ब्लॉग: बस में लड़की से कोई सटकर खड़ा हो जाए तो..

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- Author, सिंधुवासिनी त्रिपाठी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
एक लड़का और लड़की भीड़भाड़ वाली बस में सवार हैं. कोई सीट खाली नहीं है इसलिए दोनों खड़े हैं. अचानक लड़की कहती है,
'आपकी जेब से कुछ टच हो रहा है.'
'वो मेरी सैलरी है.'
'तुम्हारी सैलरी हर दो मिनट में दोगुनी हो जाती है क्या?'
काफी मुमकिन है कि यह 'जोक' आपने भी सुना, रिसीव और फॉरवर्ड किया हो. मैंने भी कहीं पढ़ा था लेकिन उस वक़्त इसके बारे में इतना नहीं सोचा था जितना आज सोच रही हूं.

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एक लड़की के फ़ेसबुक पोस्ट ने मुझे इसकी याद दिला दी. लड़की दिल्ली मेट्रो के जनरल कोच में सफ़र कर रही थी और किसी ने उस पर इजैक्युलेट कर दिया. आसान शब्दों में कहें तो किसी पुरुष की सेक्शुअल कुंठा का स्खलन उसके कपड़ों पर हुआ था. लड़की की जींस पर कई बड़े-बड़े धब्बे साफ देखे जा सकते थे.
आप एक मर्द हैं और सड़क चलती या बस में बैठी किसी लड़की से छेड़खानी नहीं करते, बहुत अच्छी बात है. लेकिन अगर आप रेप पर बने जोक्स पढ़कर ठहाके लगाते हैं तो जान लें कि उत्पीड़न की शुरुआत यहीं से होती है.

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अगर आपको फ़िल्म 'हम आपके हैं कौन' में सलमान ख़ान का माधुरी के कूल्हों पर गुलेल से गेंदे का फूल मारा जाना रोमांटिक लगता है तो समस्या की जड़ यही है. अगर आपको 'सारा खर्चा लौंडों से करवाती है और घर जाके सो जाती है' जैसे गानों के बोल से कोई आपत्ति नहीं है तो समझिए यही ग़लती की शुरुआत है.
क्योंकि ऐसे ही चुटकुलों पर हंसते-हंसते, ऐसे ही गाने गुनगुनाते-गुनगुनाते हमें छेड़खानी, पीछा करने और यौन उत्पीड़न जैसे बर्ताव सामान्य लगने लगते हैं.
कुछ ऐसा ही वाकया मेरी एक दोस्त ने मुझसे शेयर किया था. वह कॉलेज के फर्स्ट इयर में थी और भोपाल की एक बस में सफ़र कर रही थी. कोई अपने पैंट की जिप खोलकर अपने-आप में खोई हुई उस दोस्त से सटकर खड़ा हो गया.

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जब उसे अपने हाथ पर कुछ चिपचिपा सा महसूस हुआ तो उसने पलटकर देखा. गुस्से और घिन से उसके रोएं खड़े हो गए. वह उस पर चिल्लाई, वह उसे पीटना चाहती थी लेकिन ऐसा करने वाला बड़ी आसानी से भीड़ में गुम हो गया. इस वाकये के 12 साल हो चुके हैं और आज भी मेरी दोस्त बस में सफ़र करने से हिचकिचाती है.

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आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सफ़र करने वाली किसी भी लड़की से बात कीजिए. शायद हर दूसरी लड़की इस तरह के अनुभव से गुज़री होगी. इतने लोगों की भीड़ में आप किस पर चीखेंगे? कई बार पता ही नहीं चल पाता दरअसल हरकत की किसने. लेकिन महसूस सब होता है.
भीड़ का फायदा उठाकर चिपकते चले आ रहे मर्द या फिर इधर-उधर हाथ लगाते मर्द, आपके पास आकर गर्दन पर सांसों की गर्म फूंकें मारते मर्द...
एक लड़की अपनी ज़िंदगी में लगभग हर रोज ही किसी न किसी तरह की छेड़खानी या उत्पीड़न का शिकार होती है और दिन में सिर्फ एक बार नहीं, कई बार.

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कुछ दिनों पहले इंटरनेट पर एक ऐश ट्रे बिक रही थी. ऐश ट्रे का शेप कुछ ऐसा था जैसे कोई औरत अपनी टांगें फैलाकर बैठी है और आप उसकी टांगों के बीच यानी वजाइना में सिगरेट बुझा सकते हैं. अगर आपको इसमें कुछ ग़लत नहीं दिखता तो आपको नज़रिया बदलने की सख़्त जरूरत है.
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