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क्या है क्लस्टर बम जिसके इस्तेमाल का पाकिस्तान ने भारत पर लगाया आरोप?
पाकिस्तान ने भारत पर नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी करने का आरोप लगाया है जिसमें दो लोगों की मौत हुई है और 11 लोग घायल हैं. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ़ ग़फ़ूर और विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने इस पर ट्वीट किए हैं.
शाह महमूद क़ुरैशी ने ट्वीट किया है कि भारतीय सुरक्षाबलों ने क्लस्टर बमों का इस्तेमाल किया है जो जिनेवा संधि और अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन है.
उन्होंने लिखा है, "नियंत्रण रेखा पर आम नागरिकों को निशाना बनाकर भारतीय सेना द्वारा किए गए क्लस्टर बमों के इस्तेमाल की मैं निंदा करता हूं. यह जिनेवा संधि और अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन है."
इसके बाद क़ुरैशी ने अगला ट्वीट किया और उसमें भारत को क्षेत्रीय शांति बिगाड़ने वाला बताया. उन्होंने लिखा कि युद्धोन्माद फैलाने वाला भारत न केवल क्षेत्रीय शांति को अस्थिर कर रहा है बल्कि नियंत्रण रेखा पर मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा है.
विदेश मंत्री क़ुरैशी ने इस ट्वीट में दुनिया के देशों से मांग की है कि वे नियंत्रण रेखा और भारत प्रशासित कश्मीर की हालिया स्थिति का संज्ञान लें.
वहीं, पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ़ ग़फ़ूर ने भी भारत पर अंतर्राष्ट्रीय समझौता तोड़ने के आरोप लगाए हैं.
उन्होंने ट्वीट में लिखा है, "भारतीय सेना द्वारा क्लस्टर बमों का इस्तेमाल अंतर्राष्ट्रीय समझौतों का उल्लंघन है और यह निंदनीय है. कोई भी हथियार आत्मनिर्णय के अपने अधिकार को पाने के लिए कश्मीरियों के दृढ़ संकल्प को दबा नहीं सकता है. कश्मीर हर पाकिस्तानी के ख़ून में बहता है. कश्मीरियों का स्वतंत्रता संग्राम सफल होगा."
भारतीय सेना ने पाकिस्तान के इन आरोपों को ख़ारिज किया है. भारतीय सेना ने कहा है कि पाकिस्तानी सेना लगातार घुसपैठ कराकर और उन्हें हथियार देकर चरमपंथियों को बढ़ावा देता है.
भारतीय सेना के बयान में आगे कहा गया है कि भारतीय सेना हमेशा प्रतिक्रिया का जवाब देती है और इस तरह की प्रतिक्रिया केवल पाकिस्तानी सेना की सैन्य चौकियों और उनके द्वारा मदद पा रहे चरमपंथी घुसपैठियों के ख़िलाफ़ की गई है.
क्या है क्लस्टर बम
जिनेवा समझौते के तहत क्लस्टर बमों का उत्पादन और इस्तेमाल प्रतिबंधित है मगर कई देशों और सेनाओं पर इनके युद्ध या सशस्त्र संघर्ष में इस्तेमाल करने के आरोप लगते रहे हैं.
ये ख़तरनाक इसलिए माने जाते हैं क्योंकि मुख्य बम से निकलने वाले कई सारे छोटे विस्फोटक निर्धारित लक्ष्य के आसपास भी नुक़सान पहुंचाते हैं.
इससे संघर्ष के दौरान आम नागरिकों को नुक़सान पहुंचने की आशंका बढ़ जाती है. यही नहीं, मुख्य बम के फटने के बाद आसपास गिरने वाले छोटे विस्फोटक लंबे समय तक पड़े रह सकते हैं.
ऐसे में संघर्ष समाप्त हो जाने के बाद भी इनकी चपेट में आने से जान-माल के नुक़सान की घटनाएं देखने को मिलती हैं.
यह विरोधी सैनिकों को मारने या उनके वाहनों को नुक़सान पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. इन्हें लड़ाकू विमानों से गिराया या ज़मीन से लॉन्च किया जा सकता है.
भारत-पाकिस्तान दोनों संधि में शामिल नहीं
2008 में डबलिन में कन्वेंशन ऑन क्लस्टर म्यूनिशन नाम से अंतरराष्ट्रीय संधि अस्तित्व में आई जिसके तहत क्लस्टर बमों को रखने, बेचने या इस्तेमाल करने पर रोक लगाने का प्रस्ताव था.
तीन दिसंबर 2008 से इस पर हस्ताक्षरों की शुरुआत हुई और सितंबर 2018 तक 108 देश इस पर हस्ताक्षर कर चुके थे जबकि 106 ने इसे अपनाने में सैद्धांतिक सहमति दी थी.
मगर कई देशों ने इस संधि का विरोध भी किया था जिनमें चीन, रूस, इसराइल और अमरीका के साथ भारत और पाकिस्तान भी शामिल थे. इन दोनों देशों ने अब भी इस संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं.
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