You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
दस साल में 'आम से ख़ास' हो गए गायत्री
- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, लखनऊ से बीबीसी हिंदी के लिए
अखिलेश सरकार में कई विभागों में मंत्री रहे गायत्री प्रजापति उस सरकार के सबसे चर्चित मंत्रियों में से एक थे. न सिर्फ़ अपने विभागों की कार्यप्रणाली को लेकर बल्कि यादव परिवार में उठे विवाद के तमाम कारणों में से एक ये भी थे.
यूं तो गुरुवार को लखनऊ पुलिस ने उन्हें गैंगरेप के एक कथित मामले में गिरफ़्तार किया गया है लेकिन उनकी चर्चा अचानक अमीर बनने और अथाह संपत्ति जुटाने की वजह से पिछले कई सालों से है.
2002 तक ग़रीबी रेखा के नीचे थे प्रजापति
गायत्री प्रजापति अमेठी के रहने वाले हैं और अमेठी विधानसभा सीट से ही उन्होंने 2012 में पिछला विधानसभा चुनाव जीता था. चूंकि उस वक़्त समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन नहीं था और अमेठी सीट कांग्रेस के गढ़ के रूप में जानी जाती थी इसलिए इस जीत का ईनाम गायत्री प्रजापति को पहली बार विधायक बनने के बावजूद राज्यमंत्री के रूप में दिया गया.
गायत्री प्रजापति को क़रीब से जानने वाले बताते हैं कि वो एक ग़रीब परिवार से आते हैं और साल 2002 तक स्थिति ये थी कि वो बीपीएल कार्ड धारक थे यानी ग़रीबी की रेखा से नीचे आते थे.
मुलायम परिवार से बढ़ीं नज़दीकियां
अमेठी के पत्रकार योगेंद्र श्रीवास्तव बताते हैं, "साल 2002 में गायत्री प्रजापति ने विधायक का चुनाव लड़ने के लिए जो हलफ़नामा दिया था, उसमें उनकी कुल संपत्ति महज़ कुछ हज़ार रुपये बताई गई थी. राजनीति में आने से पहले वो ठेकेदारी और प्रॉपर्टी डीलिंग जैसे काम किया करते थे लेकिन धीरे-धीरे वो समाजवादी पार्टी के संपर्क में आए. किन्हीं वजहों से मुलायम परिवार से उनकी नज़दीकी बढ़ी और इसी के चलते उन्हें पार्टी ने इस सीट से विधानसभा का टिकट दे दिया."
फरवरी 2013 में गायत्री प्रजापति को मुलायम सिंह की सिफ़ारिश पर अखिलेश सरकार में सिंचाई राज्य मंत्री का पद मिला लेकिन कुछ ही दिन बाद उन्हें खनन मंत्री का स्वतंत्र प्रभार मिल गया.
लखनऊ में वरिष्ठ पत्रकार राधे कृष्ण कहते हैं, "अब तक गायत्री की क़िस्मत उफ़ान मारने लगी थी और छह महीने के भीतर यानी 2014 में उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिल गया था."
आरोपों से घिरे प्रजापति
लेकिन जिस गति से उनकी तरक़्क़ी हो रही थी उसी गति से उन पर आरोप भी लगने शुरू हो गए थे, ख़ासकर भ्रष्टाचार के आरोप. जिस खनन विभाग का ज़िम्मा गायत्री प्रजापति के पास था उसे लेकर अखिलेश सरकार की भी जमकर किरकिरी हुई और हाईकोर्ट तक को उसमें दख़ल देना पड़ा. बाद में हाईकोर्ट ने खनन विभाग में अनिमियताओं को लेकर सीबीआई जांच के आदेश दिए.
इसके अलावा गायत्री प्रजापति पर ज़मीनों के अवैध क़ब्जे, सरकारी ज़मीन बेचने, पद का दुरुपयोग करने जैसे भी कई आरोप लगे. ताज़ा मामला गैंगरेप का है, जो चुनाव से पहले ही सामने आया था और इस मामले में गायत्री कई दिनों से फ़रार चल रहे थे.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लिखी रिपोर्ट
18 फरवरी को गायत्री प्रजापति और उनके छह साथियों के ख़िलाफ़ लखनऊ के गौतमपल्ली थाने में चित्रकूट की एक महिला की ओर से रिपोर्ट लिखाई गई थी. यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लिखी गई थी. पीड़िता ने आरोप लगाया था कि गायत्री के सरकारी आवास पर उनके साथ दुष्कर्म किया गया था.
गायत्री प्रजापति के ख़िलाफ़ मामलों की जांच के लिए उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त से भी शिकायत की गई और दावा किया गया कि उनके पास क़रीब एक हज़ार करोड़ रुपये की संपत्ति है.
गायत्री के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार को लेकर लोकायुक्त और अदालत का दरवाज़ा खटखटा चुकीं सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने पिछले दिनों एक बार फिर लोकायुक्त के यहां शिकायत की है. शिकायत में कहा गया है कि गायत्री प्रजापति ने पूरे प्रदेश में अवैध खनन के ज़रिये अकूत संपत्ति अर्जित की है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)