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'ख़तों से रिहाई मिलती तो जेलें ख़ाली हो जातीं.' इमरान ख़ान पर मोहम्मद हनीफ़ का ब्लॉग
- Author, मोहम्मद हनीफ़
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार और लेखक
- पढ़ने का समय: 4 मिनट
इंटरनेशनल क्रिकेट की दुनिया में करीब 14 बड़े नाम. सभी अनुभवी कप्तान, ग्रेग चैपल, सुनील गावस्कर और क्लाइव लॉयड जैसे नाम शामिल.
इन सभी ने पाकिस्तानी सरकार को चिट्ठी लिखकर कहा है कि इमरान ख़ान एक महान क्रिकेटर थे और अब वह जेल में हैं. सुनने में यह भी आया है कि वह बीमार भी हैं. इंसानियत दिखाएं और उनके साथ अच्छा बर्ताव करें.
इसके साथ यह भी कहा है कि जब क्रिकेट मैच खत्म होता है तो उसके साथ दुश्मनी भी खत्म हो जाती है. इमरान खान एक बेहतरीन क्रिकेटर थे, उनके साथ न्याय होना चाहिए और उनके साथ इंसानों वाला व्यवहार किया जाना चाहिए.
यहीं से यह एतराज़ आया है कि इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, वेस्टइंडीज और भारत के कप्तानों ने तो इस पत्र पर साइन/हस्ताक्षर कर दिए हैं. लेकिन पाकिस्तान के जो कप्तान रहे हैं, जो हमेशा इमरान ख़ान को कभी इमरान भाई, कभी ख़ान साहब और कभी स्किपर-स्किपर कहते हैं, उन्होंने इस पर हस्ताक्षर क्यों नहीं किए.
ताना यह है कि वे हमारी सरकार से डर गए हैं. वसीम अकरम और जावेद मियांदाद जैसे लोग भी आखिरकार पाकिस्तानी ही हैं.
अगर बाकी देश डरा हुआ है, जज डरे हुए हैं, वकील डरे हुए हैं और कई रिटायर्ड जनरल भी डरे हुए हैं तो इन कप्तानों का डर भी जायज़ है.
लेकिन साथ ही उन्हें यह भी समझ होगी कि अगर पाकिस्तान में चिट्ठी लिखकर किसी व्यक्ति को जेल से निकाला जा सकता तो अब तक सभी जेलें खाली हो चुकी होतीं.
रिहाई का 'साइंस' और 'आर्ट'
अगर पाकिस्तान में कोई व्यक्ति जेल चला जाए और वह इमरान ख़ान जैसा नेता भी हो, तो उसे जेल से बाहर निकालना एक साइंस और एक आर्ट भी.
साइंस यह है कि कोर्ट के दरवाज़े खटखटाओ, जजों को कानून समझाओ, उन्हें शर्मिंदा करो और बड़े, ताकतवर, महंगे वकील हायर करो.
इसके साथ ही अमेरिका, सऊदी अरब से सिफारशें डलवाओ और दुआएं भी करते जाओ. यह एक आर्ट भी है और वो ये है कि जिन्होंने व्यक्ति को जेल में डाला है , उन्हें छोटी-मोटी धमकी दो कि पूरी खलकत हमारे कैदी के साथ है और उसने एक दिन जेल तोड़कर उस व्यक्ति को बहार निकाल ही लेना है.
इसके साथ ही, बंद दरवाज़ों के पीछे कुछ डील भी करो. यह वादा करो कि हमारे आदमी को छोड़ दिया जायेगा. वह चुपचाप घर बैठ जाएगा या फिर उसे देश निकाला दे दीजिये. वह दुबई, लंदन में बैठकर अल्लाह-अल्लाह करेगा.
हमारा आदमी छूट जाएगा और आपकी जान भी बच जाएगी. इसी आर्ट के अंदर एक फाइन आर्ट भी होती है. यह आर्ट होता है कि हमारा आदमी बहुत बीमार है. उसे अस्पताल भेजो, अगर अस्पताल भी नहीं भेजें तो हंगामा करो कि अगर हमारा आदमी तुम्हारी जेल में मर गया तो उसका खून तुम्हारे सिर पर आएगा.
हमारे कई बड़े नेता नवाज़ शरीफ़, आसिफ अली ज़रदारी और कई दूसरे लोग इस साइंस और आर्ट को मिलाकर जेल से बाहर निकलते रहे हैं.
अब इमरान ख़ान की पार्टी ने भी पहले साइंस ट्राई किया, वकीलों, जजों और जलसे-जुलूसों वाला साइंस अपनाया , लेकिन वह काम नहीं आया.
जज चुप हैं और कह देते हैं कि हमारी तो जेल वाले भी नहीं सुनते. अब इमरान ख़ान की बीमार वाली आर्ट फिल्म भी चल चुकी है. चार दिन माहौल बना रहा पर हकूमत ने नहीं सुनी.
सरकार का भी यही सोचना होगा कि इस उम्र का इतना फिट इंसान दुनिया में कहीं कोई नहीं है तो वह कितना बीमार होगा. ऊपर से इमरान ख़ान की पार्टी में राजनीतिक कार्यकर्ता कम हैं और आशिक़ ज़्यादा हैं. या तो वे रोते हैं, या वे कोसते हैं, या फिर दुआ मांगते हैं. लेकिन उनकी दुआ कबूल नहीं हो रही हैं और वे एक-दूसरे को कोसने लगते हैं.
एक प्रेमी से पूछा गया कि अगर तुम सच्चे प्रेमी हो तो सबसे पहले इमरान ख़ान को जेल से बाहर तो निकलवाओ. अगर कोई डील भी करनी पड़ी तो ख़ान बाहर आ कर खुद ही इनसे निपट लेगा.
वे कहते हैं - नहीं, हमारा खान मरता मर जाए पर हम उसे डील नहीं करने देंगे.
यहाँ जब शासक इतने ताक़तवर हों और प्रेमी भी इतने ताक़तवर हों कि वे अपने प्यार में अपनी प्रेमिका की जान कुर्बान करने को तैयार हों. ऐसे में जेलों के ताले खोलने के लिए साइंस भी कोई बड़ी ही ढूंढ़नी पड़ेगी और आर्ट भी कोई नई सीखनी पड़ेगी.
रब्ब राखा
(ये लेखक के निजी विचार हैं)
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.