आठ लाख कमाई, 10 प्रतिशत आरक्षण वालों पर कितना टैक्स?

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- Author, अभिजीत श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- पढ़ने का समय: 2 मिनट
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने अंतरिम बजट 2019 के दौरान इनकम टैक्स छूट की सीमा को ढाई लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया.
शुक्रवार से ही सामान्य वर्ग को आर्थिक आधार पर केंद्र सरकार की सभी नौकरियों में 10 फ़ीसदी आरक्षण भी लागू हो गया है.
इस आरक्षण का लाभ पाने के लिए सालाना आय 8 लाख रुपये से कम होनी चाहिए, यह शर्त रखी गई है. जब 10 फ़ीसदी आरक्षण के प्रावधान लाए गये थे तब भी यह सवाल उठा था कि जब 8 लाख रुपये तक की आमदनी वाले 10 फ़ीसदी आरक्षण का लाभ ले सकते हैं तो आयकर की छूट केवल ढाई लाख तक की आय पर क्यों है.
अब बजट 2019 में आयकर की सीमा को बढ़ाकर 5 लाख रुपये तो कर दिया गया लेकिन आयकर देने वालों में फिर भी यह असमंजस की स्थिति बनी कि ग़रीब के तौर पर आरक्षण का फ़ायदा लेने वाले उन लोगों को टैक्स देना पड़ेगा जिनकी आय पांच लाख सालाना से ऊपर है.
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कैसे करें टैक्स छूट की गणना?
आपको इस असमंजस में रहने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि हम आपको बताने जा रहे हैं कि इनकम टैक्स छूट पांच लाख रुपये तक तो मिलेगा ही.
सरकार ने बजट 2019 में स्टैंडर्ड डिडक्शन को भी 40 हज़ार से बढ़ाकर 50 हज़ार रुपये कर दिया है.
इसके बाद विभिन्न निवेशों पर धारा 80सी के तहत डेढ़ लाख रुपये तक की छूट मिलती है.
नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश से आप सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये के निवेश से अलग टैक्स छूट का फ़ायदा उठा सकते हैं.
इसमें 50,000 रुपये का निवेश कर सेक्शन 80CCD(1b) के तहत टैक्स छूट का लाभ उठा सकते हैं.
इसके अलावा सेक्शन 80डी के तहत 25 हज़ार रुपये तक मेडिकल ख़र्च पर टैक्स छूट क्लेम कर सकने की सुविधा भी दी गई है.
इसके अलावा राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम का इस्तेमाल कर 25 हज़ार रुपये तक की अलग छूट पा सकते हैं.
यानी आपको पांच लाख की आय + पचास हज़ार स्टैंडर्ड डिडक्शन + डेढ़ लाख 80सी के तहत + एनपीएस में 50 हज़ार के निवेश पर + 25 हज़ार मेडिकल ख़र्च पर क्लेम + 25 हज़ार राजीव गांधी इक्विटी स्कीम में.
यानी कुल 8 लाख रुपये पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा.

इसके अलावा अगर आपने होम लोन भी ले रखा है तो उसके ब्याज पर 2 लाख रुपये छूट का अलग से प्रावधान है.
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