के इस्तेमाल की अनुमति मिल जाएगी लेकिन इससे युद्ध के पासा पलटने की संभावना नहीं है.