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भारत में जेलब्रेक: दो साल में 185 क़ैदी फ़रार
- Author, नितिन श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पंजाब में पटियाला के क़रीब नाभा जेल से हथियारबंद हमलावरों की मदद से फ़रार हुए छह क़ैदियों के मामले के बाद भारतीय जेलों से क़ैदियों के फ़रार होने पर फिर ध्यान केंद्रित हुआ है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ ख़ालिस्तान लिबरेशन फ़्रंट के प्रमुख और 10 मामलों में अभियुक्त हरमिंदर मंटू भी फ़रार हुए लोगों में शामिल हैं.
पंजाब के जेल मंत्री सोहन सिंह थंडवाल ने कहा, ''कुछ लोग पुलिस वर्दी में आए और चार-पांच क़ैदियों से साथ फ़रार हो गए.''
कुछ हफ़्ते पहले भोपाल की हाई सिक्योरिटी जेल से स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ इंडिया (सिमी) के आठ सदस्य फ़रार हो गए थे. बाद में पुलिस ने एक मुठभेड़ में इन सभी के मारे जाने का दावा किया था.
इतने कम वक़्त में भारत की दो हाई सिक्योरिटी जेल से क़ैदियों के फ़रार होने की इन घटनाओं से सुरक्षा सेवाओं की चिंता बढ़ी है.
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े इशारा कर रहे हैं कि जेल तोड़ने की घटनाओं में इज़ाफ़ा हो रहा है. पिछले दो साल के आंकड़ों पर एक नज़र:
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