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बजट: क्या मोदी सरकार ने किसानों के लिए 'तेलंगाना का फ़ॉर्मूला' कॉपी किया?
- Author, प्रवीण कासम
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, तेलुगु सेवा
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
नरेंद्र मोदी सरकार ने शुक्रवार को आम चुनाव से पहले अंतरिम बजट पेश किया. इस बजट में छोटे किसानों के लिए प्रति वर्ष 6000 रुपए समर्थन राशि देने की घोषणा की गई.
इसके चलते सरकार पर सालाना 75 हज़ार करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा. दावा किया जा रहा है कि किसानों के बैंक खाते में सीधे पैसे देने की इस तरह की सबसे बड़ी योजना है.
बजट पेश होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "एक प्रकार से आज़ादी के बाद देश के इतिहास में किसानों के लिए बनी ये सबसे बड़ी योजना है."
लेकिन इसी तरह की एक योजना तेलंगाना के मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव पिछले साल राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ही शुरू कर चुके थे.
शुक्रवार को पेश किए गए बजट के अनुसार जिन किसानों के पास 2 हेक्टर तक ज़मीन है उनके बैंक खातों में सरकार के ज़रिए 6 हज़ार रूपए सालाना डाले जाएंगे. इस योजना को 'प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधी' कहा गया है.
तेलंगाना में के. चंद्रशेखर राव की सरकार पिछले साल 'रायतु बंधु' नामक योजना की शुरुआत कर चुकी है जिसके तहत तेलंगाना के किसानों के खाते में सीधे लाभांश राशि पहुंचाई जाती है.
मीडिया में पहले से ही यह सुगबुगाहट थी कि मोदी सरकार अपने इस बजट में तेलंगाना जैसी किसी योजना की घोषणा कर सकती है.
केसीआर के नेतृत्व में तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने राज्य विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान रायतु बंधु योजना को अपनी एक बड़ी सफलता के तौर पर पेश किया था.
इस योजना की शुरुआत के 6 महीने बाद ही तेलंगाना में चुनाव हुए थे और चंद्रशेखर राव की पार्टी टीआरएस ने इनमें जीत दर्ज की थी.
तेलंगाना के किसानों ने रायतु बंधु योजना को ख़ासा पसंद किया था. केंद्रीय वित्तीय आयोग के पूर्व सचिव अरविंद सुब्रमनियम ने इस योजना को किसानों के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण बताया था.
इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित उनके लेख में उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार को भी इसी तरह की कोई योजना देशभर के किसानों के लिए शुरू करनी चाहिए.
हालांकि तेलंगाना सरकार की इस योजना की कई जगहों पर आलोचना भी हुई थी. भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा था कि किसानों के क़र्ज़ माफ़ करना समस्या का समाधान नहीं है.
क्या है तेलंगाना की रायतु बंधु योजना?
रायतु बंधु, तेलंगाना सरकार के ज़रिए शुरू की गई किसान कल्याण योजना है जिसके तहत सरकार किसानों के खाते में दो अलग-अलग चरणों में प्रति एकड़ 4 हज़ार रुपए जमा करती है.
यह मदद दो चरणों में दी जाती है जो कि ख़रीफ़ और रबी फ़सल के अनुसार है. किसानों को चेक के ज़रिए प्रति एकड़ 4 हज़ार रुपए दिए जाते हैं और इसकी अधिकतम राशि 8 हज़ार रुपए प्रतिवर्ष तक हो सकती है.
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने 10 मई 2018 को करीमनगर ज़िले में इस योजना की शुरुआत की थी.
इस योजना के लिए राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2018-19 के बजट से 12 हज़ार करोड़ रुपए आवंटित किए थे.
इसके साथ ही इस योजना को सही तरीके से लागू करने के लिए कृषि विभाग ने एक अलग से वेबसाइट भी तैयार की थी.
इस योजना के अंतर्गत सभी किसान को रखा गया. यह बाध्यता नहीं थी कि जिनके पास एक निश्चित आंकड़े से ज़्यादा ज़मीन होगी वो इसका लाभ नहीं उठा पाएंगे. हालांकि इस योजना में भूमिहीन या बटाईदार किसानों को शामिल नहीं किया गया था.
केसीआर सरकार और मोदी सरकार की योजनाओं के बीच यही एक बड़ा अंतर देखा जा रहा है. इसके अलावा किसानों को दी जाने वाली रक़म में भी अंतर है.
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधी योजना के बारे में अभी अधिक जानकारी का इंतज़ार है. और जानकारी आने पर ही पता चलेगा कि इसे लागू कैसे किया जाएगा.
तेलंगाना में 58 लाख योग्य किसानों को इस योजना के तहत पट्टादार पासबुक दी गई है. एक समिति योजना के कामकाज पर अपनी नज़र रखती है. इसमें वित्त, बैंकिंग, कृषि और राज्य सूचना विभाग के अधिकारी शामिल रहते हैं.
किसानों को चेक के ज़रिए पैसे दिए जाते हैं और इस योजना में राज्य के आठ बैंक शामिल हैं. ये चेक़ सिर्फ रजिस्टर्ड किसानों और पट्टादार पासबुक प्राप्त करने वाले किसानों को ही दिए जाते हैं.
कितने किसानों को चेक मिले और इस योजना की तमाम जानकारियां रायतु बंधु योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट की जाती है.
इस वेबसाइट पर लाभार्थी का नाम, आधार संख्या, उम्र, पासबुक नंबर, गांव का नाम, मंडल और ज़िले की जानकारी दी जाती है.
इस चेक़ पर रायतु बंधु योजना का स्टैम्प लगा रहता है और चेक तीन महीने के लिए वैध रहता है. अगर समय के भीतर किसान चेक ना जमा कर सके तो चेक की वैधता पूरी होने के बाद उस चेक को एक बार फिर जारी किया जा सकता है.
जब से यह योजना लागू हुई है तब से अब तक लाभार्थियों को दो बार चेक मिल चुके हैं.
एक तरफ़ जहां तेलंगाना सरकार अपनी इस योजना को किसानों के लिए अभी तक की सबसे बड़ी कल्याणकारी योजना क़रार देती है वहीं विपक्षी दल इसकी यह कहते हुए आलोचना करते हैं कि इसमें सिर्फ़ बड़े किसानों को लाभ मिल रहा है जबकि छोटे और भूमिहीन किसानों को इससे बाहर रखा गया है.
बाकी राज्यों में कैसी योजनाएं?
और भी कई राज्यों ने किसानों के कल्याण के लिए योजनाएं शुरू करने की कोशिश की है.
ओडिशा और झारखंड में रायतु बंधु जैसी ही योजनाओं में कुछ बदलाव कर उन्हें लागू किया गया है.
ओडिशा सरकार ने 'कालिया' नामक योजना की शुरुआत की है, इसका पूरा नाम आजीविका और आय संवर्धन के लिए कृषक सहायता है.
इस योजना के तहत किसानों को दो चरणों में 10 हज़ार रुपए तक की मदद निवेश में दी जाती है. इस योजना में छोटे और बटाईदार किसान भी शामिल किए गए हैं.
वहीं झारखंड सरकार ने भी फ़ैसला किया है कि वह किसानों को हर साल प्रति एकड़ के हिसाब से पांच हज़ार रुपए देगी.
झारखंड में इस योजना का लाभ पांच एकड़ से कम ज़मीन वाले किसान को ही मिलेगा. इस योजना का नाम मुख्यमंत्री कृषि योजना रखा गया है, और यह अगले वित्तीय वर्ष से लागू होगी. बताया जा रहा है कि इस योजना का लाभ 22.76 लाख किसानों को मिलेगा.
इसी तरह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी भी किसानों को हर साल निवेश में पांच हज़ार रुपए की मदद की घोषणा कर चुकी है.
ख़ैर इस बीच टीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के. तारक रामा राव ने ट्वीट किया कि "देश के कई राज्य उनकी योजना को अपना रहे हैं. ये ख़ुशी की बात है कि भारत के किसानों को रायतु बंधु जैसी योजना का लाभ मिलेगा."
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