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'रफ़ाल सौदे में ग़ायब है मेक इन इंडिया'
कांग्रेस ने लड़ाकू विमान रफ़ाल के सौदे पर कई सवाल खड़े किए हैं.
पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी ने रफ़ाल सौदे पर सवाल उठाते हुए कहा है कि मोदी सरकार ने देश की सुरक्षा ज़रूरतों और महत्वाकांक्षी योजना 'मेक इन इंडिया' को ताक पर रख कर यह सौदा किया है.
एंटनी ने कहा, "इस समझौते में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का कोई प्रावधान नहीं होना भारत को काफी महंगा पड़ेगा."
नरेंद्र मोदी सरकार ने शुक्रवार को ही फ्रांस के साथ 59,000 करोड़ रुपए के रफ़ाल सौदे पर हस्ताक्षर किए थे.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, एंटनी ने अफ़सोस जताया कि मूल समझौते में 'मेक इन इंडिया' की अवधारणा थी जबकि मौजूदा सौदे में इसे हटा दिया गया है.
उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि इस समझौते की मूल योजना में 126 विमानों को हासिल करना था. अब सिर्फ 36 विमान हासिल किए जा रहे हैं.
एंटनी ने कहा, ''हमने 126 विमान खरीदने की योजना बनाई थी ताकि वायुसेना को मजबूत बनाया जाए. देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए खुद वायुसेना मानती है कि न्यूनतम परिचालन क्षमता के लिए इतने विमानों की आवश्यकता है लेकिन मोदी सरकार ने केवल 36 विमान खरीदने का सौदा किया है,क्या यह काफी है? ''
भारत ने फ्रांस के साथ 36 रफ़ाल विमानों के लिए 7.87 अरब यूरो (करीब 59000 करोड रुपये) के सौदे पर हस्ताक्षर किए हैं.
ये लडाकू विमान नवीनतम मिसाइल और शस्त्र प्रणालियों से लैस हैं.
इसमें भारत के हिसाब से परिवर्तन किये गए हैं.
पूर्व रक्षा मंत्री एंटनी ने फ्रांस के साथ किए अंतर- सरकारी समझौते को सार्वजनिक किए जाने की भी मांग की है.