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ऑर्डर किया कुछ और, डिलीवरी हुई कुछ और - क्यों होती है गड़बड़?
- Author, भूमिका राय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
कुछ लोग समय बचाने के लिए ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं तो कुछ समय बिताने के लिए. किसी के लिए ऑनलाइन शॉपिंग मज़ा है तो कोई सिर्फ़ तस्वीर देखकर ख़रीदारी करने की सज़ा भुगत चुका है.
जितने लोग, उतने ही अनुभव.
बदलते दौर में, ऑनलाइन शॉपिंग ट्रेंड के साथ-साथ ज़रुरत भी बन चुकी है लेकिन एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो सिर्फ़ ठगे जाने के डर से ऑनलाइन शॉपिंग नहीं करता है. कुछ लोगों को डर होता है कि उनके डेबिट या क्रेडिट कार्ड की डिटेल्स लीक हो जाएंगी तो कुछ लोगों को इस बात की चिंता सताती है कि उन्हें सही सामान नहीं मिलेगा.
कई लोगों के साथ ऐसा हुआ भी है और ताज़ा मामला बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा से जुड़ा हुआ है. दरअसल, हुआ कुछ यूं कि सोनाक्षी सिन्हा ने अमेज़न से 18 हज़ार की कीमत वाला बोस का एक हेडफ़ोन ऑर्डर किया था.
उनके ऑर्डर की डिलीवरी तो हुई लेकिन हेडफ़ोन के बॉक्स में 18 हज़ार का बोस का हेडफ़ोन होने के बजाय लोहे का एक टुकड़ा निकला.
देखने में वो टुकड़ा किसी नल का हिस्सा लग रहा था. बाद में सोनाक्षी ने इस ऑर्डर की एक फ़ोटो अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर की और अपने साथ हुए धोखे के बारे में बताया.
लेकिन अगर किसी ने 18 हज़ार का हेडफ़ोन ऑर्डर किया है तो उसे बेकार लोहे का टुकड़ा क्यों डिलीवर हुआ...? ये सवाल बहुत से लोगों के ज़हन में उठा. हालांकि अमेज़न का दावा है कि उसने इस मामले को सुलझा लिया है.
अमेज़न इंडिया के प्रवक्ता की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि 'जैसा कि हम उपभोक्ताओं का ध्यान रखने वाली कंपनी हैं, ऐसे में हम अपने ग्राहक के सामान को सुरक्षित पहुंचाने के लिए पूरी तरह ज़िम्मेदार हैं. हम इस मामले की पूरी जांच कर रहे हैं. हमने उपभोक्ता से इस मामले को सुलझा लिया है और उनको हुई असुविधा के लिए ख़ेद भी जताया है.'
कैसे होती है लाखों सामानों की डिलीवरी?
दुनिया के बड़े ऑनलाइन रीटेलर्स में से एक अमेज़न रोज़ाना लाखों पैकेट दुनिया के अलग-अलग हिस्से में पहुंचाता है.
जब हम कोई चीज़ ऑनलाइन ऑर्डर करते हैं तो सबसे पहले सॉफ़्टवेअर यह पता लगाता है कि वह चीज कहां रखी हुई है. यह सॉफ़्टवेअर किसी कर्मचारी को बताता है कि वो चीज़ कहां रखी है.
वो कर्मचारी वेयर-हाउस के उक्त शेल्फ़ तक पहुँचता है, पैकेट उठाता है, फिर हाथ में उठाए स्कैनर से स्कैन करता है. स्कैनर तय करता है कि वो सही पैकेट है, उस पर पता सही है या नहीं, और फिर उस पर ग्राहक का नाम, पते की पर्ची चिपका देता है.
जिसके बाद इस सामान को डिलीवर कर दिया जाता है.
लेकिन ऑर्डर की हुई चीज़ डिलीवरी के समय बदल कैसे जाती हैं?
जब ये सारा काम इतने सिस्टमैटिक तरीक़े से होता है तो ग़लती होने की गुंजाइश कहां है? इस पर ई-कॉमर्स और साइबर मामलों के जानकार विनीत कुमार बताते हैं कि अगर आपने सामान अच्छी ई-कॉमर्स वेबसाइट से ख़रीदे हैं तो कंपनी के स्तर पर गड़बड़ी होने की गुंजाइश बहुत कम होती है.
लेकिन अमूमन लोग 'सेलर्स' पर ध्यान नहीं देते. सेलर्स की रेटिंग इस तरह की धांधलियों के लिए ख़ासतौर पर ज़िम्मेदार होती है. इसके अलावा कई बार डिलीवरी ब्वॉय भी सही सामान निकालकर कुछ भी भर देते हैं.
कैसे बचें इस तरह की धांधली से
विनीत बताते हैं कि सबसे पहले तो रेटिंग चेक करें. डिलीवरी ब्वॉय सामान देने आए तो उसे रोके रखें और उसके सामने ही बॉक्स खोले. बॉक्स खोलते समय वीडियो भी बनाएं ताकि आपके पास इस बात का सुबूत हो कि आपको ग़लत सामान मिला है.
विनीत मानते हैं कि कई बार ग़लत सामान आ जाता है लेकिन वो ये भी मानते हैं कि कई बार लोग भी धोखा करते हैं और सही सामान आने के बावजूद ग़लत होने की शिकायत करते हैं. ऐसे में वीडियो बना लेना हमेशा ही सुरक्षित है.
विनीत मानते हैं कि सबसे ज़रूरी ये है कि जिस वेबसाइट से ख़रीदारी की गई हो वो जानी-मानी हो और उसकी रेटिंग अच्छी हो.
ऑनलाइन शॉपिंग करने के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
कभी भी ऑनलाइन शॉपिंग शुरू करने से पहले याद रखें कि कंप्यूटर पर एंटी-वायरस ज़रूर होना चाहिए. इसके बाद इन तमाम बातों का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है.
भारी डिस्काउंट से सावधान
ऑनलाइन शॉपिंग के लिए सबसे पहले तो ये ध्यान रखें कि जिस भी ई-शॉपिंग वेबसाइट से आप ख़रीदारी करें उसके एड्रेस में http नहीं, बल्कि https हो.
'S' जुड़ जाने के बाद सिक्योरिटी की गारंटी हो जाती है और वो फ़ेक साइट नहीं होगी. कभी-कभी 'S' वेबसाइट में तब जुड़ता है जब ऑनलाइन पेमेंट का समय आता है.
फिर ये चेक करें कि जहां से सामान ख़रीदा जा रहा है, उसका पता, फ़ोन नंबर और ई-मेल एड्रेस वेबसाइट पर लिखा है या नहीं. धोखा करने वाली वेबसाइट्स अपने पेज पर ये जानकारी शेयर नहीं करती हैं.
अगर किसी चर्चित प्रोडक्ट पर भारी डिस्काउंट मिल रहा है तो दूसरी वेबसाइट्स भी चेक कर लें. अगर सिर्फ़ किसी एक वेबसाइट पर ही ये छूट है तो थोड़ा सतर्क हो जाएं.
पेमेंट सिस्टम
पेमेंट करते समय बहुत अधिक सतर्क रहने की ज़रूरत है. पता करें कि जिस वेबसाइटसे आप सामान ख़रीद रहे हैं उसके सिस्टम में वेरीफ़ाइड बाई वीज़ा या मास्टरकार्ड सिक्योरकोड के ज़रिए पेमेंट कर सकते हैं या नहीं.
इसके लिए हां करें. ये वेरिफ़िकेशन आपको धोखे से बचाता है.
इस बात पर भी ध्यान दें कि डिलीवरी के लिए समय कितना लगेगा. पेमेंट से जुड़ी जानकारी वेबसाइट पर दी गई होनी चाहिए.
अगर इन सारी बातों से आप संतुष्ट हैं, तभी ख़रीदारी को लेकर आगे बढ़ें. हमेशा की तरह अपने क्रेडिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड का पासवर्ड या पिन कभी किसी से शेयर नहीं करें.
कई बार ऐसा भी होता है कि हैकर्स क्रेडिट कार्ड की डिटेल्स चुरा लेते हैं. डच डेवलपर विलियम डी ग्रूट ने बताया कि आपका क्रेडिट कार्ड का कोड साइबर चोर द्वारा साइटों पर डाला जाता है.
उन्होंने ब्लॉगस्पॉट में कहा कि हैकर सबसे अधिक उपयोग की जानेवाली साइटों को अपना निशाना बनाते हैं.
वे जब उन वेबसाइटों में अपना रास्ता बना लेते हैं उसके बाद वे उन साइटों से आपकी क्रेडिट कार्ड और दूसरी लेनदेन की जानकारियां चुरा लेते हैं.
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