सुब्रमण्यम स्वामी की नरेंद्र मोदी और अमित शाह को नसीहत

विधानसभा चुनाव 2019

इमेज स्रोत, EPA

इमेज कैप्शन, कांग्रेस को छत्तीसगढ़ के अलावा राजस्थान और मध्य प्रदेश में साफ बहुमत नहीं मिला
    • Author, फ़ैसल मोहम्मद अली
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • पढ़ने का समय: 2 मिनट

विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की हार के बाद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि किसी को भी ख़ुद को जनता का ठेकेदार नहीं समझना चाहिए और पार्टी को जागने की ज़रूरत है.

बीबीसी से एक ख़ास बातचीत में जब पार्टी के प्रदर्शन और पार्टी अध्यक्ष की रणनीति के बारे में पूछा गया, तो सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा, "हम तो कहते थे जीतते जाएंगे, जीतते जाएंगे लेकिन जनता के बारे में कोई भी भविष्यवाणी नहीं कर सकता है. इंदिरा गांधी भी यही समझती थीं लेकिन क्या हुआ? वो ख़ुद हार गईं."

दावा

अपनी बेबाकी के लिए जाने जानेवाले स्वामी ने किसी का नाम तो नहीं लिया लेकिन लोगों को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का वो बयान याद होगा, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि 2019 वो जीतेंगे और उसके बाद अगले 50 सालों तक पार्टी देश में शासन करेगी.

छोड़िए YouTube पोस्ट
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त

सितंबर में बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ये बात मीडिया को बताई थी.

मंगलवार को आए चुनाव नतीजे में बीजेपी को हिंदी पट्टी के तीन राज्यों- मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में हार का सामना करना पड़ा है और कांग्रेस तीनों सूबों में सरकार बनाने की प्रक्रिया में है.

लेकिन सुब्रमण्यम स्वामी का कहना है कि इन वोटों को कांग्रेस के पक्ष में नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि छत्तीसगढ़ के अलावा कांग्रेस को दोनों में से किसी राज्य में बहुमत नहीं मिला है.

स्वामी ने कहा, "उत्तर-पूर्वी राज्य मिज़ोरम जहां कांग्रेस पार्टी सत्ता में थी, वहां वो हार गई है और दक्षिणी राज्य तेलंगाना में भी उसे कोई कामयाबी हासिल नहीं हुई."

स्वामी
इमेज कैप्शन, स्वामी ने नए आरबीआई गवर्नर की नियुक्ति पर प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी है

भाजपा के राज्य सभा सांसद का कहना था कि चुनाव नतीजों से स्पष्ट हो गया है कि पब्लिक बीजेपी को जगाना चाहती थी.

उनका कहना था कि नोटबंदी और जीएसटी की वजह से किसान और व्यापारियों में नाराज़गी है. ये लोग परंपरागत रूप से बीजेपी के समर्थक रहे हैं.

वो विदेशों से काला धन वापस लाने के बीजेपी का वादे पूरा न हो पाने को भी जनता की नाराज़गी की वजह मानते हैं और दावा करते हैं कि 15 लाख रुपए हर भारतीय के खाते में दिए जाने का जो वादा प्रधानमंत्री ने किया था वो पूरा होगा.

स्वामी ये भी कहते हैं कि राम मंदिर के निर्माण के मुद्दे पर बीजेपी को ज़ोर-शोर से काम करना होगा. हालांकि इस मामले को वो अदालत के ज़रिए सुलझाना चाहते हैं जहां उनकी एक याचिका लंबित है.

आरएसएस और वीएचपी राम मंदिर निर्माण के लिए क़ानून लाने की मांग कर रहे हैं लेकिन स्वामी का कहना है कि क़ानून या विधेयक लाए जाने के मामले पर वो कुछ नहीं बोलना चाहेंगे क्योंकि उससे जो क़ानूनी प्रक्रिया उन्होंने अदालत में चला रखी है उसको नुक़सान हो सकता है.

नाराज़गी

शक्तिकांत दास को आरबीआई का गवर्नर नियुक्त किए जाने पर सुब्रमण्यम स्वामी नाराज़ हैं और उनका कहना है कि वो नहीं समझ सकते हैं कि जिस आदमी को उन्होंने वित्त मंत्रालय से बाहर करवाया था, उसे देश के केंद्रीय बैंक का मुखिया कैसे बना दिया गया.

उनका कहना था कि उन्होंने इस मामले पर प्रधानमंत्री को लिखा है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)