असमिया मुसलमानों की अलग से जनगणना - प्रेस रिव्यू

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असम की बीजेपी सरकार इस साल मार्च में सामाजिक-आर्थिक जनगणना करवाने जा रही है. इस जनगणना में राज्य के मूलनिवासी मुसलमानों की पहचान की जाएगी.

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के अनुसार, असम माइनॉरिटीज़ डिवेलपमेंट बोर्ड के चेयरमैन मुमीनुल ऑवाल ने इस बात की जानकारी दी है.

ऑवाल ने कहा कि इस जनगणना का मक़सद मूलनिवासी मुसलमानों को पहले के पूर्वी बंगाल, पूर्वी पाकिस्तान या बांग्लादेश से आए मुसलमानों से अलग करना है.

इस सर्वे में गोरिया, मोरिया, देसी और जोल्हा समुदायों को कवर किया जाएगा. सरकार इन समुदायों को अन्य जनजातियों की तरह राज्य का मूलनिवासी मानती है.

मुमीनुल ऑवाल ने कहा कि इस जनगणना के लिए तैयारी अंतिम चरणों में है और इसी वित्त वर्ष में यह काम कर लिया जाएगा.

करतारपुर

करतारपुर: भारतीयों को बिना वीज़ा एंट्री देने पर विचार

पाकिस्तान के गृह मंत्री एजाज़ शाह ने कहा है कि उनका देश गुरुद्वारा दरबार साहिब के लिए और मेहमानों को आकर्षित करने के लिए बिना वीज़ा एंट्री देने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है.

इकनॉमिक टाइम्स की ख़बर के अनुसार, अगर इस प्रस्ताव को अमली जामा पहनाया गया तो भारतीय श्रद्धालु बिना पासपोर्ट करतारपुर कॉरिडोर में प्रवेश कर पाएंगे.

भारत और पाकिस्तान ने पिछले साल नवंबर में इस गलियारे के हिस्सों को अपनी-अपनी ओर उद्घाटन किया था.

यह गलियारा पाकिस्तान के नरोवाल ज़िले के करतारपुर क्षेत्र में गुरुद्वारा दरबार साहिब के लिए सबसे छोटा रास्ता प्रदान करता है. इस जगह पर गुरु नानक ने अपने जीवन के अंतिम वर्ष बिताए थे.

कोरोना वायरस

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चीनी सामान पर असर

भारतीय बाज़ारों में चीन से आने वाले विभिन्न उत्पादों की धूम रहती है क्योंकि ये सस्ते होते हैं. मगर नवभारत टाइम्स की ख़बर के अनुसार, अब चीनी सामान महंगा हो सकता है.

ख़बर के मुताबिक़, कोरोना वायरस की वजह से चीन की कई मैन्युफैक्चरिंग फैक्ट्रियों में छुट्टी कर दी गई है. इस कारण भारत में चीन से आयात किए जा रहे सामान पर प्रभाव पड़ा है.

इसकी वजह से चीज़ों के दाम में बढ़ोतरी हुई है और कारोबार पर भी असर दिख रहा है.

अख़बार लिखता है कि दुकानदारों का कहना है कि अगर आने वाले समय में चीन से आ रहे सामान की सप्लाई सही नहीं होती है तो क़ीमतें और बढ़ सकती हैं.

केस से पहले अनिवार्य मध्यस्थता ज़रूरी: चीफ़ जस्टिस बोबडे

चीफ़ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा है कि एक ऐसा क़ानून बनाने के लिए यह उपयुक्त समय है, जिसमें मुक़दमे से पहले अनिवार्य मध्यस्थता का प्रावधान हो.

चीफ़ जस्टिस बोबडे

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हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के अनुसार, उन्होंने कहा कि इससे न्यायालय में किसी मामले को निपटाने में कम समय लगेगा और कार्यक्षमता भी बढ़ेगी.

जस्टिस बोबडे ने शनिवार को 'वैश्वीकरण के युग में मध्यस्थता' विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में ये बातें कहीं.

उन्होंने कहा कि भारत में संस्थागत मध्यस्थता के विकास के लिए एक मज़बूत 'आरबिट्रेशन (मध्यस्थता) बार' ज़रूरी है, क्योंकि यह ज्ञान और अनुभव वाले पेशेवरों की उपलब्धता और पहुंच सुनिश्चित करेगा.

चीफ़ जस्टिस ने अपने भाषण के दौरान एक मौक़े पर यह भी कहा कि किसी भी जज का लक्ष्य लोकप्रियता पाना नहीं होता है.

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