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महाराष्ट्र: सिर मुंडवा कर किसानों ने किया विरोध
- Author, अश्विन अघोर
- पदनाम, महाराष्ट्र से बीबीसी हिंदी के लिए
महाराष्ट्र के किसानों ने अपने हड़ताल के पांचवे दिन महाराष्ट्र बंद का ऐलान किया था. मुंबई के अलावा राज्य के हर शहर में बंद का ऐलान था.
इस बंद का मिलाजुला असर देखने को मिला. कहीं इसका शत-प्रतिशत असर था तो कहीं कुछ भी नहीं.
राज्य के हर इलाके में किसी भी तरह के अनुचित घटना को टालने के लिए भारी पुलिस बंदोबस्त तैनात किया गया. कई जगह गुस्साई भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया और कई आंदोलनकारियों को हिरासत में लिया.
लेकिन इस बंद का मुंबई पर कोई असर नहीं पड़ा, क्योंकि सोमवार के बंद से मुंबई को बाहर रखा गया था.
नासिक ज़िले के लासलगांव, कलवन समेत छह मुख्य सब्जी मंडियां बंद थीं. जगह जगह रास्ता रोको किया गया. ज़िले के मखमलाबाद तथा मातोरी गांव के लोगों ने सब्जी और टायर रास्ते पर डालकर रास्ता रोके रखा.
महाराष्ट्र बंद के दौरान अनुचित घटना की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने नांदेड़ ज़िले के अर्धापुर तहसील में कड़ा पुलिस बंदोबस्त तैनात किया था. फिर भी ज़िले के भोकर तहसील में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तथा कृषि राज्य मंत्री सदाभाऊ खोत के पुतलों का दहन किया गया.
नांदेड़ ज़िले के लगभग सभी तहसीलों में बंद का असर रहा. कई जगह सब्जी मंडियां और दूसरी दुकानें पूरी तरह बंद रखी गई.
यवतमाल ज़िले के किसानों ने अपना सिर मुंडवा सरकार का विरोध किया. अहमदनगर ज़िले में बंद का असर शत-प्रतिशत रहा. धुलिया ज़िले में किसानों ने धुलिया-सूरत महामार्ग पर रास्ता रोका. पश्चिम महाराष्ट्र में बंद का काफी असर दिखा. सांगली, सतारा, पुणे तथा कोल्हापुर ज़िलों में रोजमर्रा के सारे काम आज बंद थे.
बंद की वजह से औरंगाबाद कृषि उपज बाज़ार समिति में हर दिन के मुकाबले केवल 25 प्रतिशत सब्जी तथा फलों की आवक हुई. जिसके चलते यहाँ सब्जी तथा फलों के दाम बढ़े हुए थे.
जहां एक ओर इस बंद का शत-प्रतिशत असर रहा, वहीं कई जगह यह पूरी तरह से विफल रहा.
कोंकण के सिंधु दुर्ग तथा रायगढ़ ज़िलों में बंद का कोई असर नहीं था. पनवेल कृषि उपज बाजार समिति में हालाकी आवक कम थी, लेकिन बाज़ार पर उसका कोई ख़ास असर नहीं हुआ.
कोल्हापुर ज़िले के 3000 वकीलों ने किसानों के आन्दोलन के समर्थन में आज कम बंद रखा. विदर्भ के ज़्यादातर इलाकों में इस बंद का मिलाजुला असर रहा.
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