इमरान की क़ीमत सात करोड़

- Author, कोमल नाहटा
- पदनाम, वरिष्ठ फ़िल्म समीक्षक
इमरान खान ने लक में काम करने के लिए कितने रुपए लिए- एक करोड़? दो करोड़? नहीं पूरे सात करोड़ रुपए. इमरान ने ये फ़िल्म उनकी पहली फ़िल्म ''जाने तू या जाने न'' रिलीज़ होने से पहले साइन की थी.
दरअसल फ़ीस तो एक करोड़ रुपए ही तय हुई थी लेकिन उस समय ये भी तय हुआ था कि अगर जाने तू या जाने न हिट साबित होती है तो उनकी फ़ीस बढ़ाई जाएगी.
तब ये भी तय हुआ था कि निर्माता श्री अष्टविनायक सिने विज़न इस फ़िल्म को 40 करोड़ रुपए में बेचेंगे. लेकिन जब जाने तू हिट हो गई तो तब श्री अष्टविनायक ने 40 की जगह इस फ़िल्म को इंडियन फ़िल्म कंपनी को 54 करोड़ रुपए में बेचा. इस वजह से इमरान नाराज़ हो गए.
ये नाराज़गी इमरान ने फ़िल्म के रिलीज़ के कुछ दिनों पहले निकाली जब उन्होंने श्री अष्टविनायक से छह करोड़ रुपए की और माँग की.
उनका कहना है कि 14 करोड़ रुपए श्री अष्टविनायक ने इमरान के नाम की वजह से कमाए हैं इसलिए उन्हें भी इसमें हिस्सा मिलना चाहिए. श्री अष्टविनायक को इमरान की बात माननी पड़ी.
ऑस्कर में दिल्ली-6
अभी तक फ़िल्म फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया को ऑस्कर में विदेशी भाषा श्रेणी ( सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म वर्ग ) में नामांकन के वास्ते सिर्फ़ एक फ़िल्म की अर्ज़ी मिली है और वो है राकेश ओमप्रकाश मेहरा की ''दिल्ली 6''.
फ़िल्म भले ही बॉक्स ऑफ़िस पर पिट गई हो पर मगर इससे मेहरा को फ़िल्म को ऑस्कर में नामांकन के लिए भेजने से कोई नहीं रोक सकता.
ज़ाहिर है, धीरे-धीरे और भी फ़िल्मों की अर्ज़ियाँ आएंगी और समिति तय करेगी कि ऑस्कर के लिए ''दिल्ली 6'' जाएगी या कोई और.
लेखक का कमाल

लेखक रूमी जाफ़री भले ही निर्देशक बन चुके हैं लेकिन वो आज भी पहले लेखक और बाद में कुछ और हैं. उनकी फ़िल्म लाइफ़ पार्टनर 14 अगस्त को विशाल भारद्वाज की कमीने के साथ रिलीज़ हो रही है.
क्योंकि कमीने का बोल-बाला ज़्यादा है, इसलिए इंडस्ट्री के सारे लोग रूमी को पूछते हैं कि वो अपनी फ़िल्म को कमीने के सामने क्यों रिलीज़ कर रहे हैं.
पता है उसका जवाब रूमी क्या देते हैं? वे कहते हैं, मैं लाइफ़ पार्टनर को इस फ़िल्म के साथ ला रहा हूँ क्योंकि मैं दुनिया को बताना चाहता हूँ कि इस इंडस्ट्री में सिर्फ़ कमीने नहीं है. समझ गए? कहा ना लेखक हैं इसलिए शब्दों में तो रूमी को कोई हरा नहीं सकता.
सलमान के दीवाने

अगर आप सोच रहे हैं कि पिछले साल की फ़्लॉप फ़िल्मों युवराज, गॉड तुसी ग्रेट हो के बाद सलमान खान मायूस हैं तो आप ग़लत हैं.
उनकी आने वाली फ़िल्म वॉन्टेड का ट्रेलर ट्रायल के तौर पर 26 जुलाई को इंदौर और कोलकाता के सिनेमाघरों में दिखाया गया. दोनों शहरों की जनता मानो दीवानी हो गई.
पूरे एक मिनट के ट्रेलर में सीटियों और तालियों की आवाज़ सिनेमाहॉल में गूँज रही थी. लगता है आख़िर सलमान की फ़िल्म को भी शाहरुख़, आमिर और अक्षय कुमार की फ़िल्मों की तरह हंगामेदार ओपनिंग मिल ही जाएगी.
60 के दशक का बॉम्बे
एकता कपूर टेलीवीज़न से थोड़ा खाली हुईं मगर इसका मतलब ये नहीं कि वो घर बैठी हैं. उन्होंने अजय देवगन और इमरान हाशमी के साथ वंस अपॉन ए टाइम इन मुंबई शुरु कर दी है.
ये फ़िल्म मिलन लुथरिया के निर्देशन में बनाई जा रही है. मिलन कच्चे धागे, टेक्सी नंबर 9 2 11 बना चुके हैं.
ये कहानी 1960 की है इसलिए इसमें उस समय का बॉम्बे शहर दिखाया जाएगा. इसके लिए एकता कपूर विज़ुअल इफेक्ट पर लाखों खर्च कर रही हैं.
आमिर को नहीं आता..

मानो या न मानो मगर आज तक आमिर खान को सेंसर प्रमाण पत्र पढ़ना नहीं आता. हर फ़िल्म की शुरुआत में सेंसर प्रमाणपत्र दिखाया जाता है.
लोग इसमें फ़िल्म का वर्ग( एडल्ट, यूनिवर्सल या यूए) और लंबाई फटाफट पढ़ लेते हैं- ये जानने के लिए कि फ़िल्म कितने घंटे की है.
मगर हमारे परफ़ेक्शनिस्ट आमिर खान को इंडस्ट्री में 25 साल हो गए लेकिन फिर भी सेंसर सर्टिफ़िकेट में ये दोनों चीज़ें पढ़नी नहीं आती हैं. जब तक वो एक चीज़ पढ़ते हैं तब तक प्रमाणपत्र स्क्रीन से हट जाता है. चलो कुछ तो है जो आमिर को भी नहीं आता.
































