पाकिस्तान का यूएई का अरबों का कर्ज़ लौटाने का फ़ैसला, सऊदी अरब से क्या है कनेक्शन

    • Author, तनवीर मलिक
    • पदनाम, बीबीसी उर्दू
  • पढ़ने का समय: 6 मिनट

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को साढ़े तीन अरब डॉलर के वित्तीय डिपॉज़िट्स की वापसी के एलान के बाद पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगज़ेब ने कहा है कि सऊदी अरब से कर्ज़ लेने सहित 'सभी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है'.

वॉशिंगटन में मौजूद पाकिस्तानी वित्त मंत्री ने, समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि पाकिस्तान अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मज़बूत करने के लिए यूरो बॉन्ड्स और अन्य देशों, वित्तीय संस्थानों तथा वाणिज्यिक बैंकों से कर्ज़ लेने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है.

इस इंटरव्यू में उन्होंने ज़ोर दिया कि मध्य पूर्व में युद्ध के असर को देखते हुए पाकिस्तान को रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बनाने होंगे और अक्षय ऊर्जा की ओर बढ़ना होगा.

जब उनसे पूछा गया कि क्या पाकिस्तानी सरकार यूएई को डिपॉज़िट्स लौटाने के बाद सऊदी अरब से कर्ज़ लेने पर बातचीत कर रही है, तो वित्त मंत्री ने कहा कि 'सभी विकल्पों पर विचार हो रहा है'.

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अप्रैल की शुरुआत में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने यूएई के वित्तीय डिपॉज़िट्स की वापसी की पुष्टि की थी और इसे 'सामान्य वित्तीय लेन-देन' बताया था.

इस साल जारी किए जाएंगे यूरो बॉंड

ग़ौरतलब है कि पिछले शनिवार को इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता से पहले, शुक्रवार की रात सऊदी वित्त मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुल्ला अल-जदआन ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ से मुलाक़ात की थी.

अगले ही दिन, शनिवार को, सऊदी रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की कि पाकिस्तान से एक सैन्य दल पूर्वी क्षेत्र में स्थित शाह अब्दुल अज़ीज़ हवाई अड्डे पर पहुंचा है, जिसमें पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू और सहायक विमान शामिल हैं.

इसी दौरान मोहम्मद औरंगज़ेब ने आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक की सालाना बैठक के अवसर पर कहा कि पाकिस्तान अपने सभी कर्ज़ों को चुकाने की क्षमता रखता है.

उनका कहना था कि विदेशी मुद्रा भंडार इस समय भी लगभग 2.8 महीने के आयात के बराबर है. उनके अनुसार इस स्तर को बनाए रखना भविष्य में समग्र आर्थिक स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण पहलू होगा.

औरंगज़ेब ने कहा कि सरकार यूरो बॉन्ड, इस्लामिक सुकोक और डॉलर में तय किए गए, रुपये से जुड़े बॉन्ड्स जारी करने पर विचार कर रही है.

उन्होंने उम्मीद जताई कि इस साल यूरो बॉन्ड जारी किए जाएंगे और इसके साथ-साथ वाणिज्यिक कर्ज़ों की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है.

पाकिस्तान ने यूएई को 3.5 अरब डॉलर क्यों लौटाए?

इससे पहले पाकिस्तान ने पुष्टि की थी कि समझौते के अनुसार स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान मैच्योर होने वाले डिपॉज़िट्स यूएई को लौटा रहा है, जो एक सामान्य वित्तीय लेन-देन है.

प्रवक्ता ने स्पष्ट किया था कि पाकिस्तान और यूएई के बीच लंबे समय से भाईचारे पर आधारित संबंध हैं, जो व्यापार, निवेश, रक्षा और जनसंपर्क पर टिके हैं और समय के साथ और मज़बूत हुए हैं.

विदेश मंत्रालय के बयान से पहले, पाकिस्तान द्वारा यूएई से लिए गए डिपॉज़िट्स और कर्ज़ लौटाने के बारे में पारंपरिक और सोशल मीडिया पर ख़बरें सामने आई थीं.

विदेश मंत्रालय की औपचारिक पुष्टि के बाद यह साफ हो गया था कि पाकिस्तान यूएई को डिपॉज़िट्स लौटा रहा है.

पाकिस्तान को यूएई ने कितने डिपॉज़िट्स दिए थे और उनकी अचानक वापसी का पाकिस्तान सरकार का फ़ैसला क्या क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक हालातों से जुड़ा है या यह पहले से तय था?

बीबीसी ने इस बारे में विशेषज्ञों से बात कर इसकी पड़ताल करने की कोशिश की.

पाकिस्तान के पास यूएई के कितने डिपॉज़िट्स हैं?

पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार इस समय लगभग 21 अरब डॉलर हैं, जिनमें से 16 अरब डॉलर स्टेट बैंक ऑफ़ पाकिस्तान और पांच अरब डॉलर वाणिज्यिक बैंकों के पास हैं. केंद्रीय बैंक के पास मौजूद 16 अरब डॉलर में से 12 अरब डॉलर के डिपॉज़िट्स चीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के हैं, ताकि पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर रखा जा सके.

इन डिपॉज़िट्स में से दो अरब डॉलर संयुक्त अरब अमीरात ने पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में रखवाए थे. इसके अलावा यूएई ने पाकिस्तान को डेढ़ अरब डॉलर का कर्ज़ भी दिया था, जिसमें से 45 करोड़ डॉलर का कर्ज़ पिछली सदी के नब्बे के दशक में पाकिस्तान को दिया गया था. इस तरह कुल मिलाकर पाकिस्तान के पास यूएई का लगभग साढ़े तीन अरब डॉलर का कर्ज़ है.

यूएई के डिपॉज़िट्स कब रोल ओवर हुए?

संयुक्त अरब अमीरात ने पाकिस्तान को वर्ष 2018 में दो अरब डॉलर के डिपॉज़िट्स दिए थे, जो पिछले आठ साल से पाकिस्तान के पास मौजूद हैं और कई बार रोल ओवर किए गए हैं. हालांकि, पिछले साल दिसंबर में इसे वार्षिक आधार पर रोल ओवर करने के बजाय यूएई ने इसे अल्पकालिक आधार पर करने पर सहमति जताई.

इसी साल फरवरी में यूएई की ओर से दो अरब डॉलर को दो महीनों के लिए रोल ओवर किया गया था, जिसकी अवधि अप्रैल में पूरी हो रही है और अब पाकिस्तान की ओर से इसे वापस करने का निर्णय लिया गया है.

पर्दे के पीछे क्या वजहें हैं?

पाकिस्तान की ओर से संयुक्त अरब अमीरात को दो अरब डॉलर के डिपॉज़िट्स लौटाने का फ़ैसला उस समय आया जब मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका और इसराइल के बीच अस्थायी युद्ध चल रहा था, जिसने खाड़ी देशों को भी अपनी चपेट में ले लिया था, जिनमें यूएई भी शामिल है.

ऐसे समय में यूएई को दो अरब डॉलर लौटाने के बारे में भू-राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ ज़ाहिद हुसैन ने बीबीसी को बताया था कि इसका भू-राजनीतिक हालात से कोई संबंध नहीं है, बल्कि इसकी वापसी का अपना एक संदर्भ है.

उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान ने इन डिपॉज़िट्स पर ऊंची ब्याज दर को कम करने के लिए भी कहा था और साथ ही रोल ओवर करने की मांग की थी, लेकिन यूएई ने इसे अल्पकालिक आधार पर रोल ओवर करना शुरू कर दिया. उन्होंने इस धारणा को खारिज किया था कि यह सब अचानक हुआ और यूएई ने इसकी वापसी की मांग की.

ज़ाहिद हुसैन ने कहा था कि इन डिपॉज़िट्स पर ब्याज दर बहुत अधिक है, इसी वजह से यह निर्णय लिया गया कि इन्हें वापस कर दिया जाए.

आर्थिक मामलों के वरिष्ठ पत्रकार मेहताब हैदर का कहना था कि अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन यूएई के डिपॉज़िट्स की वापसी का कहीं न कहीं संबंध क्षेत्र की भू-राजनीतिक परिस्थितियों से बनता है. उन्होंने कहा था कि ऐसी चीज़ें साफ़ तौर पर सामने नहीं आतीं, लेकिन वे कहीं न कहीं मौजूद रहती हैं.

यूएई को डिपॉज़िट्स की वापसी से पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर क्या असर पड़ेगा?

पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा भंडार की क्षमता बहुत अधिक नहीं है.

केंद्रीय बैंक के पास मौजूद 16 अरब डॉलर में से 12 अरब डॉलर चीन, सऊदी अरब और यूएई के डिपॉज़िट्स हैं.

सरकार की ओर से यूएई को दो अरब डॉलर के डिपॉज़िट्स लौटाने के बाद पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर इसके असर के बारे में मेहताब हैदर का कहना है कि निश्चित रूप से दो अरब डॉलर निकलने से कुछ असर तो पड़ेगा, लेकिन कुछ ही हफ्तों में पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से 1.2 अरब डॉलर की किस्त मिल जाएगी, जो विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर रखने में मदद करेगी.

उन्होंने कहा कि इसके अलावा सरकार कुछ अन्य स्रोतों से भी विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने की सोच रही है. उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने इस सिलसिले में सऊदी अरब को भी शामिल किया है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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