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कर्नाटक चुनावों की ऐसी कवरेज और कहां?
कर्नाटक में चुनावी बिगुल बज चुका है और राजनीति गर्मा रही है.
डोसा और फ़िल्टर कॉफ़ी पर चर्चा इस बात की है कि क्या कांग्रेस एक बार फिर सत्ता में लौटेगी या फिर भाजपा उलटफेर करने में कामयाब रहेगी.
12 और 15 मई को वोट डाले जाएंगे और ईवीएम तय करेगी कि ऊंट किस करवट बैठेगा.
बीबीसी न्यूज़ पॉप अप की टीम बैंगलुरु पहुंची ये जानने कि वहां के लोग बीबीसी से किन मुद्दों को कवर कराना चाहते हैं, किन सवालों का जवाब चाहते हैं और नई सरकार से क्या उम्मीदें रखते हैं.
आम तौर पर ख़बरों के कारोबारी अपने संपादकीय एजेंडा के हिसाब से चुनावी कवरेज तय करते हैं लेकिन बीबीसी में ऐसा नहीं होता. हम अपने पाठकों और दर्शकों से पूछते हैं कि वो क्या मुद्दा कवर कराना चाहते हैं.
और इस बार हमारा ज़ोर है कर्नाटक के नौजवानों से उनके मुद्दे जानने पर.
बेंगलुरु को भारत की चमचमाती और उभरती हुई सिलिकॉन वैली कहा जाता है लेकिन वो पानी की कमी, कूड़ा-प्रदूषण, ट्रैफ़िक और ख़राब सड़कों जैसी बुनियादी दिक्कतों की वजह से सुर्खियों में रहता है.
1.1 करोड़ की आबादी और लगातार फैलता ये शहर अपने कंधों पर काफ़ी बोझ उठाए है.
और इन मुद्दों के अलावा पहचान की राजनीति, तमिलनाडु के साथ पानी पर विवाद, कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार, कृषि से जुड़ी समस्याएं कर्नाटक में ऐसे कई मुद्दे हैं जो चुनावी राजनीति की दशा-दिशा बदलने का दमखम रखते हैं.
भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही राज्य के लाखों नौजवानों को आकर्षित करने में लगे हैं लेकिन ये अभी बताना मुश्किल है कि युवा किस तरफ़ जाएंगे?
कर्नाटक के युवा दिमागों में क्या कुछ चल रहा है?
शुक्रवार, 13 अप्रैल को को इंदिरा नगर के हमिंगट्री बार में हमसे मिलिए और अपने आइडिया हमसे साझा कीजिए.
यही मौक़ा है जब आप ख़ुद और आपके विचार, बीबीसी की न्यूज़ कवरेज का हिस्सा बन सकते हैं.
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