'और भी अमेरिकियों की जानें जाएंगी', डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, मध्य पूर्व में बढ़ रहे हैं ईरान के हमले

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ईरान पर अमेरिका और इसराइल के सैन्य हमलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि 'जब तक सारे लक्ष्य हासिल नहीं हो जाते, अमेरिका के हमले जारी रहेंगे.'
उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा, "हमारा सैन्य अभियान पूरी ताकत के साथ जारी है. दुर्भाग्य से संभव है कि और अमेरिकी लोगों की जानें जाएं."
उन्होंने ये भी कहा, "लड़ाई में ऐसा ही होता है."
डोनाल्ड ट्रंप ने ये भी कहा, "जिन लोगों ने पूरी मानव सभ्यता के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ा है अमेरिका उन आतंकवादियों को सबसे कड़ी सज़ा देगा और जिन बेगुनाहों की जानें गई हैं उनकी मौत का बदला लेगा."
ट्रंप ने आगे चेतावनी देते हुए कहा, "मैं एक बार फिर रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और ईरानी सैन्य पुलिस से आग्रह करता हूं कि वो हमले रोक दें और महफ़ूज़ रहें. वर्ना आने वाली मौत के लिए तैयार रहें."
ट्रंप ने कहा कि ईरान में सत्ता परिवर्तन ज़रूरी है और इसके लिए उन्होंने ईरान की जनता से अपील की.
उन्होंने कहा, "वो सभी ईरानी देशभक्त जो आज़ाद होना चाहते हैं उनसे मैं आग्रह करता हूं कि इस मौक़े पर साहस दिखाएं, वीर बनें और अपना देश वापस ले लें. अमेरिका आपके साथ है."
वहीं ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी ने एक संयुक्त बयान जारी कर ईरान की मध्य पूर्व के देशों पर लगातार हमलों के लिए आलोचना की.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैन्युअल मैक्रों, और जर्मनी के चांसल फ़्रीड्रिक मर्त्ज़ ने कहा कि वे मध्य पूर्व में अपने हितों की रक्षा के लिए ज़रूरी कदम उठाने को तैयार हैं.

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इससे पहले एक फैक्ट शीट में यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने कहा कि ऑपरेशन 'एपिक फ़्यूरी' के पहले 24 घंटों में ईरान के 1,000 से ज़्यादा ठिकानों पर हमला किया गया.
अमेरिका, ईरान के ख़िलाफ़ जो अभियान चला रहा है उसे ऑपरेशन 'एपिक फ़्यूरी' कहा जा रहा है.
बयान में इस अभियान में इस्तेमाल की गई अमेरिकी सैन्य क्षमताओं का भी उल्लेख किया गया, जिनमें स्टील्थ बमवर्षक विमान, ड्रोन, लड़ाकू जेट और एंटी-मिसाइल सिस्टम शामिल थे.
जिन ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया गया, उनमें कमांड और कंट्रोल सेंटर, बैलिस्टिक मिसाइल ठिकाने, और ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) का संयुक्त मुख्यालय शामिल था.
क्या दबाव में आ सकता है अमेरिका?
एंथनी जर्चर, बीबीसी संवाददाता
इस बीच अमेरिका रक्षा विभाग के हेडक्वार्टर पेंटागन ने माना है कि ईरान के जवाबी हमलों में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है.
विशेषज्ञों ने माना है कि ट्रंप का ये कहना कि इस ऑपरेशन में 'और अमेरिकियों की मौत हो सकती है', एक ख़राब रणनीति साबित हो सकती है.
ट्रंप ने इससे पहले भी एक इंटरव्यू में कहा था कि 'हमें आशंका है कि इस अभियान में हमारी ओर से भी मौतें हो सकती हैं लेकिन अंत में ये मिशन पूरी दुनिया के हित में होगा.'
लेकिन अगर ईरानी कार्रवाई में अमेरिकी सैनिकों की मौत की संख्या में इज़ाफ़ा होता है तो ट्रंप का ये बयान उनके लिए बैकफ़ायर साबित हो सकता है.
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने 2003 में इराक़ वॉर के दौरान एक एयरक्राफ़्ट कैरियर के डेक से 'मिशन अकॉम्प्लिश्ड' नाम से जो मशहूर भाषण दिया था वो इस बात का साफ़ उदाहरण है कि कैसे शब्द और तस्वीरें बदलती परिस्थितियों में आपकी कमज़ोरी बन सकते हैं.
फ़िलहाल ईरान पर अमेरिकी बमबारी जारी है लेकिन अमेरिका के अंदर ज़िंदगी सामान्य गति से चल रही है.
लेकिन आने वाले समय में परिस्थितियां बदल भी सकती हैं.
मध्य-पूर्व में ईरान के हमले

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बीबीसी संवाददाता फ़्रैंक गार्डनर ने बताया कि अबू धाबीू में ईरान के हमलों के बाद आसमान में धुएं के बादल देखे गए. ईरान की ओर से लगातार दागी जा रही बैलिस्टिक मिसाइलों की वजह से ऐसा हुआ.
रविवार दोपहर तक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने अब तक 165 बैलिस्टिक मिसाइलों, दो क्रूज़ मिसाइलों और 541 ईरानी ड्रोन को नष्ट कर दिया है.
वहीं इसराइल डिफ़ेंस फ़ोर्सेस (आईडीएफ़) ने कहा है कि उसने इसराइल की ओर दागे गए प्रोजेक्टाइल हमलों के जवाब में पूरे लेबनान में हिज़्बुल्लाह से जुड़े ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए हैं.
एक बयान में इसराइली सेना ने हिज़्बुल्लाह पर ईरान की ओर से कार्रवाई करने और इसराइली नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया.
आईडीएफ ने कहा कि वह समूह के "अभियान में शामिल होने के फैसले" के खिलाफ कार्रवाई करेगा और हिज़्बुल्लाह को उत्तरी इसराइल के लिए खतरा बनने की अनुमति नहीं देगा.
लेबनान के प्रधानमंत्री नवफ़ सलाम ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक बयान जारी कर दक्षिणी लेबनान से रॉकेट दागे जाने के खिलाफ चेतावनी दी है.
उन्होंने कहा, "चाहे इसके पीछे कोई भी हो, दक्षिणी लेबनान से रॉकेट दागना एक गैर-ज़िम्मेदाराना और संदिग्ध कृत्य है, जो लेबनान की सुरक्षा और स्थिरता को खतरे में डालता है और इसराइल को अपने हमले जारी रखने का बहाना देता है."
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