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'दिल्ली विधानसभा में ईवीएम से छेड़छाड़ का लाइव डेमो'
दिल्ली विधानसभा के विशेष सत्र में आम आदमी पार्टी के विधायक सौरभ भारद्वाज ने एक डेमो टेस्ट के ज़रिए दावा किया है कि ईवीएम मशीनों को आसानी से टैंपर किया जा सकता है. हालांकि ये असल में इस्तेमाल होने वाली ईवीएम मशीन नहीं थी बिल्कुल उसी जैसी मशीन थी.
सौरभ भारद्वाज की मुख्य बातें
- विधानसभा में 'ईवीएम हैकिंग' का डेमो दिया
- कहा सीक्रेट कोड से मशीन हैकिंग संभव
- चुनाव से पहले मशीन मिल जाए तो गुजरत चुनाव में जीतने का दावा
विधानसभा में किए मॉक टेस्ट में मिसाल देते उन्होंने दिखाया कि पाँच पार्टियों को दो-दो वोट दिए गए और सब सही है.
उन्होंने कहा, "वोट से पहले पोलिंग एजेंट को मॉक टेस्ट करके दिखाया जाता है कि वोटिंग मशीनें सही तरीके से काम करती है लेकिन असली में जब आठ बजे वोटिंग होती है तो खेल कुछ और ही होता है. "
"मान लीजिए जब असल वोटिंग हुई तो तो पाँचों पार्टियों को दो-दो वोट मिले. लेकिन असलियत ये है कि जिस पार्टी के पास उस मशीन का सीक्रेट कोड होता है वो अपनी पार्टी को जिता सकता है. जैसे-जैसे वोटिंग होती रहती है तो एक पार्टी के कार्यकर्ता वोटर बनकर आते हैं. जैसे जैसे उस पार्टी के लोग कोड डालते रहते हैं, वो पार्टी जीत की ओर बढ़ती रहती है. पोलिंग के बाद भले ही स्ट्रांग रूम के बाहर कितना भी पहरा दिया जाए, असल छेड़छाड़ तो वोटिंग के दौरान ही हो चुकी है."
'हमें गुजरात से पहले ईवीएम मशीन दे दो'
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि सिर्फ़ मदरबोर्ड को बदलने भर से मशीनों में छेड़छाड़ की जा सकती है.
उन्होंने चुनौती देते हुए कहा, "मैं चैलेंज करता हूँ कि हमें गुजरात चुनाव से पहले सिर्फ़ तीन घंटे के लिए ईवीएम मशीनें दे दें, उनको वोट नहीं मिलेगा. कुछ लोग शायद विदेशी ताकतों के हाथों में खेल रहे हैं."
तकनीक का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, "कोई मशीन ऐसी नहीं है जिसे हैक न किया जा सके. यही कारण है कि जिन देशों से हमने इस तकनीक को लिया है वो देश इस तकनीक का इस्तेमाल नहीं करते. जबकि वो देश तकनीक में बहुत आगे है. जो तकनीक हमने इजाद ही नहीं की फिर भी हम इसकी गारंटी ले रहे हैं."
सौरभ भारद्वाज ने भिंड में हुए ईवीएम पर्ची मामले का भी ज़िक्र किया. दरअसल मध्य प्रदेश में भिंड ज़िले के अटेर में ईवीएम मशीन के डेमो के दौरान किसी भी बटन को दबाने पर वोट भाजपा को मिलने के आरोप लगे थे जिसके बाद कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को हटा दिया गया था.
डेमॉन्सट्रेशन के दौरान अलग-अलग बटन दबाने पर भाजपा के चुनाव निशान कमल की ही पर्ची निकली थी.
सारे चुनाव फ़िक्स नहीं होते क्योंकि...
वहीं मैच फिक्सिंग से तुलना करते हुए सौरभ भारद्वाज ने कहा, "जब पहली बार मैच फिक्सिंग का आरोप लगा था, तब क्रिकेटरों को भगवान जैसा दर्जा दिया जाता था. जिन पर आरोप लगे थे उन्होंने बड़ी सफ़ाई दी थी कि फ़िक्सिंग ही करनी होती तो हम सारे मैचों में करते. लेकिन ये काम सारे मैचों में नहीं होता था ताकि किसी को शक न हो. यहाँ भी ऐसा ही हो रहा है."
सौरभ भारद्वाज ने हल्के फुल्के अंदाज़ में ये सारी बातें कहीं और खुद पर भी चुटकी लेते रहे.
अपने भाषण में एक दफ़ा वे बोले, "मैंने कंप्यूटर साइंस में बीटेक की है. मेरे पिता बोलते थे अब इसका क्या काम. केजरीवाल भी इंजीनियर हैं. देखिए आज हमें अपनी इंजीनियरिंग दिखाने का मौका मिल रहा है."
इससे पहले आप नेता अरविंद केजरीवाल ने सुबह ट्वीट किया था कि देश में चल रहे बहुत बड़े षड्यंत्र का सच सदन में उजागर किया जाएगा.
इस साल मार्च में बसपा ने भी अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से उत्तर प्रदेश के हापुड़ विधानसभा क्षेत्र के आंकड़ों का हवाला देते हुए ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप लगाया था.
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