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जंग के बीच ईरान सरकार समर्थक रैलियों से क्या हासिल करना चाहता है?
- Author, बीबीसी मॉनिटरिंग
- पदनाम, .
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
ईरान का सरकारी मीडिया इस्लामी रिपब्लिक और सशस्त्र बलों का समर्थन करने वाली झंडे लहराती भीड़ के साथ हो रही बड़ी रैलियों का प्रसारण कर रहा है.
इन रैलियों में आयतुल्ला अली ख़ामेनेई के निधन पर शोक व्यक्त किया जा रहा है और उनकी मृत्यु का बदला लेने की कसमें खाई जा रही हैं.
ईरानी अधिकारियों ने राष्ट्रीय सुरक्षा को ख़तरे में डालने वाली किसी भी गतिविधि के ख़िलाफ़ चेतावनी जारी की है.
रैलियाँ ये दिखाने के लिए की जा रही हैं कि ईरान के भीतर सब ठीक है और लोगों का मौजूदा सरकार को पूरा समर्थन है. साथ ही इनके ज़रिए सत्तापक्ष सड़कों पर अपना दबदबा बनाकर विपक्ष की विरोध प्रदर्शन करने की क्षमता को सीमित कर रहा है .
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28 फ़रवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से, ईरानी सरकारी मीडिया तेहरान और देश के बाक़ी शहरों में शाम के समय आयोजित होने वाली सत्ता समर्थक रैलियों के व्यापक फुटेज प्रसारित कर रहा है.
इन रैलियों में लोग ईरान का झंडा लिए हुए, इस्लामी गणराज्य के समर्थन में नारे लगाते और सशस्त्र बलों के प्रति समर्थन व्यक्त करते हुए दिखाई देते हैं.
संघर्ष के पहले दिन अमेरिका-इसराइल के हमले में मारे गए सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली ख़ामेनेई के निधन पर शोक व्यक्त करना और उनकी मौत का बदला लेने की कसम खाना इन रैलियों का मुख्य विषय रहा है.
ईरानी अधिकारियों ने बयान जारी कर देश भर की मस्जिदों और प्रमुख चौकों पर लोगों को इकट्ठा होने का आह्वान किया है. ये रैलियाँ रमज़ान के महीने में हो रही हैं, जब लोग आमतौर पर सामूहिक धार्मिक समारोहों के लिए एक साथ आते हैं.
युद्ध में मारे गए लोगों के अंतिम संस्कार में भी भारी भीड़ सड़कों पर उमड़ रही है. इसके अलावा, अली ख़ामेनेई के दूसरे बेटे मोजतबा ख़ामेनेई को नए सर्वोच्च नेता बनाए जाने के बाद नौ मार्च को सरकार समर्थित रैलियाँ हुईं.
ये रैलियाँ देश और विदेश में बढ़ते तनाव के बीच हो रही हैं.
ईरानी अधिकारियों ने बार-बार चेतावनी दी है कि वे जंग के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा मानी जाने वाली गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेंगे. ईरान ने विदेशी शक्तियों पर देश को अस्थिर करने के लिए स्थिति का फायदा उठाने का आरोप भी लगाया है.
क्या है ईरानी अधिकारियों की चिंता?
ईरानी अधिकारियों ने आशंका जताई है कि विदेशी ताक़तें इस संघर्ष का इस्तेमाल अशांति फैलाने के लिए कर सकती हैं.
एक मार्च को दिए एक साक्षात्कार में, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी ने कहा कि उनके अधिकारी अमेरिका और इसराइल की ओर से ईरान को कमजोर और विभाजित करने की कोशिशों से अवगत हैं.
लारीजानी ने तर्क दिया कि जनवरी में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान अपने लक्ष्यों को हासिल करने में विफल रहने के बाद ईरान के "दुश्मन" अशांति फैलाने की कोशिश कर सकते हैं. ऐसी चेतावनियों के साथ-साथ बार-बार यह भी कहा गया है कि ईरानी शासन किसी भी संभावित सुरक्षा ख़तरे के ख़िलाफ़ कड़ा कदम उठाएगा.
उधर ईरान के विपक्षी और विदेशी नेताओं ने भी अपनी-अपनी अपीलें जारी की हैं.
ईरान के पूर्व शाह के निर्वासित पुत्र रज़ा पहलवी ने 28 फरवरी को ईरानियों से सतर्क रहने और सही वक़्त पर सड़कों पर लौटने के लिए तैयार रहने का आह्वान किया. उन्होंने इस्लामी रिपब्लिक पर "आख़िरी जीत" की भविष्यवाणी की.
इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने भी एक्स पर फ़ारसी भाषा में और जाहिर तौर पर एआई की मदद से एक वीडियो संदेश पोस्ट किया. इस वीडियो में उन्होंने ईरानियों से 'अत्याचार की जंज़ीरों से खुद को मुक्त करने' और 'इस अवसर को हाथ से न जाने देने' की अपील की.
ईरान पर शुरुआती हमलों के बाद अपने संदेश में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरानी ख़तरे को ख़त्म करने के लिए एक बड़ा अभियान चला रहा है. उन्होंने भी ईरान में सत्ता परिवर्तन का आह्वान किया.
ट्रंप ने ईरानियों से कहा, "जब हम अपना काम पूरा कर लेंगे, तो आप सरकार पर क़ब्ज़ा कर लेना. यह पूरी तरह से आपकी होगी. शायद कई पीढ़ियों बाद आपको ये एकमात्र मौका मिला है."
अधिकारी जनसमर्थन कैसे जुटा रहे हैं?
इन रैलियों का एक मकसद ये दिखाना भी है कि ईरान की सरकार को व्यापक जनसमर्थन हासिल है.
झंडे लहराते और सशस्त्र बलों के प्रति समर्थन व्यक्त करते विशाल जनसमूह की तस्वीरें सरकार को युद्ध के बीच राजनीतिक रूप से स्थिर दिखाने में मददगार होती हैं.
देश के भीतर, इस तरह के प्रदर्शनों का उद्देश्य इस धारणा को मजबूत करना है कि विपक्ष समाज के केवल एक सीमित वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है. ऐसी रैलियाँ विदेशों में संकेत देती हैं कि जंग के बावजूद ईरान में अस्थिरता उत्पन्न होने की संभावना नहीं है.
ईरान की सियासत में लंबे समय से सरकार समर्थित बड़ी रैलियों का ख़ास महत्व रहा है.
ईरानी अधिकारी अक्सर 1979 की इस्लामी क्रांति की याद में आयोजित वार्षिक रैलियों में भारी जनसमूह की मौजूदगी को मौजूदा सरकार की वैधता के सबूत के रूप में पेश करते रहे हैं.
इसी तरह, 2020 में कुद्स फोर्स के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद निकाले गए जुलूसों को बाहरी खतरों के सामने राष्ट्रीय एकता के प्रदर्शन और इस्लामी रिपब्लिक के लिए जनमत संग्रह के रूप में दिखाया गया था.
रैलियां कैसे आयोजित की जाती हैं?
सरकारी रैलियों से अधिकारियों को तेहरान के सार्वजनिक स्थानों पर अपना दबदबा कायम करने का मौका मिलता है. इससे विपक्षी समूहों के लिए उन्हीं जगहों पर इकट्ठा होना मुश्किल हो जाता है.
इन रैलियों में सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी सरकार विरोधी प्रदर्शनों में शामिल होने पर विचार करने वाले लोगों को हतोत्साहित करती है. इसके अलावा टकराव और गिरफ्तारी का डर भी विरोध को और सीमित करता है.
पहले की अशांतियों के दौरान भी इसी तरह के उपाय देखे गए थे, जब विरोध प्रदर्शनों के बाद सत्ता समर्थक सभाएँ हुई थीं. इससे पहले भी सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद सत्ता की हिमायत में रैलियाँ हुई हैं.
इसका एक हालिया उदाहरण फ़रवरी में कई ईरानी विश्वविद्यालयों में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान देखने को मिला. तब कैंपसों के भीतर सत्ता विरोधी छात्रों का सामना बासिज अर्धसैनिक बल के सदस्यों और कट्टरपंथी छात्र समूहों से हुआ.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.