'मैंने जो भोगा, वो किसी और के साथ न हो'

इमेज स्रोत, SEETU TEWARI
- Author, डी श्याम कुमार
- पदनाम, जशपुर से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
"मै और मेरे साथी नहीं चाहते कि हमारे साथ जो हुआ, यह सब और किसी के साथ दोहराया जाए." छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की दुर्गा ये कहते हुए उदास हो जाती हैं.
दुर्गा तब महज 13 बरस की थीं, जब वो मानव तस्करों के चंगुल में फंस गई थीं. वो कहती हैं, "जब एक इंसान दूसरे इंसान को सामान समझकर उसका उपयोग करने लगता है तो, जिंदा रहते हुए ही नर्क का पूरा अनुभव हो जाता है."
ये साल 2009 की बात है. दुर्गा पूर्वी दिल्ली से लगभग नग्न हालात में अपने कमरे की खिड़की से कूदकर भागी थीं. वह यमुना के किनारे चलती रहीं. एक गांववाले ने कपड़े देकर उनकी मदद की और इस बारे मे पुलिस को जानकारी दी.

इमेज स्रोत, SEETU TEWARI
इसके बाद दुर्गा अपने घर लौट पाईं. दुर्गा को एक आदमी झारखंड के रास्ते से दिल्ली ले गया था.
अमानवीय गोरखधंधा
दुर्गा के घरवालों ने अच्छी कमाई वाली नौकरी, पढ़ाई की छूट, हर तीन महीने पर छुट्टी और पूरी सुरक्षा के भरोसे पर उसे एक जानकार के साथ भेज दिया था.
इंस्पेक्टर अनीता प्रभा मिंज साल 2013 से मानव तस्करी के खिलाफ काम कर रही हैं.
वो बताती हैं, "दुर्गा की तरह ही अलका, अनामिका, गीता और उनके जैसी कई दूसरी लड़कियों को नौकरी के नाम पर झांसा देकर देश के विभिन्न शहरों में बेच दिया गया."
इनमें से कई तो आज तक लापता हैं मगर कुछ लड़कियों को छुड़वाया गया. उनमे से कुछ इस अमानवीय गोरखधंधे के खिलाफ अपने स्तर पर प्रयास कर रहीं हैं.

इमेज स्रोत, D Shyam Kumar
मिंज बताती हैं, "इन लड़कियों के प्रयास से स्थानीय पुलिस को भी काफी मदद मिल रही है. क्योंकि लड़कियों का यह दल, जब गाँव-गाँव जाकर, हर घर का दरवाजा खटखटाती हैं, तो पुलिस के पास बहुत ही बारीक जानकारियां मिल जाती हैं."
टीम मेंबर
वो आगे कहती है, "जब ये लड़कियां गाँव वालों के साथ बैठकर इस गोरखधंधे के बारे में जानकारी उपलब्ध कराती हैं तो कई ग्रामीण अपने आप मदद के लिए आगे आते हैं. इससे न केवल संदिध लोगों को चिह्नित करने मे मदद मिलती है बल्कि कई मामले प्रारंभिक स्तर पर ही निपट जाते हैं."
अलका इसी टीम की एक मेंबर हैं. वो कहती हैं, "हर बार सब कुछ ठीक नहीं होता. पुलिस साथ में रहने के बावजूद कोई स्थानीय सहायता नहीं मिलती. अंत में सुकून तब मिलता है जब लड़की को छुड़ा लिया जाता है."

इमेज स्रोत, NANDINI SINHA
उनके काम और हर कदम पर खतरे की बात पर दुर्गा कहती हैं, "हमारे लिए तो चारों तरफ से खतरा है. लड़की के खरीदनेवालों और उनके दलालों से खतरा है."
चूड़ी और सिंदूर
बहुत गंभीर स्वर मे अलका एक घटना का जिक्र करती हैं, "हमें मालूम हुआ कि दलाल लड़कियों को इकट्ठा कर रहे हैं. तमाम कोशिश के बाद हमने संपर्क साधा. मैं जरूरतमंद लड़की बनकर उनके पास पहुंची. दो-तीन मुलाकात के बाद मुझे ले जाने के लिए वो तैयार हो गए."
अलका ने बताया, "हमारी कोशिश थी कि जिस रात वो लड़कियों को ले जाने वाले थे, उसी दिन छापा मारकर पकड़ लेंगें. उन लोगों ने सभी लड़कियों को शादीशुदा दिखाने के लिए, साड़ी, चूड़ी और सिंदूर से तैयार किया था. मुझे भी बोला गया."

इमेज स्रोत, NANDINI SINHA
वह आगे कहती हैं, "मैं कुछ बहाना बनाकर बाहर आई और अपने साथ छिपा कर रखे फोन से अपने लोगों को फोन करने लगी. मगर गाड़ी खराब हो जाने की वजह से हमारे लोग सही समय पर नहीं पहुंच पाए. उस दिन जान बचा कर मैं कैसे भागी, मैं ही जानती हूं."
झारखंड के रास्ते
गीता बताती हैं, "हमारा दल जशपुर जिले के कुनकुरी सीतापुर बगीचा और कांसाबेल ब्लॉकों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है. क्योंकि इन्हीं ब्लॉकों में मानव तस्करी के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं. अधिकतर लड़कियों को जशपुर जिले से लगे झारखंड के रास्ते देश के विभिन्न हिस्सों मे पहुंचाया जाता है."
गीता की शादी 19 साल मे हो गई थी. दो साल में एक बच्चा होने के बाद शराबी पति ने हमेशा के लिए छोड दिया. इसके बाद गीता को लड़कियों के इस दल के बारे मे जानकारी मिली और तब से ही वह भी इनके साथ काम करने लगीं.

इमेज स्रोत, DESHAKALYAN CHOWDHURY/AFP/Getty Images
समाजसेवी ममता कुजुर साल 2012 से छुड़ा कर लाई गई लड़कियों के पुनर्वास के लिए काम कर रही हैं.
वो कहती हैं, "लड़कियों को अपने परिवार, गाँव और समाज में फिर से बसाना बहुत ही मुश्किल भरा काम है. कई बार परिवार मान लेता है लेकिन गाँववाले और समाज नहीं मानता. वैसे समय मे हम लोग इन के साथ लगातार बैठक कर इन्हें तमाम ऊंच-नीच समझाते हैं और सफल भी होते हैं."
पीड़ित लड़कियों की इन कोशिशों से न केवल गाँवों में जागरूकता आ रही है बल्कि लड़कियों के गुम हो जाने जैसी घटनाओं में कमी भी दर्ज की गई है. ये सभी लड़कियां छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल जशपुर जिले से ताल्लुक रखती हैं.
ये जिला न केवल राज्य का सबसे पिछड़ा जिला है बल्कि, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं मे भी काफी पिछड़ा हुआ है.
(लड़कियों की गोपनीयता और सुरक्षा के लिए उनके नाम बदल दिए गए हैं.)
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












