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पुलवामा CRPF हमला: जम्मू में कई जगह कर्फ़्यू, सांप्रदायिक तनाव बरक़रार
- Author, रियाज़ मसरूर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ़ क़ाफ़िले पर हमले में 40 से ज्यादा जवानों के मारे जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बनी हुई है.
साथ ही जम्मू में मुसलमानों का उत्पीड़न और उनकी संपत्ति को नुक़सान पहुंचाने की घटनाएं सामने आई हैं.
जम्मू की ज़्यादातर जगहों पर शुक्रवार से ही कर्फ़्यू लागू है, हालांकि शनिवार को भी पाकिस्तान के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन का सिलसिला जारी रहा.
पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कार्रवाई को लेकर हुए इन प्रदर्शनों में भाजपा और पेंथर्स पार्टी के नेता भी शामिल थे.
पेंथर्स पार्टी के नेता हर्षदेव सिंह ने कहा है, "हर बार वादा किया जाता है कि पाकिस्तान को सबक़ सिखाया जाएगा, लेकिन होता कुछ नहीं. अब हम चुप नहीं बैठेंगे."
जम्मू में बहुत से विरोध प्रदर्शन उन जगहों से गुज़रे जहां कश्मीरी लोगों की तादाद अधिक है.
वहीं, जम्मू के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों में पढ़ रहे कश्मीरी छात्रों ने आरोप लगाए हैं कि उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है और कश्मीर वापस जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है.
इन घटनाओं पर कश्मीर में भी विरोध प्रदर्शन हुआ है. शनिवार दोपहर को लाल चौक पर युवाओं ने केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया.
व्यापारियों ने दिन के तीन बजे विरोध प्रदर्शन के रूप में कामकाज बंद कर दिया और सरकार पर दबाव बनाना चाहा कि वह जम्मू और अन्य राज्यों में मौजूद कश्मीरियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करें.
ट्रेडर्स फ़ेडरेशन लाल चौक के चेयरमेन बशीर अहमद ने बताया कि जम्मू का उद्योग कश्मीर की मार्केट पर निर्भर है और कश्मीरियों का उत्पीड़न करने का सिलसिला दो दिन के अंदर बंद नहीं किया गया तो 'हम जम्मू का बायकॉट करेंगे.'
राजनीतिक वर्गों में भी कश्मीरियों को पीड़ित किए जाने की घटना पर विरोध प्रदर्शन दर्ज कराया है.
पूर्व मुख्यमंत्रियों ने भी जताया विरोध
पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने कहा है कि मातम और संवेदना की बजाय हिंदू को मुसलमान से और जम्मू को कश्मीर से टकराने की कोशिश की जा रही है. पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी कश्मीरियों को आ रही दिक़्क़तों के ख़िलाफ़ नाराज़गी जताई.
दोनों ने केंद्र सरकार से अपील की कि कश्मीरियों की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाए. बाद में केंद्र सरकार ने सभी राज्यों की सरकारों से कहा कि वे कश्मीरियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क़दम उठाएं.
विधानसभा के पूर्व सदस्य इंजीनियर रशीद का कहना है कि पुलवामा में हुए हमले को सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है. उनका कहना है, "यह घटना बेहद अफ़सोसजनक है. हम ही जानते हैं कि युवाओं के जाने से दिल पर क्या गुज़रती है लेकिन जम्मू में जो लोग सीआरपीएफ़ जवानों की चिंता में उन्माद पैदा करने पर तुले हैं, उन्हें अगर उतनी ही चिंता होती तो मारे गए जवानों में राजौरी के एक जवान नसीर अहमद भी हैं तो उनके घर जाते और संवेदना ज़ाहिर करते."
ग़ौरतलब है कि सन 2008 में भी जम्मू के बहुसंख्य हिंदू और कश्मीर के बहुसंख्यक मुसलमानों के बीच अमरनाथ श्राइन बोर्ड को सरकारी ज़मीन अलॉट किए जाने के मुद्दे पर सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया था.
कई विशेषज्ञ कहते हैं कि 2008 भी चुनाव का साल था और इस साल भी चंद महीने में संसद और विधानसभा के लिए चुनाव होने हैं.
14 फ़रवरी को दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा ज़िले में जम्मू-श्रीनगर हाइवे पर सीआरपीएफ़ के क़ाफ़िले पर फ़िदायीन हमले में 40 से अधिक जवान मारे गए और कई ज़ख़्मी हुए.
फ़ौज के मुताबिक़ शनिवार को भी राजौरी ज़िले में एलओसी के नौशहरा सेक्टर में एक बारूदी सुरंग धमाके में भारतीय फ़ौज का एक मेजर और एक जवान मारे गए हैं.
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