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जम्मू-कश्मीर: सरकार बनाने की कवायद के बीच गवर्नर ने भंग की विधान सभा
तेज़ी से बदलते घटनाक्रम के बीच जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्य पाल मलिक ने राज्य की विधान सभा को भंग कर दिया है.
श्रीनगर से बीबीसी संवाददाता रियाज़ मसरूर ने बताया कि बुधवार को पीडीपी-एनसी-कांग्रेस गठबंधन और पीपल्स पार्टी के प्रमुख सज्जाद लोन की ओर से अपनी-अपनी सरकार बनाने का दावे पेश किये गए थे.
लेकिन सरकार बनाने की कोशिशें विफल हो गईं.
विधानसभा भंग करने का आदेश जारी करते हुए राज्यपाल ने कहा, "मैं क़ानून के तहत प्राप्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए विधान सभा को भंग करता हूँ."
इस साल जून में पीडीपी और बीजेपी के गठबंधन से चल रही सरकार गिर गई थी. उसके बाद से असेंबली को कोई दूसरी सरकार बनने की उम्मीद में भंग नहीं किया गया था.
इससे पहले बुधवार को दिनभर राज्य में नई सरकार बनने की ख़बरें उड़ती रहीं. लेकिन सरकार बनाने की इस रेस में कांग्रेस, नेशनल कांफ़्रेंस और पीडीपी का गठबंधन आगे दिख रहा था.
लेकिन शाम होते ही राज्यपाल ने तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए, विधानसभा को ही भंग कर दिया.
राज्यपाल के इस फ़ैसले के बाद जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने ट्विटर पर कई ट्वीट किए. उन्होंने लिखा, ''पिछले पांच महीने से हम लगातार विधानसभा भंग करने की बात कह रहे थे, जिससे विधायकों को तोड़ने की कोशिशें रोकी जा सकें. उस वक़्त हमारी अपील सुनने वाला कोई नहीं था, लेकिन जैसे ही हमने महागठबंधन बनाने की योजना शुरू की तो यह कदम उठा लिया गया.''
वहीं नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके उमर अब्दुल्ला ने भी अपनी बात रखने के लिए ट्विटर का सहारा लिया. उन्होंने मज़ाकिया लहज़े में लिखा, ''जम्मू कश्मीर के राजभवन में नई फ़ैक्स मशीन की ज़रूरत है.''
बीजेपी के ट्विटर हैंडल से इस संबंध में ट्वीट किया गया, ''जम्मू कश्मीर को एक स्थिर प्रशासन की ज़रूरत है जिससे वहां चरमपंथी गतिविधियों को रोका जा सके, राज्य को चरमपंथ का साथ देने वाले दलों की ज़रूरत नहीं है.''
सरकार बनाने की कोशिश
बुधवार को ही पीडीपी, नेशनल कांफ़्रेंस और कांग्रेस ने पुष्टी की थी कि वो तीनों मिलकर जम्मू-कश्मीर में गठबंधन सरकार बनाने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं.
वहीं पीडीपी के नाराज़ नेता मजफ़्फ़र बेग ने मंगलवार को चेताया था कि अगर ये तीनों दल गठबंधन सरकार बनाते हैं तो जम्मू-कश्मीर के तीन टुकड़े हो जाएंगे.
नेशनल कांफ़्रेंस ने बेग के इस बयान की निंदा की और कहा कि कांग्रेस, पीडीपी और नेशनल कांफ़्रेंस ने जम्मू-कश्मीर पर शासन किया है और तीनों क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.
लेकिन अब सारा घटनाक्रम बदल गया है.
विधान सभा भंग होने से पहले पीडीपी के पास 28 और कांग्रेस के पास 12 विधायक थे. पीपल्स कांन्फ़्रेंस के पास दो और बीजेपी के 25 एमएलए थे.
सज्जाद लोन ने एनसी, पीडीपी और कांग्रेस की मदद से बहुमत का 44 का आंकड़ा पार करने की कोशिश की, लेकिन उससे पहले ही राज्यपाल ने विधान सभा भंग कर दी.
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