पश्चिम बंगाल में ​ममता बनर्जी पर आक्रामक क्यों हुए नरेंद्र मोदी

    • Author, प्रभाकर एम.
    • पदनाम, कोलकाता से बीबीसी हिंदी के लिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को पश्चिम बंगाल में भाजपा के चुनाव अभियान की शुरुआत करते हुए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार पर काफी हमलावर मूड में नज़र आए.

अपनी दोनों रैलियों में दीदी और उनकी सरकार पर बरसते हुए मोदी ने दावा किया कि इस सरकार का जाना तय है.

उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के "ट्रिपल टी" यानी तृणमूल तोलाबाजी टैक्स के लिए बदनाम होने का आरोप लगाने के साथ-साथ विपक्षी महागठजोड़ की ममता की कोशिशों का भी मखौल उड़ाया.

प्रधानमंत्री ने नागरिकता (संशोधन) विधेयक की वकालत करते हुए तृणमूल कांग्रेस से राज्यसभा में उसका समर्थन करने की अपील की.

कोलकाता से सटे उत्तर 24-परगना जिले के ठाकुरनगर की सभा में भगदड़ जैसी स्थिति पैदा होने की वजह से मोदी को अपना भाषण समय से पहले खत्म करके वहां से जाना पड़ा. वहां भगदड़ और धक्कामुक्की में कई लोग घायल हो गए.

मतुआ समुदाय पर नज़र

उत्तर 24-परगना जिले में बांग्लादेश से लगे जिस ठाकुरनगर इलाके में मोदी की पहली सभा हुई वह राजनीतिक रूप से बेहद अहम है.

अंतरराष्ट्रीय मतुआ महासम्मेलन के मौके पर आयोजित इस रैली से पहले प्रधानमंत्री ने मतुआ ठाकुरबाड़ी जाकर बड़ो मां के नाम से मशहूर मतुआ समुदाय की नेता वाणी देवी से भी मुलाकात की.

यह इलाका मतुआ समुदाय का गढ़ है. यह समुदाय वर्ष 1947 में देश विभाजन के बाद शरणार्थी के तौर पर यहां आया था. राज्य में इस तबके की आबादी लगभग तीस लाख है और उत्तर व दक्षिण 24-परगना जिलों की कम से कम पांच सीटों पर यह निर्णायक स्थिति में है.

मोदी ने कहा, "इस तबके के कई लोगों को तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में अत्याचार सहना पड़ा था. भारत में यह लोग समुचित सम्मान और जगह के हकदार हैं. इसी वजह से केंद्र सरकार ने नागिरकता (संशोधन) विधेयक तैयार किया है. लेकिन तृणमूल कांग्रेस इसका विरोध कर रही है."

जब रैली में मची भगदड़

इस रैली में भारी भीड़ की वजह से भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई थी. पहले तो प्रधानमंत्री ने भीड़ से शांत रहने की अपील की. लेकिन, इसका असर नहीं होते देख उन्होंने लगभग 14 मिनट में ही अपना भाषण खत्म कर दिया और दुर्गापुर रवाना हो गए.

इस रैली ने बीते साल 16 जुलाई को पश्चिम मेदिनीपुर जिले में प्रधानमंत्री की उस रैली की यादें ताजा कर दीं जहां एक अस्थायी मंच टूटने से कम से कम 65 लोग घायल हो गए थे.

प्रदेश भाजपा नेताओं ने इस स्थिति के लिए राज्य पुलिस को जिम्मेदार ठहराया है. प्रदेश महासचिव प्रताप बनर्जी ने आरोप लगाया कि राज्य पुलिस के अधिकारियों की वजह से ही ऐसी स्थिति पैदा हुई. पुलिस ने भीड़ को संभालने के लिए कुछ भी नहीं किया. उन्होंने बताया कि देहरादून से पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने भी फोन कर हालात की जानकारी ली है.

बाद में दुर्गापुर की रैली में मोदी ने ठाकुरनगर की सभा के दौरान मां-बहनों को हुई दिक्कत के लिए खेद जताते हुए माफी भी मांगी.

पुलिस सूत्रों ने बताया कि भगदड़ जैसी स्थिति के चलते कम से कम तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. कई अन्य महिलाओं व बच्चों को भी चोटें आई हैं. उनको प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया.

मोदी का हमलावर रुख

बर्दवान जिले के दुर्गापुर में भाजपा के गणतंत्र बचाओ अभियान के दौरान रैली में मोदी बेहद हमलावर मूड में नजर आए. तृणमूल कांग्रेस सरकार की जम कर खिंचाई करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकार बंगाल में लोकतंत्र का गला घोंटने में जुटी है.

उन्होंने कहा कि राज्य के लोग बदलाव चाहते हैं और इस बार ममता बनर्जी सरकार को सत्ता से उखाड़ फेकेंगे. मोदी ने कहा, "आप मुझसे लिखित तौर पर ले सकते हैं कि इस सरकार का जाना तय है."

प्रधानमंत्री ने कहा, "राज्य में सत्तारुढ़ पार्टी 'तीन टी' यानी तृणमूल तोलाबाजी टैक्स के लिए कुख्यात है. स्कूलों और कॉलेजों में दाखिले से लेकर शैक्षणिक संस्थानों और दूसरी जगहों पर नौकरियों के लिए लोगों को ट्रिपल टी का भुगतान करना पड़ता है. लेकिन ऐसे हमेशा नहीं चल सकता."

स्थानीय भाषा में संगठित रूप से अवैध उगाही को तोलाबाज़ी कहा जाता है. मोदी ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी को राज्य के विकास की कोई फिक्र नहीं है. सिंडीकेट के जरिए फायदा नहीं मिलने की स्थिति में तृणमूल कांग्रेस किसी विकास परियोजना पर ध्यान नहीं देती. उन्होंने कहा, "तृणमूल कांग्रेस आम लोगों की उम्मीदों की हत्या कर रही है लेकिन केंद्र उनके सपनों को पूरा करेगा."

प्रधानमंत्री ने ममता पर केंद्रीय एजंसियों को बंगाल में जांच से रोकने का आरोप लगाते हुए उनकी खिंचाई की. उन्होंने सवाल किया, "दीदी जब आपने कोई ग़लत काम नहीं किया है तो इतनी डरी हुई क्यों हैं? आप किस बात से डर रही हैं."

महागठबंधन पर व्यंग्य

प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों के महागठबंधन की कोशिशों पर व्यंग्य कसते हुए कहा कि कुछ साल पहले जो एक दूसरे से नज़र से नज़र तक नहीं मिलाते थे, वह अब एक दूसरे से गले मिल रहे हैं.

मोदी ने बीते महीने कोलकाता में विपक्ष की साझा रैली का जिक्र करते हुए कहा, "इस चायवाले ने तमाम बड़े और ताकतवर लोगों की अवैध कमाई बंद कर दी है. यही वजह है कि तमाम तरह के लोग इस चौकीदार को हटाने की कसमें खा रहे हैं."

प्रधानमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करने के लिए उनको गालियां सुननी पड़ रही हैं.

बीजेपी आक्रामक क्यों

आखिर अचानक पश्चिम बंगाल में भाजपा और प्रधानमंत्री का रुख़ इतना हमलावर क्यों हो गया है? राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि पार्टी शायद समझ गई है कि दीदी के खिलाफ हमला ही रक्षा की सर्वश्रेष्ठ रणनीति है.

राजनीतिक विश्लेषक मनतोष नंदी कहते हैं, "इसकी कई वजहें हैं. पहली तो पार्टी की रथयात्रा को अनुमित नहीं मिलना. इससे जहां पार्टी की कोशिशें नाकाम हुईं वहीं, एक अहम का मसला भी बन गया. उसके बाद अमित शाह की मालदा रैली के मौके पर हेलीकॉप्टर उतारने की अनुमति में आनाकानी और फिर शाह की पिछली रैली के बाद टीएमसी कार्यकर्ताओं के हमले ने पार्टी को अपनी रणनीति में बदलाव पर मजबूर कर दिया है."

वह कहते हैं कि दीदी पर चौतरफा हमले के लिए ही भाजपा ने आने वाले दिनों में राज्य में थोक भाव से रैलियां करने की योजना बनाई है. इनमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के अलावा मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत कई नेता शिरकत करेंगे.

नंदी कहते हैं, "बंगाल के दक्षिण इलाके में शनिवार को मोदी की दो और उत्तरी इलाके में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की दो रैलियों से भाजपा की बदली रणनीति का पता चलता है. यह पहला मौका है जब प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने एक ही दिन बंगाल में दो-दो रैलियों को संबोधित किया है."

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