सबरीमाला मंदिर में 'रजस्वला' महिलाओं के प्रवेश पर बवाल

सबरीमला मंदिर.

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    • Author, प्रगित परमेश्वमरन
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

केरल के सबरीमाला मंदिर में कथित रूप से तीन रजस्वला महिलाओं (जिनका मासिक धर्म होता है) के गर्भगृह में जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. इन तीन महिलाओं की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है.

अब राज्य सरकार ने इस तस्वीर की सच्चाई का पता लगाने के लिए जाँच के आदेश दिए हैं.

सबरीमला मंदिर में दस से 50 साल तक की महिलाएं, जो रजस्वला हैं, उनके प्रवेश पर पाबंदी है.

इसके पीछे की मान्यता यह है कि इस मंदिर के मुख्य देवता अयप्पा ब्रह्मचारी थे. ऐसे में इस तरह की महिलाओं के मंदिर में जाने से उनका ध्यान भंग होगा.

राज्य के देवासम बोर्ड के मंत्री काडाकमपल्ली सुंदरन ने देवासम विजिलेंस को इसकी जांच शुरू कर मामले की सच्चाई पता लगाने को कहा है.

सोशल मीडिया पर बहुत से लोगों का कहना है कि तस्वीर में नज़र आ रही महिलाओं की उम्र 50 साल से अधिक नहीं है. इसलिए उन्हें मंदिर में जाने की इजाजत नहीं देनी चाहिए.

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उन्होंने कहा, '' शिकायत के मुताबिक़, महिलाओं के उस आयुवर्ग की जिनके मंदिर में जाने पर पाबंदी है, ऐसी महिलाओं का एक समूह उनके साथ मंदिर में गया. सबरीमला में महिलाओं के पूजा करने पर कोई पाबंदी नहीं है.''

प्रवेश की शिकायत

भाजपा के प्रचार विभाग के संयोजक टीजी मोहनदास ने 12 अप्रैल को एक फोटो ट्वीट किया. इसमें महिलाएं अयप्पा मंदिर के गर्भगृह में पूजा कर रही हैं.

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उन्होंने लिखा कि उम्मीद करता हूं कि ये महिलाएं 50 साल से अधिक आयु की होंगी.

पुलिस के मुताबिक़ महिलाओं के इस दल ने मंदिर में प्रवेश लायक अपनी आयु को साबित करने के लिए आधार कार्ड दिखाया था. ऐसे में इस बात को लेकर किसी तरह का विवाद पैदा करने की ज़रूरत नहीं है.

केरल हाई कोर्ट ने 1991 और 2015 में कहा था कि सबरीमला मंदिर को अपनी परंपराएं जारी रखने का अधिकार है.

बाद में अदालत ने कहा कि रजस्वला महिलाओं के मंदिर में प्रवेश को लेकर लगी पाबंदी आयु पर आधारित है, महिलाओं को वर्ग मानते हुए नहीं.

केरल के लेफ़्ट डेमोक्रिटक फ्रंट (एलडीएफ) की सरकार ने नवंबर 2007 में अपने हलफनामे में कहा, ''सबरीमला मंदिर में महिलाओं के वर्ग को प्रवेश देने से मना करना सही नहीं है.''

उसने इस परंपरा में बदलाव लाने के लिए विद्वानों का एक दल नियुक्त करने का समर्थन किया था. हालंकि सरकार ने अपने हलफनामे में यू टर्न लेते हुए कहा कि सरकार अपने पुराने स्टैंड पर कायम है.

अभी यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.

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